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युवा गजलकारों को नहीं मिल रहा प्लेटफार्म
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
Updated Fri, 04 Nov 2016 11:13 PM IST
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महोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
राजनीतिक मुद्दों पर नहीं किया कोई कमेंट
स्मृति वंदन महोत्सव के कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे गजलकार पंकज उधास एक होटल में पत्रकारों से रूबरू हुए। गजल की घटती लोकप्रियता पर बॉलीवुड के हिट गजलकार कहा कि गजल एक परंपरा है, जो संगीत की बुनियाद से जुड़ा हुआ है। इसका लोप कभी नहीं हो सकता है। गजलकार और गजल सुनने वाला वर्ग हमेशा से अलग रहा है, जो सादगी पसंद होता है। कहा कि इन दिनों युवा गजलकारों को प्लेटफार्म नहीं मिल रहा है, जिससे उनमें हताशा होती है।
पंकज ने बताया वह गजल खजाना के नाम से प्रतिवर्ष मुंबई में एक कार्यक्रम करते हैं, जिसमें युवा कलाकारों को आगे बढ़ाने का काम किया जाता है। गजल के नए फनकार बहुत टैलेंटेड है, जो बहुत अच्छी गजलें सुनाते हैं। गजलकारों को फिल्मों, टेलीविजन और मीडिया में पर्याप्त मौके नहीं मिल पा रहे हैं। इससे अच्छे गजलकारों को सामने आने का मौका नहीं मिल पा रहा है। गजल को बढ़ावा देने के लिए मीडिया के साथ की जरूरत है।
आधुनिक संगीत के बारे में कहा कि यह महज चंद रोज का होता है, जो आता-जाता रहता है। नए दौर का संगीत लोगों की जुबां पर ज्यादा नहीं रुक सकता है, जबकि गजल सालों-साल लोगों को याद रहती है। सर्जिकल स्ट्राइक पर उधास ने कहा कि राजनीतिक मसलों पर वह कोई टिप्पणी नहीं देना चाहते हैं।
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स्मृति वंदन महोत्सव के कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे गजलकार पंकज उधास एक होटल में पत्रकारों से रूबरू हुए। गजल की घटती लोकप्रियता पर बॉलीवुड के हिट गजलकार कहा कि गजल एक परंपरा है, जो संगीत की बुनियाद से जुड़ा हुआ है। इसका लोप कभी नहीं हो सकता है। गजलकार और गजल सुनने वाला वर्ग हमेशा से अलग रहा है, जो सादगी पसंद होता है। कहा कि इन दिनों युवा गजलकारों को प्लेटफार्म नहीं मिल रहा है, जिससे उनमें हताशा होती है।
पंकज ने बताया वह गजल खजाना के नाम से प्रतिवर्ष मुंबई में एक कार्यक्रम करते हैं, जिसमें युवा कलाकारों को आगे बढ़ाने का काम किया जाता है। गजल के नए फनकार बहुत टैलेंटेड है, जो बहुत अच्छी गजलें सुनाते हैं। गजलकारों को फिल्मों, टेलीविजन और मीडिया में पर्याप्त मौके नहीं मिल पा रहे हैं। इससे अच्छे गजलकारों को सामने आने का मौका नहीं मिल पा रहा है। गजल को बढ़ावा देने के लिए मीडिया के साथ की जरूरत है।
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आधुनिक संगीत के बारे में कहा कि यह महज चंद रोज का होता है, जो आता-जाता रहता है। नए दौर का संगीत लोगों की जुबां पर ज्यादा नहीं रुक सकता है, जबकि गजल सालों-साल लोगों को याद रहती है। सर्जिकल स्ट्राइक पर उधास ने कहा कि राजनीतिक मसलों पर वह कोई टिप्पणी नहीं देना चाहते हैं।
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