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बिसौलीः चिर प्रतिद्वंद्वियों का जबर्दस्त मुकाबला, बाकी खिलाड़ी भी मैदान मारने में जुटे
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रिंकू पांडेय/ह्यदेश तिवारी
बदायूं। जिले में बह रही चुनावी बयार के बीच बिसौली सीट को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गरमाया है। कस्बे में चौक चौराहों पर हो रही बातों पर गौर दें तो इस सुरक्षित सीट के रण में चिर प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक परिवारों के बीच जबर्दस्त मुकाबले की स्थिति बन रही है। हालांकि दूसरे दल भी सेंधमारी में पीछे नहीं हैं और अपनी जीत को बिसात बिछाए बैठे हैं। शहरी वोटरों से इतर गांवों के वोटरों की चुप्पी चौंकाने वाली है।
बिसौली में इस बार भाजपा ने अपने मौजूदा विधायक कुशाग्र सागर पर दांव लगाया है। वह भाजपा के परंपरागत वोटरों के साथ ही बसपा के वोट बैंक में सेंध लगाने में जुटे हैं। उनके मुकाबले सपा ने भी अपने पुराने चेहरे पूर्व विधायक आशुतोष मौर्य पर दांव लगाया है। इलाके में बताया जाता है कि आशुतोष के व्यवहार से वह दूसरे दलों के लोगों को भी अपने साथ खींचने में माहिर हैं। शायद यही उनकी मजबूती का आधार है। इधर, बसपा ने अपने संगठन के बड़े नेता जयपाल सिंह को मैदान में उतारा है। जयपाल सिंह पूर्व में विकास विभाग में एडीओ रह चुके हैं और इलाके से उनका पुराना जुड़ाव व आधार है। वह कैडर वोटों के अलावा दूसरे इलाकों में भी संपर्क कर रहे हैं। इसके साथ ही सपा विरोधी मुहिम की अगुवाई कर रहे वक्फ विकास निगम के पूर्व चेयरमैन आबिद रजा ने भी बिसौली में जयपाल के पक्ष में आ गए हैं। इधर, कांग्रेस की प्रज्ञा यशोदा दिवाकर भी संगठन की पुरानी नेता हैं। वह और उनके पति क्षेत्र में अच्छा दखल रखते हैं और जीत का दावा कर रहे हैं। इनके साथ ही संयुक्त समाजवादी दल के हरिप्रकाश आर्य, जन अधिकार पार्टी की रेखा चंद्रा व दो निर्दलीय गौतम कुमार व सुरेंद्र भी चुनावी मैदान में हैं। संवाद
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कुल मतदाता- 420586
पुरुष मतदाता- 225176
महिला मतदाता- 195351
जातीय समीकरण
यादव- 72 हजार
दलित- 90 हजार
मुस्लिम- 74 हजार
क्षत्रिय- 37 हजार
ब्राह्मण- 40 हजार
मौर्य- 41 हजार
वैश्य- 17 हजार
जाट व कायस्थ- 6 हजार पांच सौ
अन्य- 40 हजार
(अनुमानित आंकड़े हैं)
प्रमुख मुद्दे
बिसौली नगर में बाईपास
बिसौली में नहर निर्माण
बिसौली में अग्निशमन केन्द्र की स्थापना
आसफपुर का नगर पंचायत का दर्जा
दबतोरी को ब्लॉक का दर्जा
सांस्कृतिक महत्व
आल्हा ऊदल के समय से स्थापित प्रसिद्ध हथौड़ा देवी मंदिर, ऐतिहासिक- रुहेला नवाब दूदे खां का प्राचीन किला बिसौली क्षेत्र के सांस्कृतिक महत्व के केंद्र हैं।
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परिसीमन के बाद बदले थे राजनीतिक समीकरण
परिसीमन के बाद बिसौली सीट के राजनीतिक समीकरण बदले थे। वर्ष 2012 के चुनाव में सपा के आशुतोष मौर्य उर्फ राजू को 89 हजार वोट मिले थे। उन्होंने बसपा प्रत्याशी पूर्व मंत्री योगेंद्र सागर की पत्नी प्रीति सागर को 45 हजार वोटों से हराया। उन्हें 44 हजार वोट मिले। वर्ष 2017 में प्रीति सागर के पुत्र कुशाग्र सागर ने सपा के आशुतोष मौर्या उर्फ राजू को हराया था। तब सत्तापक्ष की पार्टी सपा के प्रति लोगों की नाराजगी कुशाग्र सागर के जीतने की प्रमुख वजह रही। हालांकि 2012 में नए परिसीमन से पूर्व बिसौली विधानसभा सीट पर सबसे अधिक कांग्रेस या सपा का कब्जा रहा है। बाबू ब्रजबल्लभ और उनके बेटे योगेंद्र कुमार उर्फ कुन्नू बाबू ने इस सीट पर अपना वर्चस्व वर्षों तक कायम रखा था।
महंगाई और बेरोजगारी का छलका दर्द, घुमंतू पशु भी अड़चन बने
जिले के दूसरे इलाकों की तरह बिसौली में भी लगभग एक जैसे मुद्दे लोगों की जुबान पर हैं। नगरीय इलाके के लोग महंगाई और बेरोजगारी की समस्या पर मुखर रहते हैं तो देहात के लोग घुमंतू पशुओं से हो रही फसलों के नुकसान को लेकर सवाल खड़े करते हैं। बुद्ध बाजार निवासी छात्र सर्वेश के मुताबिक नौकरी हासिल करने में जूते घिस चुके हैं। कहते हैं कि ढंग का काम मिलता नहीं और ज्यादा छोटा काम वह कर नहीं पाते। छात्रा वाणी कहती हैं कि सरकारी नौकरी के लिए ट्राई कर रहीं हैं पर बात नहीं बनती। बगरैन की रेखा महंगाई से बजट बिगड़ने की बात कही। इसी गांव से सटे पेंपल के रामवीर का कहना था कि मेहनत की फसल जानवर खा जाते हैं।
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बदायूं। जिले में बह रही चुनावी बयार के बीच बिसौली सीट को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गरमाया है। कस्बे में चौक चौराहों पर हो रही बातों पर गौर दें तो इस सुरक्षित सीट के रण में चिर प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक परिवारों के बीच जबर्दस्त मुकाबले की स्थिति बन रही है। हालांकि दूसरे दल भी सेंधमारी में पीछे नहीं हैं और अपनी जीत को बिसात बिछाए बैठे हैं। शहरी वोटरों से इतर गांवों के वोटरों की चुप्पी चौंकाने वाली है।
बिसौली में इस बार भाजपा ने अपने मौजूदा विधायक कुशाग्र सागर पर दांव लगाया है। वह भाजपा के परंपरागत वोटरों के साथ ही बसपा के वोट बैंक में सेंध लगाने में जुटे हैं। उनके मुकाबले सपा ने भी अपने पुराने चेहरे पूर्व विधायक आशुतोष मौर्य पर दांव लगाया है। इलाके में बताया जाता है कि आशुतोष के व्यवहार से वह दूसरे दलों के लोगों को भी अपने साथ खींचने में माहिर हैं। शायद यही उनकी मजबूती का आधार है। इधर, बसपा ने अपने संगठन के बड़े नेता जयपाल सिंह को मैदान में उतारा है। जयपाल सिंह पूर्व में विकास विभाग में एडीओ रह चुके हैं और इलाके से उनका पुराना जुड़ाव व आधार है। वह कैडर वोटों के अलावा दूसरे इलाकों में भी संपर्क कर रहे हैं। इसके साथ ही सपा विरोधी मुहिम की अगुवाई कर रहे वक्फ विकास निगम के पूर्व चेयरमैन आबिद रजा ने भी बिसौली में जयपाल के पक्ष में आ गए हैं। इधर, कांग्रेस की प्रज्ञा यशोदा दिवाकर भी संगठन की पुरानी नेता हैं। वह और उनके पति क्षेत्र में अच्छा दखल रखते हैं और जीत का दावा कर रहे हैं। इनके साथ ही संयुक्त समाजवादी दल के हरिप्रकाश आर्य, जन अधिकार पार्टी की रेखा चंद्रा व दो निर्दलीय गौतम कुमार व सुरेंद्र भी चुनावी मैदान में हैं। संवाद
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कुल मतदाता- 420586
पुरुष मतदाता- 225176
महिला मतदाता- 195351
जातीय समीकरण
यादव- 72 हजार
दलित- 90 हजार
मुस्लिम- 74 हजार
क्षत्रिय- 37 हजार
ब्राह्मण- 40 हजार
मौर्य- 41 हजार
वैश्य- 17 हजार
जाट व कायस्थ- 6 हजार पांच सौ
अन्य- 40 हजार
(अनुमानित आंकड़े हैं)
प्रमुख मुद्दे
बिसौली नगर में बाईपास
बिसौली में नहर निर्माण
बिसौली में अग्निशमन केन्द्र की स्थापना
आसफपुर का नगर पंचायत का दर्जा
दबतोरी को ब्लॉक का दर्जा
सांस्कृतिक महत्व
आल्हा ऊदल के समय से स्थापित प्रसिद्ध हथौड़ा देवी मंदिर, ऐतिहासिक- रुहेला नवाब दूदे खां का प्राचीन किला बिसौली क्षेत्र के सांस्कृतिक महत्व के केंद्र हैं।
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परिसीमन के बाद बदले थे राजनीतिक समीकरण
परिसीमन के बाद बिसौली सीट के राजनीतिक समीकरण बदले थे। वर्ष 2012 के चुनाव में सपा के आशुतोष मौर्य उर्फ राजू को 89 हजार वोट मिले थे। उन्होंने बसपा प्रत्याशी पूर्व मंत्री योगेंद्र सागर की पत्नी प्रीति सागर को 45 हजार वोटों से हराया। उन्हें 44 हजार वोट मिले। वर्ष 2017 में प्रीति सागर के पुत्र कुशाग्र सागर ने सपा के आशुतोष मौर्या उर्फ राजू को हराया था। तब सत्तापक्ष की पार्टी सपा के प्रति लोगों की नाराजगी कुशाग्र सागर के जीतने की प्रमुख वजह रही। हालांकि 2012 में नए परिसीमन से पूर्व बिसौली विधानसभा सीट पर सबसे अधिक कांग्रेस या सपा का कब्जा रहा है। बाबू ब्रजबल्लभ और उनके बेटे योगेंद्र कुमार उर्फ कुन्नू बाबू ने इस सीट पर अपना वर्चस्व वर्षों तक कायम रखा था।
महंगाई और बेरोजगारी का छलका दर्द, घुमंतू पशु भी अड़चन बने
जिले के दूसरे इलाकों की तरह बिसौली में भी लगभग एक जैसे मुद्दे लोगों की जुबान पर हैं। नगरीय इलाके के लोग महंगाई और बेरोजगारी की समस्या पर मुखर रहते हैं तो देहात के लोग घुमंतू पशुओं से हो रही फसलों के नुकसान को लेकर सवाल खड़े करते हैं। बुद्ध बाजार निवासी छात्र सर्वेश के मुताबिक नौकरी हासिल करने में जूते घिस चुके हैं। कहते हैं कि ढंग का काम मिलता नहीं और ज्यादा छोटा काम वह कर नहीं पाते। छात्रा वाणी कहती हैं कि सरकारी नौकरी के लिए ट्राई कर रहीं हैं पर बात नहीं बनती। बगरैन की रेखा महंगाई से बजट बिगड़ने की बात कही। इसी गांव से सटे पेंपल के रामवीर का कहना था कि मेहनत की फसल जानवर खा जाते हैं।