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सीसीटीवी कैमरे क्या लगेंगे साहब!..अधिकतर बसें तो खटारा हैं
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बदायूं। महिलाओं को सुरक्षित सफर मुहैया कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की तरफ से की गई पहल पर विभाग ने ही पानी फेर दिया। रोडवेज की बसों में सीसीटीवी तो दूर की बात है, आम आदमी को इन बसों में सही से सफर करना तक चुनौती लगता है। बदायूं डिपो की बसों की स्थिति की बात करें तो ये इतनी खस्ताहाल हैं कि आम आदमी मजबूरन ही इसमें सफर करती है। किसी बस की खिड़की टूटी है तो किसी बस की सीटें साबित नहीं है। यात्रियों को ठीक से बैठने तक के इंतजाम नहीं है। स्थिति ये है कि निगम की अधिकतर बसें खटारा हाल हो चुकी हैं। जब ये सड़क पर दौड़ती हैं तो यात्रियों की धड़कने तेज होना लाजमी है।
बदायूं डिपो की करीब 162 रोडवेज बसें हैं। इनमें 30 प्रतिशत ऐसी बसें हैं, जिनमें यात्री बेखौफ होकर यात्रा करते हैं। जबकि अन्य बसें ऐसी हैं, जिनके कोने-कोने हिलते हैं। दूर से भी रोडवेज बस गुजर जाए तो पता चल जाता है कि इनकी स्थिति क्या है। किसी बस का गेट टूटा है तो किसी की खिड़कियां टूटी हैं। सीटों पर कवर तो दूर इनकी सीटें तक साबित नहीं हैं। कुछ बसों की खिड़कियों के शीशे ही गायब हो गए हैं, ऐसे में सर्दी के दिनों में यात्रियों को सर्द हवा के थपेड़े झेलने ही हैं। थोड़ी सी मरम्मत के लिए भी एक बस को कई कई दिन लग जाते हैं। बसों में पुर्जे लगवाने तक को चालकों को कई बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में निगम अधिकारियों और सरकार की सीसीटीवी लगवाने की उम्मीदों पर कैसे खरा उतरेगा, ये तो भगवान ही जाने।
-परिवहन निगम की अधितर रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स गायब हो चुके हैं। अगर किसी बस में बॉक्स लगा भी है तो उसमें दवाईयां नहीं हैं। कोई प्राथमिक उपचार के साधन नहीं है। अगर बस में कोई हादसा हो जाए तो शायद यात्री को अस्पताल ही ले जाना पड़ेगा।
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- कुछ बसों को छोड़ दें तो रोडवेज की अधिकांश बसों में फॉग लाइट नजर ही नहीं आतीं। कोहरे ें बसें बस भगवान के सहारे चलती हैं। ऐसे में यदि कहीं चालक से चूक हो जाए तो यात्रियों की जान के लाले ही पड़ जा जाएंगे। दिल्ली रोड पर चलने वाली बसों की भी यही हालत है जबकि दिल्ली जाने वाली अधिकांश यात्री रात को ही सफर करते हैं। हर बार सर्दी का मौसम आकर निकल जाता है लेकिन विभाग फॉग लाइट लगवाने की बात कहता ही रह जाता है।
रोडवेज बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, इसके बारे में मुख्यालय स्तर से पता चला है लेकिन अभी मेरे पास कोई आदेश नहीं आए हैं। अगर कोई लिखित में आदेश प्राप्त होता है तो सीसीटीवी कैमरे जरूर लगवाए जाएंगे। रही बात बसों की हालत की तो पूरी कोशिश रहती है कि यात्रियों को कोई परेशान न हो। इसके लिए समय समय पर बसों की मरम्मत कराई जाती है।
- राजेश कुमार, एआरएम
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बदायूं डिपो की करीब 162 रोडवेज बसें हैं। इनमें 30 प्रतिशत ऐसी बसें हैं, जिनमें यात्री बेखौफ होकर यात्रा करते हैं। जबकि अन्य बसें ऐसी हैं, जिनके कोने-कोने हिलते हैं। दूर से भी रोडवेज बस गुजर जाए तो पता चल जाता है कि इनकी स्थिति क्या है। किसी बस का गेट टूटा है तो किसी की खिड़कियां टूटी हैं। सीटों पर कवर तो दूर इनकी सीटें तक साबित नहीं हैं। कुछ बसों की खिड़कियों के शीशे ही गायब हो गए हैं, ऐसे में सर्दी के दिनों में यात्रियों को सर्द हवा के थपेड़े झेलने ही हैं। थोड़ी सी मरम्मत के लिए भी एक बस को कई कई दिन लग जाते हैं। बसों में पुर्जे लगवाने तक को चालकों को कई बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में निगम अधिकारियों और सरकार की सीसीटीवी लगवाने की उम्मीदों पर कैसे खरा उतरेगा, ये तो भगवान ही जाने।
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-परिवहन निगम की अधितर रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स गायब हो चुके हैं। अगर किसी बस में बॉक्स लगा भी है तो उसमें दवाईयां नहीं हैं। कोई प्राथमिक उपचार के साधन नहीं है। अगर बस में कोई हादसा हो जाए तो शायद यात्री को अस्पताल ही ले जाना पड़ेगा।
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- कुछ बसों को छोड़ दें तो रोडवेज की अधिकांश बसों में फॉग लाइट नजर ही नहीं आतीं। कोहरे ें बसें बस भगवान के सहारे चलती हैं। ऐसे में यदि कहीं चालक से चूक हो जाए तो यात्रियों की जान के लाले ही पड़ जा जाएंगे। दिल्ली रोड पर चलने वाली बसों की भी यही हालत है जबकि दिल्ली जाने वाली अधिकांश यात्री रात को ही सफर करते हैं। हर बार सर्दी का मौसम आकर निकल जाता है लेकिन विभाग फॉग लाइट लगवाने की बात कहता ही रह जाता है।
रोडवेज बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, इसके बारे में मुख्यालय स्तर से पता चला है लेकिन अभी मेरे पास कोई आदेश नहीं आए हैं। अगर कोई लिखित में आदेश प्राप्त होता है तो सीसीटीवी कैमरे जरूर लगवाए जाएंगे। रही बात बसों की हालत की तो पूरी कोशिश रहती है कि यात्रियों को कोई परेशान न हो। इसके लिए समय समय पर बसों की मरम्मत कराई जाती है।
- राजेश कुमार, एआरएम