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Budaun News: कार्टून कैरेक्टर में खो रहे बच्चे, व्यवहार में बढ़ रहा चिड़चिड़ापन
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बदायूं। मोबाइल और टेबलेट बच्चों की दिनचर्या का हिस्सा बनते जा रहे हैं। कार्टून और एनिमेशन देखने में बच्चे घंटों समय बिता रहे हैं। धीरे-धीरे इसका असर उनके व्यवहार में भी नजर आने लगा है। स्क्रीन बंद करने को कहने पर जिद करना, छोटी-छोटी बातों पर चिड़ना और परिवार के लोगों से बातचीत के बजाय मोबाइल में व्यस्त रहना अभिभावकों के लिए चिंता का कारण बन रहा है।
शहर निवासी आरव सिंह (8) रोजाना कई घंटे मोबाइल पर कार्टून देखता है। उसके पिता के अनुसार, मोबाइल हटाने पर वह नाराज हो जाता है और कुछ देर तक किसी से बात नहीं करता। इसी तरह अनन्या वर्मा (7) भी टीवी पर एनिमेशन देखने में काफी समय बिताती है। परिवार के लोगों का कहना है कि पहले वह बाहर बच्चों के साथ खेलती थी, लेकिन अब खाली समय में टीवी ऑन करके कार्टून देखती रहती है। यहां तक की कई बार कार्टून कैरेक्टर के हिसाब से ही व्यवहार भी करती है। ऐसे में उन्होंने जिला अस्पताल में स्थित क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डाॅ. सर्वेश कुमारी कोे दिखाया, ताकि उनको इससे राहत मिल सके।
बच्चे हो रहे एक ही तरह की गतिविधि में अधिक समय बिताने के आदी
- बच्चों में स्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। इससे उनका खेलना, परिवार के साथ बातचीत करना और दूसरे बच्चों के साथ घुलना-मिलना भी प्रभावित हो रहा है। लगातार स्क्रीन देखने के कारण बच्चे एक ही तरह की गतिविधि में अधिक समय बिताने के आदी हो रहे हैं। अभिभावकों को बच्चों की स्क्रीन देखने की अवधि तय करने के साथ उनके साथ पर्याप्त समय बिताने की जरूरत है।
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नजरअंदाज न करें बच्चों में आ रहे बदलाव को
जिला अस्पताल की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डाॅ. सर्वेश कुमारी के अनुसार, बच्चों में अत्यधिक स्क्रीन टाइम के कारण चिड़चिड़ापन, जिद और स्क्रीन न मिलने पर बेचैनी जैसी व्यवहार संबंधी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं। हालांकि, हर बच्चे पर इसका असर एक जैसा नहीं होता। अभिभावकों को बच्चों के स्क्रीन टाइम के साथ उनकी नींद, पढ़ाई, खेल और सामाजिक व्यवहार पर भी नजर रखनी चाहिए। बच्चे के व्यवहार में लगातार बदलाव दिखाई दे तो विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
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शहर निवासी आरव सिंह (8) रोजाना कई घंटे मोबाइल पर कार्टून देखता है। उसके पिता के अनुसार, मोबाइल हटाने पर वह नाराज हो जाता है और कुछ देर तक किसी से बात नहीं करता। इसी तरह अनन्या वर्मा (7) भी टीवी पर एनिमेशन देखने में काफी समय बिताती है। परिवार के लोगों का कहना है कि पहले वह बाहर बच्चों के साथ खेलती थी, लेकिन अब खाली समय में टीवी ऑन करके कार्टून देखती रहती है। यहां तक की कई बार कार्टून कैरेक्टर के हिसाब से ही व्यवहार भी करती है। ऐसे में उन्होंने जिला अस्पताल में स्थित क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डाॅ. सर्वेश कुमारी कोे दिखाया, ताकि उनको इससे राहत मिल सके।
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बच्चे हो रहे एक ही तरह की गतिविधि में अधिक समय बिताने के आदी
- बच्चों में स्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। इससे उनका खेलना, परिवार के साथ बातचीत करना और दूसरे बच्चों के साथ घुलना-मिलना भी प्रभावित हो रहा है। लगातार स्क्रीन देखने के कारण बच्चे एक ही तरह की गतिविधि में अधिक समय बिताने के आदी हो रहे हैं। अभिभावकों को बच्चों की स्क्रीन देखने की अवधि तय करने के साथ उनके साथ पर्याप्त समय बिताने की जरूरत है।
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नजरअंदाज न करें बच्चों में आ रहे बदलाव को
जिला अस्पताल की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डाॅ. सर्वेश कुमारी के अनुसार, बच्चों में अत्यधिक स्क्रीन टाइम के कारण चिड़चिड़ापन, जिद और स्क्रीन न मिलने पर बेचैनी जैसी व्यवहार संबंधी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं। हालांकि, हर बच्चे पर इसका असर एक जैसा नहीं होता। अभिभावकों को बच्चों के स्क्रीन टाइम के साथ उनकी नींद, पढ़ाई, खेल और सामाजिक व्यवहार पर भी नजर रखनी चाहिए। बच्चे के व्यवहार में लगातार बदलाव दिखाई दे तो विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।