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परिवहन निगम की लाचारी...खटारा बसें यात्रियों पर पड़ रही भारी
सार
वर्कशॉप में समय से काम न होने के कारण परिवहन निगम के बदायूं डिपो की बसों का हाल खराब है।कई बार तो डिपो की बसें रास्ते में खड़ी हो जाती हैं।बदायूं से बरेली जा रहे आवास विकास के अंकित शर्मा का कहना है कि एक घंटे से उनको बस नहीं मिली।
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वर्कशॉप में खड़ी खटारा बस। संवाद
- फोटो : BADAUN
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विस्तार
बदायूं। वर्कशॉप में समय से काम न होने के कारण परिवहन निगम के बदायूं डिपो की बसों का हाल खराब है। लापरवाही बरेली वर्कशॉप स्तर से हो रही है और उसका असर यहां दिख रहा है। ऐसे में डिपो को अच्छी कमाई देने वाली बसों के इंजन भी धोखा दे रहे हैं। बरेली वर्कशॉप से पुर्जे मिलने में देरी के कारण बसों को कई-कई दिन वर्कशॉप में खड़ा रखना पड़ रहा है।
बदायूं डिपो के बेड़े में निगम की 131 और अनुबंधित 37 बसें हैं। निगम की 131 में से 50 बसें ऐसी हैं जो दस वर्ष से ज्यादा पुरानी हैं और इनके दिल्ली में प्रवेश पर पाबंदी है। 37 ऐसी बसें हैं जो नीलामी की लाइन में हैं। शेष 81 बसों में से भी करीब 20 की स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। कई नई बसें भी इंजन और पंप की खराबी के कारण दौड़ने में हांफती हैं। इनमें ऐसी बसें भी शामिल हैं जो प्रतिदिन 25 हजार रुपये तक की कमाई करती हैं। बरेली वर्कशॉप से समय से पुर्जे न मिलने के कारण यहां वर्कशॉप में बसों की मरम्मत नहीं हो पाती। कई बार तो डिपो की बसें रास्ते में खड़ी हो जाती हैं। दरअसल, बसों के इंजन संबंधी ज्यादातर काम बरेली वर्कशॉप में होते हैं। अन्य छोटे काम बदायूं वर्कशॉप में ही होते हैं, लेकिन इसके लिए पुर्जे और अन्य सामान बरेली वर्कशॉप से मंगाना होता है।
इसी क्रम में डिपो की आठ बसें कई दिन से बरेली वर्कशॉप में खड़ी हैं और बदायूं वर्कशॉप में भी पुर्जे न मिलने के कारण करीब 15 बसें खड़ी हुई हैं। इस कारण बदायूं-फर्रुखाबाद, बदायूं-कासगंज, बदायूं-दातागंज, बदायूं-चंदौसी रूटों पर यात्रियों को समस्या होती है।
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यात्री बोले- घंटो करना पड़ता है इंतजार
इन दिनों त्योहार या सहालग का सीजन नहीं है। ऐसे में सवारियों का दबाव कम है। वैसे कई रूटों पर बसों की कमी के कारण यात्रियों को घंटों इंतजार करना होता है। सबसे ज्यादा समस्या बदायूं-फर्रुखाबाद रोड पर है। बस स्टैंड पर मिले फर्रुखाबाद के राजेपुर निवासी विमल दो घंटे से बस का इंतजार करते खड़े मिले। कलान निवासी राजेश गुप्ता का कहना है कि बरेली के लिए हर 30 मिनट में बस मिलने का अधिकारी दावा करते हैं, लेकिन ऐसा होता नहीं है। बदायूं से बरेली जा रहे आवास विकास के अंकित शर्मा का कहना है कि एक घंटे से उनको बस नहीं मिली। एटा जिले के अमापुर निवासी अवधेश का कहना है कि उनके रूट पर बस कभी समय से नहीं चलतीं।
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स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से शुरू की गई बस सेवा भी लगभग ठप
स्वतंत्रता दिवस पर बदायूं डिपो को दो नई बसें मिली थी। यह बसें स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों कुंवर रुकुम सिंह और चौधरी बदन सिंह के नाम से शुरू की गईं, लेकिन एक महीने में ही बस सेवा लगभग बंद हो गई है। दरअसल, आधुनिक तकनीकी की इन नई बसों में एक बस खराब हो गई है और वह लखनऊ वर्कशॉप में खड़ी है। एक महीने के भीतर पांच बार बसें खराब हो चुकी हैं। हर बार वर्कशॉप में चार से पांच दिन खड़ा रहना पड़ा है। अब एक ही बस चल रही है। एआरएम विनोद कुमार शुक्ला ने बताया कि आधुनिक तकनीक ही यह बसें बरेली वर्कशॉप में भी ठीक नहीं हो पातीं। ऐसे में इनको लखनऊ भेजना पड़ता है।
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फोटो- 6
बसों में मरम्मत के बड़े काम बरेली वर्कशॉप में होते हैं। इन दिनों वहां डिपो की आठ बसें खड़ी हैं। उनमें इंजन संबंधी व अन्य काम होने हैं। करीब 15 बसों में हमारे वर्कशॉप में काम चल रहा है। करीब 50 बसें हैं जिनकों लगातार मेंटीनेंस की जरूरत होती है, पुर्जे मिलने में समय लग जाता है, लेकिन आदेश है कि 21 दिन से ज्यादा किसी बस को खराबी के कारण खड़ा नहीं रखा जा सकता।
- विनोद कुमार शुक्ला, एआरएम बदायूं डिपो
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बदायूं डिपो के बेड़े में निगम की 131 और अनुबंधित 37 बसें हैं। निगम की 131 में से 50 बसें ऐसी हैं जो दस वर्ष से ज्यादा पुरानी हैं और इनके दिल्ली में प्रवेश पर पाबंदी है। 37 ऐसी बसें हैं जो नीलामी की लाइन में हैं। शेष 81 बसों में से भी करीब 20 की स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। कई नई बसें भी इंजन और पंप की खराबी के कारण दौड़ने में हांफती हैं। इनमें ऐसी बसें भी शामिल हैं जो प्रतिदिन 25 हजार रुपये तक की कमाई करती हैं। बरेली वर्कशॉप से समय से पुर्जे न मिलने के कारण यहां वर्कशॉप में बसों की मरम्मत नहीं हो पाती। कई बार तो डिपो की बसें रास्ते में खड़ी हो जाती हैं। दरअसल, बसों के इंजन संबंधी ज्यादातर काम बरेली वर्कशॉप में होते हैं। अन्य छोटे काम बदायूं वर्कशॉप में ही होते हैं, लेकिन इसके लिए पुर्जे और अन्य सामान बरेली वर्कशॉप से मंगाना होता है।
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इसी क्रम में डिपो की आठ बसें कई दिन से बरेली वर्कशॉप में खड़ी हैं और बदायूं वर्कशॉप में भी पुर्जे न मिलने के कारण करीब 15 बसें खड़ी हुई हैं। इस कारण बदायूं-फर्रुखाबाद, बदायूं-कासगंज, बदायूं-दातागंज, बदायूं-चंदौसी रूटों पर यात्रियों को समस्या होती है।
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यात्री बोले- घंटो करना पड़ता है इंतजार
इन दिनों त्योहार या सहालग का सीजन नहीं है। ऐसे में सवारियों का दबाव कम है। वैसे कई रूटों पर बसों की कमी के कारण यात्रियों को घंटों इंतजार करना होता है। सबसे ज्यादा समस्या बदायूं-फर्रुखाबाद रोड पर है। बस स्टैंड पर मिले फर्रुखाबाद के राजेपुर निवासी विमल दो घंटे से बस का इंतजार करते खड़े मिले। कलान निवासी राजेश गुप्ता का कहना है कि बरेली के लिए हर 30 मिनट में बस मिलने का अधिकारी दावा करते हैं, लेकिन ऐसा होता नहीं है। बदायूं से बरेली जा रहे आवास विकास के अंकित शर्मा का कहना है कि एक घंटे से उनको बस नहीं मिली। एटा जिले के अमापुर निवासी अवधेश का कहना है कि उनके रूट पर बस कभी समय से नहीं चलतीं।
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स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से शुरू की गई बस सेवा भी लगभग ठप
स्वतंत्रता दिवस पर बदायूं डिपो को दो नई बसें मिली थी। यह बसें स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों कुंवर रुकुम सिंह और चौधरी बदन सिंह के नाम से शुरू की गईं, लेकिन एक महीने में ही बस सेवा लगभग बंद हो गई है। दरअसल, आधुनिक तकनीकी की इन नई बसों में एक बस खराब हो गई है और वह लखनऊ वर्कशॉप में खड़ी है। एक महीने के भीतर पांच बार बसें खराब हो चुकी हैं। हर बार वर्कशॉप में चार से पांच दिन खड़ा रहना पड़ा है। अब एक ही बस चल रही है। एआरएम विनोद कुमार शुक्ला ने बताया कि आधुनिक तकनीक ही यह बसें बरेली वर्कशॉप में भी ठीक नहीं हो पातीं। ऐसे में इनको लखनऊ भेजना पड़ता है।
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बसों में मरम्मत के बड़े काम बरेली वर्कशॉप में होते हैं। इन दिनों वहां डिपो की आठ बसें खड़ी हैं। उनमें इंजन संबंधी व अन्य काम होने हैं। करीब 15 बसों में हमारे वर्कशॉप में काम चल रहा है। करीब 50 बसें हैं जिनकों लगातार मेंटीनेंस की जरूरत होती है, पुर्जे मिलने में समय लग जाता है, लेकिन आदेश है कि 21 दिन से ज्यादा किसी बस को खराबी के कारण खड़ा नहीं रखा जा सकता।
- विनोद कुमार शुक्ला, एआरएम बदायूं डिपो