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रामजन्म के साथ अयोध्या में मनाई गईं खूब खुशियां
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भागवत कथा में पेश की गई श्रीराम-लक्ष्मण की झांकी। संवाद
- फोटो : BADAUN
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव दिधौनी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथावाचक ममता शाक्य ने भगवान राम के जन्म की कथा को सुनाया।
उन्होंने कहा कि गुरु वशिष्ठ अपने आश्रम में ध्यान मुद्रा में बैठे हैं। इस बीच राजा दशरथ का प्रवेश होता है। राजा दशरथ कहते हैं गुरुदेव कोई संतान नहीं है। इस पर गुरुदेव उन्हें संतानोत्पत्ति यज्ञ कराने का निर्देश देते हैं। यज्ञ सफल होने पर अग्निदेव प्रकट होते हैं और द्रव्य देकर राजा दशरथ से कहते हैं कि इसे अपनी रानियों को दे दीजिए, इसका सेवन करने से संतान अवश्य होगी।
कथा व्यास कहती हैं कि भगवान विष्णु प्रकट होते हैं और कौशल्या उनके दर्शन करती हैं। माता कौशल्या कहती हैं हे तात आप यह विराट रूप त्याग कर बाललीला कीजिए। विष्णु जी अंतर्ध्यान होते हैं। फिर बच्चों के रोने की आवाजें सुनाई देती हैं और खुशी का संगीत बजने लगता है। रामजन्म के समाचार से संपूर्ण अयोध्या में खुशी छा जाती है। राजा दशरथ की तीनों रानियों को चार पुत्र होते हैं। इसके बाद चारों भाइयों का नामकरण किया जाता है। श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम रखे जाते हैं।
इस मौके पर रामप्रकाश सिंह ठाकुर, कृष्णमुरारी, देवपाल, राधेश्याम, विवेक कुमार सिंह, लोकपाल शाक्य, रामगोपाल शाक्य, सुरेंद्र प्रजापति, मोहनलाल, संजीव, नेम कुमार व ज्योति रानी आदि मौजूद रहे। संवाद
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उन्होंने कहा कि गुरु वशिष्ठ अपने आश्रम में ध्यान मुद्रा में बैठे हैं। इस बीच राजा दशरथ का प्रवेश होता है। राजा दशरथ कहते हैं गुरुदेव कोई संतान नहीं है। इस पर गुरुदेव उन्हें संतानोत्पत्ति यज्ञ कराने का निर्देश देते हैं। यज्ञ सफल होने पर अग्निदेव प्रकट होते हैं और द्रव्य देकर राजा दशरथ से कहते हैं कि इसे अपनी रानियों को दे दीजिए, इसका सेवन करने से संतान अवश्य होगी।
कथा व्यास कहती हैं कि भगवान विष्णु प्रकट होते हैं और कौशल्या उनके दर्शन करती हैं। माता कौशल्या कहती हैं हे तात आप यह विराट रूप त्याग कर बाललीला कीजिए। विष्णु जी अंतर्ध्यान होते हैं। फिर बच्चों के रोने की आवाजें सुनाई देती हैं और खुशी का संगीत बजने लगता है। रामजन्म के समाचार से संपूर्ण अयोध्या में खुशी छा जाती है। राजा दशरथ की तीनों रानियों को चार पुत्र होते हैं। इसके बाद चारों भाइयों का नामकरण किया जाता है। श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम रखे जाते हैं।
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इस मौके पर रामप्रकाश सिंह ठाकुर, कृष्णमुरारी, देवपाल, राधेश्याम, विवेक कुमार सिंह, लोकपाल शाक्य, रामगोपाल शाक्य, सुरेंद्र प्रजापति, मोहनलाल, संजीव, नेम कुमार व ज्योति रानी आदि मौजूद रहे। संवाद
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