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सहसवान में कभी पार न पा पाई भाजपा, अब योगी लगाएंगे जोर
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सहसवान विधानसभा क्षेत्र की पहचान झील। संवाद
- फोटो : BADAUN
अमित सक्सेना
बदायूं। सहसवान विधानसभा सीट पर भाजपा के सिंबल ‘कमल के फूल’ वाले प्रत्याशी कभी नहीं जीत सके। बल्कि पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी चौथे नंबर पर रहे थे। अब सीएम योगी सभा के बहाने इस सीट पर ‘कमल’ खिलाना चाहते हैं।
जिले में छह विधानसभा क्षेत्र हैं। इनमें सहसवान को छोड़कर बाकी भाजपा के कब्जे में हैं। करीब चार लाख से ज्यादा मतदाताओं वाली सहसवान विधानसभा सीट से सपा के ओमकार सिंह यादव विधायक हैं, जो सपा सरकार में ग्राम्य विकास राज्यमंत्री भी रह चुके हैं। भाजपा की बात करें तो सहसवान में वह आज तक विधान सभा चुनाव नहीं जीत सकी। पिछले विधान सभा चुनाव में जब भाजपा लहर थी, तब भी यहां प्रदर्शन निराशाजनक रहा था। भाजपा प्रत्याशी आशुतोष वार्ष्णेय भोला 25 हजार से भी कम मत लेकर चौथे नंबर पर सिमट गए थे। सपा प्रत्याशी का मुख्य मुकाबला बसपा के हाजी अरशद अली से हुआ था। डीपी यादव की पत्नी भी राष्ट्रीय परिवर्तन दल पार्टी के बैनर तले लड़कर तीसरे नंबर पर रहीं और सम्मानजनक वोट ले गईं थीं।
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मुलायम सिंह से चुनाव हारकर चमके थे महेश गुप्ता
सहसवान विधानसभा सीट से मुलायम सिंह यादव वर्ष 1996 में विधानसभा चुनाव लडे़ थे। उनके मुकाबले पर भाजपा को तब प्रत्याशी नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में सहसवान के ही दहगवां क्षेत्र से राजनीति शुरू करने वाले अपने कर्मठ पदाधिकारी महेश गुप्ता पर भाजपा ने दांव लगा दिया। महेश गुप्ता यह चुनाव करीब 54000 वोट से हार गए पर उस वक्त के दिग्गज नेता मुलायम सिंह से मुकाबला करके उनकी राजनीति में पर्याप्त धार आ गई। फिलहाल वह बदायूं शहर से विधायक व नगर विकास राज्यमंत्री हैं। मुलायम सिंह ने बाद में सहसवान सीट से इस्तीफा दे दिया था। उपचुनाव में सपा फिर जीती।
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सहसवान वालों को बाहरी पर ज्यादा भरोसा, डीपी यादव को भी अपनाया
सहसवान सीट की खासियत कहें तो गुरेज न होगा। यहां की जनता ने स्थानीय नेताओं के बजाय बाहरी प्रत्याशियों को जिताने में ज्यादा दिलचस्पी ली है। कोठी परिवार के मीर मजहर अली उर्फ नन्हे मियां व उनके भाई अच्छे मियां जरूर ऐसे स्थानीय नेता थे जो विधायक बने। वर्ष 2007 में राष्ट्रीय परिवर्तन दल नाम की अपनी पार्टी बनाकर बाहुबली नेता डीपी यादव ने भी सहसवान सीट पर चुनाव जीता था। यहां से पांच बार विधायक व पूर्व मंत्री ओमकार सिंह यादव भी मूल रूप से सहसवान से सटी गुन्नौर तहसील के सिंगौला गांव के निवासी हैं। हालांकि जीत के बाद उन्होंने सहसवान के मोहल्ला जहांगीराबाद में अपना आवास बनाकर खुद को यहां स्थापित कर लिया। अब फिर सहसवान से भाजपा से टिकट की दावेदारी में स्थानीय लोगों के नाम नहीं दिख रहे। यहां भाजयुमो के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजेश यादव, गुन्नौर विधायक अजीत राजू के भाई दीपक यादव जैसे नाम टिकट के लिए चर्चा में हैं। सूत्रों के मुताबिक पूर्व एमएलसी जितेंद्र यादव व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम यादव भी टिकट की दावेदारी कर सकती हैं।
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वर्ष 1980 से अब तक के विधायक
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वर्ष 1980 मीर मजहर अली कांग्रेस
वर्ष 1985 नरेशपाल सिंह एलकेडी
वर्ष 1989 मीर मजहर अली निर्दलीय
वर्ष 1991 ओमकार सिंह जनता दल
वर्ष 1993 मीर मजहर अली सपा
वर्ष 1996 मुलाय
म सिंह यादव सपा
वर्ष 1997 ओमकार सिंह सपा
वर्ष 2002 ओमकार सिंह सपा
वर्ष 2007 डीपी यादव रापद
वर्ष 2012 ओमकार सिंह सपा
वर्ष 2017 ओमकार सिंह सपा
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बदायूं। सहसवान विधानसभा सीट पर भाजपा के सिंबल ‘कमल के फूल’ वाले प्रत्याशी कभी नहीं जीत सके। बल्कि पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी चौथे नंबर पर रहे थे। अब सीएम योगी सभा के बहाने इस सीट पर ‘कमल’ खिलाना चाहते हैं।
जिले में छह विधानसभा क्षेत्र हैं। इनमें सहसवान को छोड़कर बाकी भाजपा के कब्जे में हैं। करीब चार लाख से ज्यादा मतदाताओं वाली सहसवान विधानसभा सीट से सपा के ओमकार सिंह यादव विधायक हैं, जो सपा सरकार में ग्राम्य विकास राज्यमंत्री भी रह चुके हैं। भाजपा की बात करें तो सहसवान में वह आज तक विधान सभा चुनाव नहीं जीत सकी। पिछले विधान सभा चुनाव में जब भाजपा लहर थी, तब भी यहां प्रदर्शन निराशाजनक रहा था। भाजपा प्रत्याशी आशुतोष वार्ष्णेय भोला 25 हजार से भी कम मत लेकर चौथे नंबर पर सिमट गए थे। सपा प्रत्याशी का मुख्य मुकाबला बसपा के हाजी अरशद अली से हुआ था। डीपी यादव की पत्नी भी राष्ट्रीय परिवर्तन दल पार्टी के बैनर तले लड़कर तीसरे नंबर पर रहीं और सम्मानजनक वोट ले गईं थीं।
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मुलायम सिंह से चुनाव हारकर चमके थे महेश गुप्ता
सहसवान विधानसभा सीट से मुलायम सिंह यादव वर्ष 1996 में विधानसभा चुनाव लडे़ थे। उनके मुकाबले पर भाजपा को तब प्रत्याशी नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में सहसवान के ही दहगवां क्षेत्र से राजनीति शुरू करने वाले अपने कर्मठ पदाधिकारी महेश गुप्ता पर भाजपा ने दांव लगा दिया। महेश गुप्ता यह चुनाव करीब 54000 वोट से हार गए पर उस वक्त के दिग्गज नेता मुलायम सिंह से मुकाबला करके उनकी राजनीति में पर्याप्त धार आ गई। फिलहाल वह बदायूं शहर से विधायक व नगर विकास राज्यमंत्री हैं। मुलायम सिंह ने बाद में सहसवान सीट से इस्तीफा दे दिया था। उपचुनाव में सपा फिर जीती।
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सहसवान वालों को बाहरी पर ज्यादा भरोसा, डीपी यादव को भी अपनाया
सहसवान सीट की खासियत कहें तो गुरेज न होगा। यहां की जनता ने स्थानीय नेताओं के बजाय बाहरी प्रत्याशियों को जिताने में ज्यादा दिलचस्पी ली है। कोठी परिवार के मीर मजहर अली उर्फ नन्हे मियां व उनके भाई अच्छे मियां जरूर ऐसे स्थानीय नेता थे जो विधायक बने। वर्ष 2007 में राष्ट्रीय परिवर्तन दल नाम की अपनी पार्टी बनाकर बाहुबली नेता डीपी यादव ने भी सहसवान सीट पर चुनाव जीता था। यहां से पांच बार विधायक व पूर्व मंत्री ओमकार सिंह यादव भी मूल रूप से सहसवान से सटी गुन्नौर तहसील के सिंगौला गांव के निवासी हैं। हालांकि जीत के बाद उन्होंने सहसवान के मोहल्ला जहांगीराबाद में अपना आवास बनाकर खुद को यहां स्थापित कर लिया। अब फिर सहसवान से भाजपा से टिकट की दावेदारी में स्थानीय लोगों के नाम नहीं दिख रहे। यहां भाजयुमो के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजेश यादव, गुन्नौर विधायक अजीत राजू के भाई दीपक यादव जैसे नाम टिकट के लिए चर्चा में हैं। सूत्रों के मुताबिक पूर्व एमएलसी जितेंद्र यादव व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम यादव भी टिकट की दावेदारी कर सकती हैं।
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वर्ष 1980 से अब तक के विधायक
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वर्ष 1980 मीर मजहर अली कांग्रेस
वर्ष 1985 नरेशपाल सिंह एलकेडी
वर्ष 1989 मीर मजहर अली निर्दलीय
वर्ष 1991 ओमकार सिंह जनता दल
वर्ष 1993 मीर मजहर अली सपा
वर्ष 1996 मुलाय
म सिंह यादव सपा
वर्ष 1997 ओमकार सिंह सपा
वर्ष 2002 ओमकार सिंह सपा
वर्ष 2007 डीपी यादव रापद
वर्ष 2012 ओमकार सिंह सपा
वर्ष 2017 ओमकार सिंह सपा