Budaun: शव से आंखें निकालने के मामले में तीन डॉक्टरों का बोर्ड भी गठित; कार्रवाई पर आईएमए ने उठाए सवाल
आईएमए के जिलाध्यक्ष डॉ. अमित वार्ष्णेय बुधवार दोपहर कई डॉक्टरों के साथ डीएम से मिले। उन्होंने कहा कि इस मामले में दो डॉक्टरों का जेल भेजा जाना न्यायसंगत नहीं है, इससे पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों का मनोबल टूट जाएगा।
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बुधवार शाम महिला के शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. मोहम्मद उवैस और डॉ. मोहम्मद आरिफ हुसैन को जेल भेज दिया गया। इसको लेकर शहर के कुछ डॉक्टरों ने नाराजगी भी व्यक्त की है।
आईएमए ने उठाई कार्रवाई पर सवाल
इधर, डीएम से मुलाकात के दौरान आईएमए पदाधिकारियों ने सीधे पुलिस-प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए और पहले मामले की जांच कराने की मांग की। इसको लेकर डीएम मनोज कुमार ने राजकीय मेडिकल कॉलेज के तीन डॉक्टरों का एक अलग बोर्ड गठित किया है।
उन्होंने कहा है कि वैसे तो मामले की जांच तीन सदस्यीय कमेटी के साथ सिविल लाइंस पुलिस भी जांच कर रही है। इसको डॉक्टर किस नजरिये से देख रहे हैं। इससे उनके विचार भी सामने आने चाहिए, ऐसे में मेडिकल कॉलेज के तीन डॉक्टरों का बोर्ड भी गठित किया गया है।
डीएम के अनुसार, जांच कुछ ही दिनों में पूरी करके सब स्पष्ट कर दिया जाएगा। इस बोर्ड में शामिल डॉक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि उनकी जांच में सभी तथ्य शामिल होने चाहिए, जिससे इस मामले की सही जांच हो सके।
आईएमए के जिलाध्यक्ष डॉ. अमित वार्ष्णेय बुधवार दोपहर कई डॉक्टरों के साथ डीएम से मिले। उन्होंने कहा कि इस मामले में दो डॉक्टरों का जेल भेजा जाना न्यायसंगत नहीं है, इससे पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों का मनोबल टूट जाएगा। पहले इस मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए थी। फिर जांच रिपोर्ट में जो भी तथ्य सामने आते, उसके आधार पर डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई होती। कहा कि इससे पहले ही बिना जांच पड़ताल के उन्हें जेल भेजना ठीक नहीं है। वे इसका विरोध करते हैं।