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तत्कालीन सत्तापक्ष के दबाव में थी पुलिस : सीबीसीआईडी ने दी क्लीन चिट

Sun, 31 Oct 2021 11:55 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 31 Oct 2021 11:55 PM IST
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bdn-Life imprisonment
बदायूं। बिल्सी की छात्रा का अपहरण और दुष्कर्म कांड साल 2008 का सबसे चर्चित मामला रहा। उस दौरान प्रदेश में बसपा सरकार थी और योगेंद्र सागर बिल्सी से बसपा विधायक था। इससे पुलिस सत्तापक्ष के दबाव में थी। इससे आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई। छात्रा पूरे 24 दिन तक लापता रही। दिल्ली और लखनऊ में बंधक बनाकर उससे दुष्कर्म किया गया। 25वें दिन पुलिस ने उसको नाटकीय ढंग से बरामद करना दिखाया। इसके बावजूद छात्रा के पिता ने हार नहीं मानी और अंजाम सजा तक पहुंचा।
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बिल्सी निवासी छात्रा कस्बे के एक डिग्री कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष में पढ़ रही थी। मुकदमे के अनुसार आरोपी नीरज शर्मा उर्फ मीनू छात्रा का रिश्तेदार था। उसका उसके घर आना जाना था। तेजेंद्र सागर मीनू का दोस्त था। वह भी छात्रा के घर आता-जाता था। कॉलेज आते-जाते वक्त उसके साथ छेड़छाड़ करता था। वह कई बार उससे छेड़छाड़ कर चुका था। इस पर छात्रा ने अपने परिवारवालों से उसकी शिकायत करने की बात कही, जिससे आरोपी उससे चिढ़ गया। 23 अप्रैल 2008 को छात्रा अपनी सहेली के घर नोट्स लेने जा रही थी। इसी दौरान नीरज शर्मा उर्फ मीनू और तेजेंद्र सागर ने अपने दो अज्ञात साथियों के साथ उसका अपहरण कर लिया। उसे नशा सुंघाकर लखनऊ ले जाया गया। आरोप था कि दोनों आरोपियों ने उसे लखनऊ में बंधक बनाकर रखा। लखनऊ और दिल्ली ले जाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। इधर परिवार वाले छात्रा को बरामद कराने की पुलिस से गुहार लगा रहे थे लेकिन पुलिस सत्तापक्ष के दबाव में रही। इससे पुलिस ने केवल नीरज शर्मा उर्फ मीनू और तेजेंद्र सागर के खिलाफ अपहरण के आरोप में एफआईआर दर्ज की। पूर्व विधायक योगेंद्र सागर का नाम छात्रा ने अपने बयानों में लिया। इसके आधार पर न्यायालय ने संज्ञान लिया और योगेंद्र सागर के खिलाफ परिवाद दर्ज कर केस की सुनवाई की गई।
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सीबीसीआईडी बरेली ने लगाई थी एफआर
बिल्सी के सबसे चर्चित छात्रा के अपहरण व दुष्कर्म के मामले में सीबीसीआईडी बरेली ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। इस पर छात्रा के पिता ने प्रोटेस्ट दाखिल की। न्यायालय ने सुनवाई करते हुए फाइनल रिपोर्ट को निरस्त किया और पुलिस को विवेचनाकर कार्रवाई के आदेश दिए। पुलिस ने विवेचना के दौरान चार सितंबर 2010 को नीरज शर्मा उर्फ मीनू को गिरफ्तार किया। जबकि तेजेंद्र सागर ने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था।
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नशे की गोलियां खिलाने और इंजेक्शन से बिगड़ी थी छात्रा की हालत
छात्रा का आरोप था कि जब तक उसको लखनऊ और दिल्ली में बंधक बनाकर रखा गया। तब तक उसको नशे की गोलियां खिलाई गईं और नशे के इंजेक्शन दिए गए। इससे उसकी मानसिक हालत काफी खराब हो गई। पुलिस ने उसे नाटकीय ढंग से बरामद कर न्यायालय में पेश किया। उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं थी। इससे उसे नौ जून 2008 को नारी निकेतन भेजा गया। कुछ दिन बाद छात्रा के कहने पर उसे उसके मामा के यहां बरेली भेज दिया गया।

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योगेंद्र सागर की पैरवी पर सीबीसीआईडी को सौंपी गई थी जांच
छात्रा का अपहरण और दुष्कर्म का मामला जिले का सबसे चर्चित मामला था। इससे प्रदेश सरकार लगातार इसकी रिपोर्ट मांग रही थी। इसके अलावा योगेंद्र सागर खुद को बेगुनाह बता रहा था। इससे वह जिले की पुलिस की बजाय सीबीसीआईडी से जांच कराने की मांग कर रहा था। उनकी मांग पर ही प्रदेश सरकार ने सीबीसीआईडी को विवेचना सौंपी थी लेकिन सीबीसीआईडी ने 25 अक्तूबर 2008 को इसमें एफआर लगा दी। संवाद
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