Exclusive News एक्सक्लूसिव खबरें
Free E-Paper फ्री में ई-पेपर पढ़ें
ऐप डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   ayushyaman

गोल्डन कार्ड तो है साहब!...इलाज कौन करेगा 22-38-33

Tue, 17 Sep 2019 02:34 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 17 Sep 2019 02:34 AM IST
विज्ञापन
ayushyaman
बदायूं। आयुष्मान भारत योजना उन गरीबों के लिए एक सपने जैसी है, जिन्होंने कभी धन के अभाव में अपनों को खोया है। वे इलाज के लिए तरसते रहे होंगे लेकिन इलाज नहीं मिला होगा। आज जमीनी स्तर पर नजर दौड़ाएं तो जिले में ऐसे तमाम लोग हैं, जिनके अपने बीमार हैं और उनका इलाज नहीं हो पा रहा है। कहने को सरकारी अस्पतालों में इलाज मुफ्त है। किसी को दवा नहीं तो किसी के इलाज में लापरवाही हो रही है। गंभीर मरीजों के लिए जिले में कोई सुविधाएं नहीं हैं। न तो वेंटीलेटर है और न ही गरीब मरीजों के लिए जगह है।
विज्ञापन

आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले में कुल 186161 लोगों के गोल्डन कार्ड बनने हैं। इनमें 61911 लोगों के गोल्डन कार्ड बन चुके हैं। बाकी लोगों के कार्ड जल्द बनाने का दावा किया गया है। वहीं इलाज के लिए जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज चिन्हित किए गए हैं। जिले के आठ प्राइवेट अस्पतालों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है लेकिन उनमें से सिर्फ पांच प्राइवेट अस्पताल ही काम कर रहे हैं। तो वहीं जिला अस्पताल और महिला अस्पताल के हालात किसी से छिपे नहीं है। यहां उन मरीजों के साथ लापरवाही की शिकायतें आती हैं, जो अपने परिवार से भरेपुरे हैं। फिर इन गरीबों की स्थिति क्या होगी। यह तो भगवान ही जानें। वहीं गंभीर मरीज देखकर यहां के चिकित्सकों के हाथ पैर फूल जाते हैं। उनका प्राथमिक उपचार तक मुश्किल हो जाता है। मरीज के अस्पताल में आते ही उन्हें हायरसेंटर रेफर करने की पहले सोंची जाती है। मरीज को लाने-ले जाने, खाना खर्चा समेत और बहुत सारी दिक्कतें होती हैं। ऐसे में गरीब आदमी स्थानीय अस्पताल में इलाज कराना चाहता है लेकिन यहां ऐसी कोई सुविधाएं नहीं हैं। हेड इंजरी से लेकर दिल की बीमारी, या बड़े ऑपरेशन वाले मरीज तो रैफर होने ही हैं।
विज्ञापन

जिला अस्पताल में अब तक आयुष्मान भारत योजना के तहत करीब 40 मरीजों का इलाज हो चुका है। उनका इलाज तो वैसे भी मुफ्त था लेकिन मरीजों का गोल्डन कार्ड था। इससे उनका नाम इस योजना के तहत लाभ लेने वालों में जोड़ दिया गया। इन मरीजों को जो सुविधाएं मिलनी चाहिए थीं, वो सुविधाएं नहीं मिली। तीमारदारों को ब्लड तक का स्वयं इंतजाम करना पड़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बीमारियों से जूझ रहे, कार्ड बना शोपीस
-दातागंज कोतवाली क्षेत्र के ग्राम कैलियाई निवासी छेदालाल गोल्डन कार्ड धारक हैं। 14 अगस्त को उनका एक्सीडेंट हुआ था। परिवार वाले उन्हें जिला अस्पताल लेकर आए थे। डॉक्टर ने हालत देखकर उनको तीन यूनिट ब्लड एडवाइज किया था। उसमें से एक यूनिट ब्लड का परिवार वालों ने इंतजाम कर लिया लेकिन दो यूनिट ब्लड का नहीं मिल सका। यहां पर उनका गोल्डन कार्ड भी काम नहीं आया। इसके अलावा छेदालाल के परिवार वाले बीमार पड़े रहे। उनके बेटे गिरिश को वायरल बुखार था। उसे भी गोल्डन कार्ड के तहत कोई दवा नहीं मिली।
जिला अस्पताल नहीं रेफर केंद्र कहिए
-कहने को जिला अस्पताल जिला मुख्यालय पर स्थित है। सरकारी अस्पतालों में सबसे बड़ा अस्पताल है लेकिन इसके बावजूद हर मर्ज का इलाज नहीं होता। अधिकतर एक्सीडेंटल मरीज हायरसेंटर रेफर किए जाते हैं। फिर चाहे उनकी हड्डी टूटी हो या फिर हेड इंजरी हो, हर हाल में उन्हें रेफर कर दिया जाता है। छोटी-मोटी चोट या सर्दी, बुखार वाले मरीजों को भी पूरी दवाएं नहीं मिलतीं। उन्हें आधी अधूरी दवाएं देकर टरका दिया जाता है।

आयुष्मान योजना के तहत मरीज कहीं भी इलाज करा सकता है। यहां बदायूं में कोई बड़ा हॉस्पिटल नहीं है और न ही अधिक सुविधाएं हैं। इसके लिए मरीज दूसरे जिलों के अस्पतालों जा सकता है। अगर जिला अस्पताल में किसी को इलाज नहीं मिला है तो वह शिकायत करे, जिससे कार्रवाई अमल में लाई जा सके। -डॉ. मंजीत सिंह, प्रभारी सीएमओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed