{"_id":"5a4d2fe04f1c1b4d198b4bda","slug":"brother-and-sister-dies-due-to-cold","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस्लामनगर में भाई और बहन की ठंड से मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस्लामनगर में भाई और बहन की ठंड से मौत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,बदायूं
Updated Thu, 04 Jan 2018 01:02 AM IST
विज्ञापन
docs
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली में ठेली लगाकर बड़े परिवार का पेट पालने वाले फल विक्रेता के दो मासूम बच्चों की ठंड से मौत हो गई। उसी का तीसरा बच्चा गंभीर हालत में चंदौसी के निजी अस्पताल में भर्ती है। एक ही परिवार में दो मौतों से हड़कंप मच गया। मौत की वजह और जिम्मेदारी को लेकर भी दो विभागों में विरोधाभास की स्थिति है। प्रशासनिक अफसर इन मौतों की वजह खसरे को मान रहे हैं तो स्वास्थ्य विभाग की टीम की रिपोर्ट के आधार पर सीएमओ ने ठंड जनित निमोनिया से मौत होना माना है।
कस्बे के मोहल्ला कुरैशी निवासी यासीन फल विक्रेता हैं। वह दिल्ली में ठेली लगाकर फल बेचते हैं। यासीन के आठ बच्चे हैं जो अपनी मां के साथ कस्बे में रहते हैं। यासीन के मुताबिक उसके बेटे अरशद अली (3) और बेटी काजल (5) की हालत मंगलवार को बिगड़ गई। बाद में रात में घर पर ही उनकी मौत हो गई। तीसरे बेटे मोमिन (2) की हालत बिगड़ी तो यासीन ने कस्बे की चेयरमैन के पति मुशाहिद अली से मदद मांगी। चेयरमैन ने मोमिन को चंदौसी के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। आठ साल की बेटी सोनिया की हालत भी खराब थी। उसे स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। बुधवार को दो बच्चों की मौत और तीसरे की हालत खराब होने की खबर जब अधिकारियों तक पहुंची तो हड़कंप मच गया। एसडीएम बिल्सी लालबहादुर सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने यासीन के परिवार से बातचीत कर घर का हाल देखा। बाद में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर बीमार बच्ची को देखा। प्रभारी चिकित्साधिकारी के स्वास्थ्य केंद्र पर मौजूद न होने पर उन्हें कॉल करके फटकार लगाई। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों से नाराजगी जताकर बच्ची के लिए कंबल की व्यवस्था कराई। शाम को सोनिया को घर भेज दिया गया। एसडीएम ने बताया कि परिवारीजन खसरे से मौत की बात कह रहे हैं। बता रहे हैं कि वह दस दिनों से खसरे का इलाज देसी दवाओं से कर रहे थे। जबकि सीएमओ डॉ. नेमीचंद्रा ने बताया कि इस्लामनगर के प्रभारी चिकित्साधिकारी विपिन वर्मा ने मौके पर जांच की तो पाया गया कि परिवार काफी गरीब था। उन पर न तो पहनने के कपड़े थे और न ओढ़ने के। इस वजह से बच्चे ठंड से जूझ रहे थे। ठंड से निमोनिया हुआ और दो बच्चों की मौत हो गई। चंदौसी में भर्ती बच्चे को भी निमोनिया के लक्षण हैं। वहां जाकर भी बच्चे की जांच की गई, वह खतरे से बाहर है।
-----------
कोट...
परिवार और डॉक्टर अगर ठंड से मौत बता रहे हैं तो जरूर ऐसा ही रहा होगा। एडीएम प्रशासन को मौके पर भेजा है। उन्होंने चंदौसी जाकर उस बच्चे का हाल भी देखा है जो भर्ती है। उसकी हालत में सुधार है। यासीन के परिवार को दस कंबल प्रशासन ने उपलब्ध कराए हैं। गेहूं, चावल जैसी मदद भी की गई है। परिवार की जो भी संभव होगी, मदद की जाएगी। - दिनेश कुमार सिंह, डीएम
विज्ञापन
विज्ञापन
कस्बे के मोहल्ला कुरैशी निवासी यासीन फल विक्रेता हैं। वह दिल्ली में ठेली लगाकर फल बेचते हैं। यासीन के आठ बच्चे हैं जो अपनी मां के साथ कस्बे में रहते हैं। यासीन के मुताबिक उसके बेटे अरशद अली (3) और बेटी काजल (5) की हालत मंगलवार को बिगड़ गई। बाद में रात में घर पर ही उनकी मौत हो गई। तीसरे बेटे मोमिन (2) की हालत बिगड़ी तो यासीन ने कस्बे की चेयरमैन के पति मुशाहिद अली से मदद मांगी। चेयरमैन ने मोमिन को चंदौसी के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। आठ साल की बेटी सोनिया की हालत भी खराब थी। उसे स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। बुधवार को दो बच्चों की मौत और तीसरे की हालत खराब होने की खबर जब अधिकारियों तक पहुंची तो हड़कंप मच गया। एसडीएम बिल्सी लालबहादुर सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने यासीन के परिवार से बातचीत कर घर का हाल देखा। बाद में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर बीमार बच्ची को देखा। प्रभारी चिकित्साधिकारी के स्वास्थ्य केंद्र पर मौजूद न होने पर उन्हें कॉल करके फटकार लगाई। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों से नाराजगी जताकर बच्ची के लिए कंबल की व्यवस्था कराई। शाम को सोनिया को घर भेज दिया गया। एसडीएम ने बताया कि परिवारीजन खसरे से मौत की बात कह रहे हैं। बता रहे हैं कि वह दस दिनों से खसरे का इलाज देसी दवाओं से कर रहे थे। जबकि सीएमओ डॉ. नेमीचंद्रा ने बताया कि इस्लामनगर के प्रभारी चिकित्साधिकारी विपिन वर्मा ने मौके पर जांच की तो पाया गया कि परिवार काफी गरीब था। उन पर न तो पहनने के कपड़े थे और न ओढ़ने के। इस वजह से बच्चे ठंड से जूझ रहे थे। ठंड से निमोनिया हुआ और दो बच्चों की मौत हो गई। चंदौसी में भर्ती बच्चे को भी निमोनिया के लक्षण हैं। वहां जाकर भी बच्चे की जांच की गई, वह खतरे से बाहर है।
विज्ञापन
-----------
कोट...
परिवार और डॉक्टर अगर ठंड से मौत बता रहे हैं तो जरूर ऐसा ही रहा होगा। एडीएम प्रशासन को मौके पर भेजा है। उन्होंने चंदौसी जाकर उस बच्चे का हाल भी देखा है जो भर्ती है। उसकी हालत में सुधार है। यासीन के परिवार को दस कंबल प्रशासन ने उपलब्ध कराए हैं। गेहूं, चावल जैसी मदद भी की गई है। परिवार की जो भी संभव होगी, मदद की जाएगी। - दिनेश कुमार सिंह, डीएम
विज्ञापन