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गड्ढे बने मुद्दा, मतदान बहिष्कार पर अड़े, समझाने पर माने
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नूरपुर में मतदान का बहिष्कार करने वाले ग्रामीणों को समझाते अधिकारी। संवाद
- फोटो : BADAUN
बदायूं। विधानसभा चुनाव से पहले गड्ढा युक्त सड़कों का मुद्दा काफी उठा था, लेकिन शासन प्रशासन के लोगों की भावनाओं को नहीं समझा। शहर से लेकर गांवों तक गंदगी समेत अन्य समस्याओं को भी सत्तापक्ष ने मानने से इनकार कर दिया, लेकिन सोमवार को मतदान के दिन साफ हो गया कि सड़कें गड्ढायुक्त हैं और समस्याओं की भरमार है। दरअसर, शहर से लेकर गांव तक इन्हीं मुद्दों को लेकर मतदान का बहिष्कार किया गया। कुछ स्थानों पर तो अधिकारियों ने समझाबुझाकर दोपकर तक मतदान शुरू करा दिया, लेकिन शेखूपुर विधानसभा के नरऊ में शाम तक मतदान शुरू नहीं हो सका।
जिले में विधानसभा की छह विधानसभा सीटों के लिए सोमवार सुबह सात बजे से मतदान शुरू होने के साथ अलग-अलग स्थानों से प्रशासन के पास मतदान के बहिष्कार की सूचनाएं आने लगीं। बिसौली विधानसभा क्षेत्र के गांव रैपुरा, सहसवान क्षेत्र के गांव मकसूदपुर और बसंतनगर में भी मतदाताओं ने मतदान का बहिष्कार किया। प्रशासनिक अधिकारी यहां लोगों को समझाकर मतदान शुरू कराने पहुंचे। इस बीच शेखूपुर विधानसभा के गांव नरऊ और दातागंज विधानसभा के गांव नूरपुर में मतदान के बहिष्कार की सूचना आ गई। यहां भी अधिकारी पहुंच गए।
रैपुर में तीन घंटे बाद करीब दस बजे मतदान शुरू हो सका। मकसूदनगर और बसंतनगर में करीब पांच घंटे बाद 12 बजे तो नूपुर में चार बजे मतदान शुरू हो सका। शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र के गांव नरऊ में पांच बजे तक मतदान शुरू नहीं हो सका था। अधिकारी ग्रामीणों को मनाने की कोशिश में लगे हुए थे।
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शेखूपुर के नरऊ बूथ पर मतदान का बहिष्कार, समझाने में अफसर भी नाकाम
उझानी (बदायूं)। कई साल से तालाब में नाले के पानी की समस्या से जूझ रहे नरऊ के ग्रामीणों के मतदान बहिष्कार के फैसले ने सोमवार को अफसरों को परेशानी में डाले रखा। पोलिंग पार्टी पहुंचने के बाद सुबह मतदान का नंबर आया तो पूरे गांव के मतदाता बूथ से दूर दिखे। मतदान कर्मियों ने हकीकत से अफसरों को अवगत कराके उन्हें गांव बुला लिया। सीडीओ, एसपी सिटी समेत चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई अफसरों ने ग्रामीणों से दो-तीन दौर की बात की लेकिन कोई नतीजा सामने नहीं आया। मतदान कर्मियों ने दबी जुबान से तीन चार वोट पड़ने की बात कही लेकिन ग्रामीणों ने इससे इनकार किया।
शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र के गांव नरऊ में करीब नौ सौ वोट हैं। चुनावी शोर के दौरान करीब 10 दिन पहले ग्रामीणों ने तालाब में नाले के पानी से फसलों समेत सेहत को नुकसान बताते हुए गांव के बाहर ही मतदान के बहिष्कार का बैनर लटका दिया था। पांच-छह दिन बाद पुलिसकर्मियों के समझाने पर ग्रामीणों ने बैनर तो उतार लिया लेकिन वह मतदान के बहिष्कार पर अड़े रहे। सोमवार सुबह मतदान के लिए जब कोई भी महिला-पुरुष बूथ पर नहीं पहुंचा तो पीठासीन अधिकारी मदनमोहन भारती ने लोगों से बात की। सभी ने उन्हें मतदान के बहिष्कार के फैसले से अवगत करा दिया। हेमसिंह, मुकेश कुमार और कुबेर सिंह ने उन्हें बताया कि उझानी के नाले का पानी तालाब में गिरने से पूरे इलाके में भू-गर्भ का पानी दूषित हो गया है। अफसरों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को बताने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
पीठासीन अधिकारी ने ग्रामीणों की मंशा से अफसरों को भी अवगत करा दिया। इसके बाद चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई अफसर नरऊ गांव पहुंचे। सेक्टर और जोनल मजिस्ट्रेट ने भी ग्रामीणों से बात की। दोपहर बाद गांव पहुंचे सीडीओ ऋषिराज सिंह और एसपी सिटी प्रवीन कुमार चौहान ने ग्रामीणों से बात की। सीडीओ ने भी ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। चर्चा है कि शाम करीब पांच बजे कुछेक वोट पड़े हैं लेकिन अफसरों की ओर से इसे लेकर कुछ भी नहीं बताया गया है। ग्रामीणों में विनीत, विजयपाल और राधे का कहना है कि किसी भी महिला-पुरुष ने वोट नहीं डाला है।
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करीब दो दशक से है गंदे पानी की समस्या, फसलें भी हुई हैं बर्बाद
उझानी। नरऊ गांव के तालाब में उझानी के नाले का पानी करीब दो दशक पहले पहुंचना शुरू हुआ था। दो-तीन साल बाद ही तालाब फुल हो गया तो पानी आसपास के खेतों में फसलों को बर्बाद करने लगा। खासकर बारिश के दिनों में स्थिति विकराल होती गई। यहां तक कि भू-गर्भ में पानी दूषित हो गया। नलों को पानी पीने से ग्रामीणों को बीमारियों से जूझना पड़ा। डेढ़-दो साल पहले मंडलायुक्त से लेकर जिलाधिकारी तक ने दो-तीन बार नरऊ की हकीकत को समझा। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए प्रस्ताव भी भेजा गया लेकिन मंजूर नहीं हो पाया। संवाद
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जिले में विधानसभा की छह विधानसभा सीटों के लिए सोमवार सुबह सात बजे से मतदान शुरू होने के साथ अलग-अलग स्थानों से प्रशासन के पास मतदान के बहिष्कार की सूचनाएं आने लगीं। बिसौली विधानसभा क्षेत्र के गांव रैपुरा, सहसवान क्षेत्र के गांव मकसूदपुर और बसंतनगर में भी मतदाताओं ने मतदान का बहिष्कार किया। प्रशासनिक अधिकारी यहां लोगों को समझाकर मतदान शुरू कराने पहुंचे। इस बीच शेखूपुर विधानसभा के गांव नरऊ और दातागंज विधानसभा के गांव नूरपुर में मतदान के बहिष्कार की सूचना आ गई। यहां भी अधिकारी पहुंच गए।
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रैपुर में तीन घंटे बाद करीब दस बजे मतदान शुरू हो सका। मकसूदनगर और बसंतनगर में करीब पांच घंटे बाद 12 बजे तो नूपुर में चार बजे मतदान शुरू हो सका। शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र के गांव नरऊ में पांच बजे तक मतदान शुरू नहीं हो सका था। अधिकारी ग्रामीणों को मनाने की कोशिश में लगे हुए थे।
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शेखूपुर के नरऊ बूथ पर मतदान का बहिष्कार, समझाने में अफसर भी नाकाम
उझानी (बदायूं)। कई साल से तालाब में नाले के पानी की समस्या से जूझ रहे नरऊ के ग्रामीणों के मतदान बहिष्कार के फैसले ने सोमवार को अफसरों को परेशानी में डाले रखा। पोलिंग पार्टी पहुंचने के बाद सुबह मतदान का नंबर आया तो पूरे गांव के मतदाता बूथ से दूर दिखे। मतदान कर्मियों ने हकीकत से अफसरों को अवगत कराके उन्हें गांव बुला लिया। सीडीओ, एसपी सिटी समेत चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई अफसरों ने ग्रामीणों से दो-तीन दौर की बात की लेकिन कोई नतीजा सामने नहीं आया। मतदान कर्मियों ने दबी जुबान से तीन चार वोट पड़ने की बात कही लेकिन ग्रामीणों ने इससे इनकार किया।
शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र के गांव नरऊ में करीब नौ सौ वोट हैं। चुनावी शोर के दौरान करीब 10 दिन पहले ग्रामीणों ने तालाब में नाले के पानी से फसलों समेत सेहत को नुकसान बताते हुए गांव के बाहर ही मतदान के बहिष्कार का बैनर लटका दिया था। पांच-छह दिन बाद पुलिसकर्मियों के समझाने पर ग्रामीणों ने बैनर तो उतार लिया लेकिन वह मतदान के बहिष्कार पर अड़े रहे। सोमवार सुबह मतदान के लिए जब कोई भी महिला-पुरुष बूथ पर नहीं पहुंचा तो पीठासीन अधिकारी मदनमोहन भारती ने लोगों से बात की। सभी ने उन्हें मतदान के बहिष्कार के फैसले से अवगत करा दिया। हेमसिंह, मुकेश कुमार और कुबेर सिंह ने उन्हें बताया कि उझानी के नाले का पानी तालाब में गिरने से पूरे इलाके में भू-गर्भ का पानी दूषित हो गया है। अफसरों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को बताने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
पीठासीन अधिकारी ने ग्रामीणों की मंशा से अफसरों को भी अवगत करा दिया। इसके बाद चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई अफसर नरऊ गांव पहुंचे। सेक्टर और जोनल मजिस्ट्रेट ने भी ग्रामीणों से बात की। दोपहर बाद गांव पहुंचे सीडीओ ऋषिराज सिंह और एसपी सिटी प्रवीन कुमार चौहान ने ग्रामीणों से बात की। सीडीओ ने भी ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। चर्चा है कि शाम करीब पांच बजे कुछेक वोट पड़े हैं लेकिन अफसरों की ओर से इसे लेकर कुछ भी नहीं बताया गया है। ग्रामीणों में विनीत, विजयपाल और राधे का कहना है कि किसी भी महिला-पुरुष ने वोट नहीं डाला है।
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करीब दो दशक से है गंदे पानी की समस्या, फसलें भी हुई हैं बर्बाद
उझानी। नरऊ गांव के तालाब में उझानी के नाले का पानी करीब दो दशक पहले पहुंचना शुरू हुआ था। दो-तीन साल बाद ही तालाब फुल हो गया तो पानी आसपास के खेतों में फसलों को बर्बाद करने लगा। खासकर बारिश के दिनों में स्थिति विकराल होती गई। यहां तक कि भू-गर्भ में पानी दूषित हो गया। नलों को पानी पीने से ग्रामीणों को बीमारियों से जूझना पड़ा। डेढ़-दो साल पहले मंडलायुक्त से लेकर जिलाधिकारी तक ने दो-तीन बार नरऊ की हकीकत को समझा। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए प्रस्ताव भी भेजा गया लेकिन मंजूर नहीं हो पाया। संवाद