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खीरी में बवाल पर बदायूं भी गरमाया, किसान नेता नजरबंद, कहीं जाम लगाया कहीं नारेबाजी

Tue, 05 Oct 2021 01:27 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 05 Oct 2021 01:27 AM IST
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Badaun also heated up on the ruckus in Kheri, farmer leaders under house arrest, raised slogans somewhere
बदायूं। लखीमपुर खीरी में बवाल के बाद सोमवार को बदायूं भी गरमाया रहा। किसान संगठनों के साथ विपक्षी दलों ने जगह-जगह प्रदर्शन किए। कई स्थानों पर किसान नेताओं को पुलिस ने नजरबंद कर दिया। मुख्यालय पर मालवीय आवास को छावनी में तब्दील कर दिया गया। बदायूं से किसान नेताओं के लखीमपुर खीरी जाने के आसार के चलते जिले की सीमाओं पर पुलिस तैनात रही।
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जिले भर में कई स्थानों पर किसान संगठनों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन दिए। दातागंज में सपाइयों ने मुख्यमंत्री का पुतला फूंका। बिसौली में प्रदर्शन कर रहे सपाइयों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। आम आदमी पार्टी ने भी राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन दिया। कांग्रेसियों ने भी प्रदर्शन किया।
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रविवार को लखीमपुर खीरी के बवाल के बाद से ही जिले में पुलिस-प्रशासन के साथ खुफिया इकाइयां सक्रिय हो गई थीं। किसान नेताओं की रविवार से ही निगरानी शुरू कर दी गई। सोमवार सुबह से ही किसान नेताओं के आवासों पर पुलिस तैनात कर दी गई। भाकियू के मंडलीय नेता राजेश सक्सेना को किसानों के साथ उनके आवास पर नजरबंद कर दिया गया। इस बीच भाकियू प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य राजीव गुप्ता रविवार रात बदायूं से लखीमपुर खीरी के लिए कूच करने में कामयाब हो गए। हालांकि, उनको वहां से वापस कर दिया गया। लखीमपुर खीरी बवाल के बाद अधिकारी जिले की स्थिति पर नजर बनाए रहे। उझानी में किसानों ने हाईवे जाम किया, बिसौली में सपाइयों ने हंगामा किया।
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मालवीय आवास पर दिन भर किसान नेता डटे रहे। किसानों की योजना कलक्ट्रेट पर जाम लगाकर प्रदर्शन करने की थी, लेकिन पुलिस की सतर्कता के कारण वह कामयाब नहीं हो सके। बाद में इंस्पेक्टर सिविल लाइंस राजकुमार तिवारी ने किसान नेता राजेश सक्सेना के आवास पर पहुंचकर ज्ञापन दिया। सहसवान, बिल्सी, दातागंज, इस्लामनगर, ओरछी, उघैती आदि स्थानों पर भी किसान संगठनों समेत विपक्षी दलों ने लखीमपुर खीरी की घटना के विरोध में प्रदर्शन किया।
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ये बोले किसान नेता
लखीमपुर खीरी की घटना के बाद साफ हो गया है कि भाजपा सरकारों का किसानों के प्रति क्या रवैया है। मंत्री के बेटे ने जिस तरह से किसानों को कार से कुचल दिया। उसके बाद और कुछ कहना बाकी नहीं है। सरकार किसानों से टकरा कर आगे नहीं बढ़ सकती। सरकार को जवाब दिया जाएगा। - महीलाल सिंह, किसान नेता
कृषि कानूनों को लेकर किसान करीब 10 महीने से आंदोलित हैं। कृषि कानून वापस लेना तो दूर सरकार किसानों से बात करने को तक तैयार नहीं है। लखीमपुर खीरी में जो हुआ वह सरकार की किसानों के प्रति मानसिकता दर्शाने के लिए काफी है। किसान अब सरकार से सीधी टक्कर लेंगे। - सरदार फौजदार सिंह, किसान नेता
लखीमपुर में मंत्री के बेटे ने किसानों की हत्या की है। इससे पहले मंत्री भी किसानों के विरोध में बयान देकर अपनी मानसिकता जाहिर कर चुके हैं। मंत्री और मंत्री के बेटे पर हत्या का केस दर्ज होना चाहिए। मरने वाले किसानों को 50-50 लाख मुआवजा और परिवार को नौकरी मिलनी चाहिए। - विजेंद्र सिंह, किसान नेता

सरकार किसान विरोधी है। कृषि कानूनों से ही सह साफ हो गया था। अब मंत्री के बेटे ने किसानों की हत्या कर दर्शा दिया है कि सरकार किसानों का हित नहीं चाहती। किसानों की हत्या की गई है। मंत्री और उनके बेटे के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए। मृतकों के परिवारों को मुआवजा मिलना चाहिए। - रक्षपाल सिंह, किसान नेता
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