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Budaun News: बदायूं की साड़ी, सूट व लहंगों की विदेश तक धूम
Sat, 07 Feb 2026 01:35 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Sat, 07 Feb 2026 01:35 AM IST
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ककोड़ा गांव में जरी का काम करतीं महिला कारीगर।संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। जिले में जरी के बने सूट, साड़ी व लहंगों की मांग दिल्ली, जयपुर, हैदराबाद और पंजाब में सर्वाधिक है। वहां से विदेश में भी माल की सप्लाई की जा रही है। जिले में हो रहा सूट व लहंगों पर कढ़ाई का काम महिलाओं को खूब लुभा रहा है। सौ से अधिक गांवों में जरी का काम किया जा रहा है। सालाना करीब 50 करोड़ रुपये का कारोबार होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
जिले के सैदपुर, हतरा, उरैना, शेखूपुर, रमजान में कारीगर रात-दिन मेहनत कर कपड़े तैयार करने में जुटे हैं। जिले में जरी कारोबार दस हजार से अधिक लोगों की गुजर-बसर का जरिया बना हुआ है।
जरी कारोबारी सराफत ने बताया कि जिले में जरी के बने सूट, साड़ियों की मांग दिल्ली, जयपुर, हैदराबाद और पंजाब में सर्वाधिक है। यहां सूट पर कढ़ाई का काम महिलाओं को लुभाता है। ऐसे उत्पाद विदेश में खाड़ी देश के दुबई, तुर्किये, अरब के अलावा लंदन, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में निर्यात होते हैं।
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जिले में सिल्क, साटिन, वेलवेट फैब्रिक पर मेटल एंब्रॉइडरी होती है। इसके लिए जरी, गोल्डन थ्रेड, मोती, सुनहरे सितारे, कटदाना, सलमा, सितारा, दबका आदि प्रयोग होता है। लहंगे, दुपट्टे, सूट, बोतल के कवर, बैग आदि पर जरदोजी का काम होता है। करीब 50 करोड़ का सालाना कारोबार देश और विदेश तक फैला है। करीब तीन हजार ठेकेदारों के निर्देशन में यह कारोबार जिले में हो रहा है। इसमें करीब दस हजार से ज्यादा आबादी कार्य कर रही है।
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बदायूं। जिले में जरी के बने सूट, साड़ी व लहंगों की मांग दिल्ली, जयपुर, हैदराबाद और पंजाब में सर्वाधिक है। वहां से विदेश में भी माल की सप्लाई की जा रही है। जिले में हो रहा सूट व लहंगों पर कढ़ाई का काम महिलाओं को खूब लुभा रहा है। सौ से अधिक गांवों में जरी का काम किया जा रहा है। सालाना करीब 50 करोड़ रुपये का कारोबार होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
जिले के सैदपुर, हतरा, उरैना, शेखूपुर, रमजान में कारीगर रात-दिन मेहनत कर कपड़े तैयार करने में जुटे हैं। जिले में जरी कारोबार दस हजार से अधिक लोगों की गुजर-बसर का जरिया बना हुआ है।
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जरी कारोबारी सराफत ने बताया कि जिले में जरी के बने सूट, साड़ियों की मांग दिल्ली, जयपुर, हैदराबाद और पंजाब में सर्वाधिक है। यहां सूट पर कढ़ाई का काम महिलाओं को लुभाता है। ऐसे उत्पाद विदेश में खाड़ी देश के दुबई, तुर्किये, अरब के अलावा लंदन, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में निर्यात होते हैं।
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जिले में सिल्क, साटिन, वेलवेट फैब्रिक पर मेटल एंब्रॉइडरी होती है। इसके लिए जरी, गोल्डन थ्रेड, मोती, सुनहरे सितारे, कटदाना, सलमा, सितारा, दबका आदि प्रयोग होता है। लहंगे, दुपट्टे, सूट, बोतल के कवर, बैग आदि पर जरदोजी का काम होता है। करीब 50 करोड़ का सालाना कारोबार देश और विदेश तक फैला है। करीब तीन हजार ठेकेदारों के निर्देशन में यह कारोबार जिले में हो रहा है। इसमें करीब दस हजार से ज्यादा आबादी कार्य कर रही है।