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Budaun News: बच्चों को डायरिया से बचाने के लिए चलेगा जागरूकता अभियान
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मैरिल हाल में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद सीएमओ रामेश्वर मिश्रा व अन्य।स्रोत-स्वयं
बदायूं। स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल-इंडिया (पीएसआई-इंडिया) और केन्व्यू संस्था के सहयोग से ‘डायरिया से डर नहीं’ जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन एक होटल में किया गया। इसमें डायरिया से बच्चों की होने वाली मौत को रोकने के लिए लोगों को जागरूक करने पर रणनीति बनाई गई। तय हुआ कि इसमें सरकारी संस्थाओं की भी मदद ली जाएगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामेश्वर मिश्रा ने कहा कि पांच साल तक के बच्चों को डायरिया से सुरक्षित रखना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता में शामिल है। क्योंकि इस आयु वर्ग के बच्चों की होने वाली मौत का एक प्रमुख कारण डायरिया भी है। उन्होंने बताया कि डायरिया को नियंत्रित करने में ओआरएस अमृत के समान है, बस जरूरत है कि उसे सही मात्रा में और समय से बच्चे को दिया जाए।
पीएसआई-इंडिया के सीनियर प्रोग्राम मैनेजर अनिल द्विवेदी ने बताया कि आशा, आंगनबाड़ी, एएनएम और महिला आरोग्य समितियों के सदस्यों को प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्हें डायरिया की सही पहचान और बचाव के बारे में बताया जाएगा। सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) सामग्री अस्पतालों के प्रमुख स्थलों पर प्रदर्शित की जाएगी।
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बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार और शिक्षा विभाग के साथ ही अन्य विभागों को भी कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा। निजी क्षेत्र के चिकित्सकों और अस्पतालों को भी कार्यक्रम से जोड़कर ओआरएस कार्नर स्थापित करने और डायरिया के केस की रिपोर्टिंग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. मोहम्मद असलम ने कहा कि यदि डायरिया की शुरुआत में ही पहचान कर सही मात्रा में ओआरएस दिया जाए तो गंभीर स्थिति तक पहुंचने से बच्चे को बचाया जा सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की डॉ. पल्वीन कौर ने कहा कि फ्रंटलाइन वर्कर को समय-समय पर संवेदीकृत करने से निश्चित रूप से डायरिया के लक्षण और बचाव से जुड़े जरूरी संदेशों को समुदाय तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने डायरिया के केसों की रिपोर्टिंग पर भी बल दिया।
इस मौके पर राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के नोडल अधिकारी डॉ. मोहन झा, डिविजनल अर्बन हेल्थ कोऑर्डिनेटर डॉ. गंगा सरन, डिविजनल कार्यक्रम प्रबंधक मो. शाहिद हुसैन, जिला कार्यक्रम प्रबंधक कमलेश शर्मा, डिस्ट्रिक्ट कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर (डीसीपीएम) अरविन्द राना आदि उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामेश्वर मिश्रा ने कहा कि पांच साल तक के बच्चों को डायरिया से सुरक्षित रखना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता में शामिल है। क्योंकि इस आयु वर्ग के बच्चों की होने वाली मौत का एक प्रमुख कारण डायरिया भी है। उन्होंने बताया कि डायरिया को नियंत्रित करने में ओआरएस अमृत के समान है, बस जरूरत है कि उसे सही मात्रा में और समय से बच्चे को दिया जाए।
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पीएसआई-इंडिया के सीनियर प्रोग्राम मैनेजर अनिल द्विवेदी ने बताया कि आशा, आंगनबाड़ी, एएनएम और महिला आरोग्य समितियों के सदस्यों को प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्हें डायरिया की सही पहचान और बचाव के बारे में बताया जाएगा। सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) सामग्री अस्पतालों के प्रमुख स्थलों पर प्रदर्शित की जाएगी।
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बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार और शिक्षा विभाग के साथ ही अन्य विभागों को भी कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा। निजी क्षेत्र के चिकित्सकों और अस्पतालों को भी कार्यक्रम से जोड़कर ओआरएस कार्नर स्थापित करने और डायरिया के केस की रिपोर्टिंग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. मोहम्मद असलम ने कहा कि यदि डायरिया की शुरुआत में ही पहचान कर सही मात्रा में ओआरएस दिया जाए तो गंभीर स्थिति तक पहुंचने से बच्चे को बचाया जा सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की डॉ. पल्वीन कौर ने कहा कि फ्रंटलाइन वर्कर को समय-समय पर संवेदीकृत करने से निश्चित रूप से डायरिया के लक्षण और बचाव से जुड़े जरूरी संदेशों को समुदाय तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने डायरिया के केसों की रिपोर्टिंग पर भी बल दिया।
इस मौके पर राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के नोडल अधिकारी डॉ. मोहन झा, डिविजनल अर्बन हेल्थ कोऑर्डिनेटर डॉ. गंगा सरन, डिविजनल कार्यक्रम प्रबंधक मो. शाहिद हुसैन, जिला कार्यक्रम प्रबंधक कमलेश शर्मा, डिस्ट्रिक्ट कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर (डीसीपीएम) अरविन्द राना आदि उपस्थित रहे।