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जरूरतमंद बच्चों की मदद के लिए बनी है चाइल्ड लाइन
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
Updated Thu, 23 Mar 2017 12:21 AM IST
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- बाल अधिकार संरक्षण जागरूकता विषय पर हुई कार्यशाला
चाइल्ड लाइन केन्द्र म्याऊं पर चाइल्ड लाइन वालेंटियर टीम की ओर से बाल अधिकार संरक्षण जागरूकता विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर नर सिंह प्रभाकर ने बाल अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने चाइल्ड लाइन की सेवाओं के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि चाइल्ड लाइन-1098 चौबीस घंटे चलने वाली मुफ्त आपातकालीन राष्ट्रीय फोन सेवा है। यह उन बच्चों के लिए जिन्हें देखभाल एवं सुरक्षा की जरूरत है। कोई बच्चा बीमार या अकेला हो, किसी बच्चे को आश्रय की जरूरत हो, कोई बच्चा छोड़ दिया गया हो, कोई बच्चा बीमार या अनाथ या बेसहारा हो, बाल बंधुआ मजदूर हो या बच्चे से मजदूरी करवा कर उसकी मजदूरी न दी गई हो, रास्ते पर किसी बच्चे का उत्पीड़न हो रहा हो तो 1098 पर कोई भी व्यक्ति कॉल कर बच्चे की मदद कर सकता है। कार्यशाला में महेन्द्र सिंह ने कहा कि बच्चों का किसी प्रकार से उत्पीड़न न हो, इसके लिए उन्हें संरक्षण देने की जरूरत है तथा बच्चों को नियमित स्कूल भेजने और उन्हें अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए सबको आगे आना चाहिए। कार्यशाला में उदयवीर सिंह, राजवीर सिंह, सत्यवती, दुर्वेश कुमार, आशीष कुमार, भीमसेन भारती, महेन्द्रपाल आदि ने विचार व्यक्त किए।
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चाइल्ड लाइन केन्द्र म्याऊं पर चाइल्ड लाइन वालेंटियर टीम की ओर से बाल अधिकार संरक्षण जागरूकता विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर नर सिंह प्रभाकर ने बाल अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने चाइल्ड लाइन की सेवाओं के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि चाइल्ड लाइन-1098 चौबीस घंटे चलने वाली मुफ्त आपातकालीन राष्ट्रीय फोन सेवा है। यह उन बच्चों के लिए जिन्हें देखभाल एवं सुरक्षा की जरूरत है। कोई बच्चा बीमार या अकेला हो, किसी बच्चे को आश्रय की जरूरत हो, कोई बच्चा छोड़ दिया गया हो, कोई बच्चा बीमार या अनाथ या बेसहारा हो, बाल बंधुआ मजदूर हो या बच्चे से मजदूरी करवा कर उसकी मजदूरी न दी गई हो, रास्ते पर किसी बच्चे का उत्पीड़न हो रहा हो तो 1098 पर कोई भी व्यक्ति कॉल कर बच्चे की मदद कर सकता है। कार्यशाला में महेन्द्र सिंह ने कहा कि बच्चों का किसी प्रकार से उत्पीड़न न हो, इसके लिए उन्हें संरक्षण देने की जरूरत है तथा बच्चों को नियमित स्कूल भेजने और उन्हें अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए सबको आगे आना चाहिए। कार्यशाला में उदयवीर सिंह, राजवीर सिंह, सत्यवती, दुर्वेश कुमार, आशीष कुमार, भीमसेन भारती, महेन्द्रपाल आदि ने विचार व्यक्त किए।
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