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बेटों ने रखा अपने-अपने पिता का मान...जीतीं शेखूपुर और सहसवान सीटें
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बदायूं। इस विधानसभा चुनाव में सा विधायक ओमकार सिंह और पूर्व विधायक आशीष यादव की अपने बेटों को टिकट दिलाने की मेहनत रंग लाई। उनके बेटों ने चुनाव लड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने अपने पिता की उम्मीदों को कायम रखा और फिर से उन सीटों पर कब्जा कर अपने पिता का मान रखा।
सहसवान विधानसभा सीट से ओमकार सिंह यादव पांच बार विधायक चुने गए। कहने को तमाम लोगों ने चुनाव जीतने का दावा ठोंका लेकिन ओमकार सिंह सबको पछाड़ते हुए आगे बढ़ते गए। सपा सरकार में दर्जा राज्यमंत्री रहे लेकिन इस बार उन्होंने चुनाव लड़ने का मन नहीं बनाया। उन्होंने उत्तराधिकारी के रूप में अपने बेटे ब्रजेश यादव को चुनाव लड़ाया और उन्हें सपा से सहसवान विधानसभा सीट का टिकट भी दिलाया। हालांकि ब्रजेश यादव को चुनाव लड़ने का कई साल का अनुभव था लेकिन क्षेत्र में अच्छा नाम था। मतगणना के दौरान शुरुआत में जिस तरह चुनावी नतीजे देखने को मिले। उससे लग रहा था कि वह पिता की साख नहीं बचा पाएंगे लेकिन आखिर दौर में आकर उन्होंने जीत हासिल कर ली।
इधर, शेखूपुर विधानसभा सीट से आशीष यादव दो बार विधायक रहे। पिछली बार ये सीट भाजपा के खाते में चली गई। धर्मेंद्र कुमार शाक्य विधायक बने थे। इस बार आशीष यादव ने अपने बेटे हिमांशु यादव को चुनाव लड़ाया। हिमांशु यादव क्षेत्र के लिए नया चेहरा थे लेकिन पिता का नाम और पार्टी के वोटों का सहयोग मिलने से उन्होंने भी जीत हासिल कर ली।
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तिहरा मुकाबला न होने से हारे भाजपा विधायक
शेखूपुर विधानसभा सीट को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं चल रहीं हैं। ये भी माना जा रहा है कि इस बार क्षेत्र के मुस्लिम वोट सपा को चले गए। बसपा प्रत्याशी मुस्लिम खां ने भी वोट खींचने की तमाम कोशिश की लेकिन मतगणना के परिणामों के अनुसार उन्हें पार्टी वोट ही मिल पाया। इसका फायदा हिमांशु यादव को मिला। इससे भाजपा विधायक धर्मेंद्र कुमार शाक्य को हार का सामना करना पड़ा। संवाद
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सहसवान विधानसभा सीट से ओमकार सिंह यादव पांच बार विधायक चुने गए। कहने को तमाम लोगों ने चुनाव जीतने का दावा ठोंका लेकिन ओमकार सिंह सबको पछाड़ते हुए आगे बढ़ते गए। सपा सरकार में दर्जा राज्यमंत्री रहे लेकिन इस बार उन्होंने चुनाव लड़ने का मन नहीं बनाया। उन्होंने उत्तराधिकारी के रूप में अपने बेटे ब्रजेश यादव को चुनाव लड़ाया और उन्हें सपा से सहसवान विधानसभा सीट का टिकट भी दिलाया। हालांकि ब्रजेश यादव को चुनाव लड़ने का कई साल का अनुभव था लेकिन क्षेत्र में अच्छा नाम था। मतगणना के दौरान शुरुआत में जिस तरह चुनावी नतीजे देखने को मिले। उससे लग रहा था कि वह पिता की साख नहीं बचा पाएंगे लेकिन आखिर दौर में आकर उन्होंने जीत हासिल कर ली।
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इधर, शेखूपुर विधानसभा सीट से आशीष यादव दो बार विधायक रहे। पिछली बार ये सीट भाजपा के खाते में चली गई। धर्मेंद्र कुमार शाक्य विधायक बने थे। इस बार आशीष यादव ने अपने बेटे हिमांशु यादव को चुनाव लड़ाया। हिमांशु यादव क्षेत्र के लिए नया चेहरा थे लेकिन पिता का नाम और पार्टी के वोटों का सहयोग मिलने से उन्होंने भी जीत हासिल कर ली।
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