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Budaun News: ट्रैक्टर से खिंचवाने पर भी नहीं टूटी थी डाल, अब बन गई काल
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मंदिर परिसर में हवन करा रहे थे। पंडित मुनेद्र पाठक
- फोटो : सांकेतिक
कुंवरगांव। ललेई गांव में ग्राम देवी मंदिर परिसर में पीपल का वृक्ष करीब पांच सौ साल पुराना बताया गया है। वृक्ष की मोटी डाल पिछले साल सूख गई थी। हादसे की आशंका के मद्देनजर ग्रामीणों ने सूखी डाल को ट्रैक्टर से खिंचवाकर तोड़ने का प्रयास किया था, लेकिन डाल नहीं टूटी थी। इसके बाद ग्रामीणों ने मान लिया कि अब डाल टूटकर नहीं गिरेगी। जुलाई में जमकर बारिश हुई। बारिश में डाल भीगने से कमजोर हो गई। खोखली जगह में पानी भर गया। बुधवार की दोपहर बंदरों ने उछल-कूद ज्यादा की तो डाल पर भार पड़ा। यही वजह रही कि खोखली होने के साथ भीगकर कमजोर हुई डाल दो महिलाओं की काल बन गई।
डाल टूटकर गिरने के दौरान हुए हादसे के बाद ग्रामीणों ने बताया कि पीपल के वृक्ष की यह डाल सालभर से गिरताऊ हालात में थी। इसी आशंका के मद्देनजर पिछले साल ट्रैक्टर से बांधकर इसे खींचा गया था ताकि टूटकर गिर जाए, लेकिन सभी प्रयास विफल रहे। डाल के नहीं टूटने पर ग्रामीणों ने उसे उसी तरह छोड़ दिया था। हादसे के बाद लोगों ने देखा कि टूटी हुई डाल के अंदर काफी मात्रा में पानी भरा हुआ था। ग्रामीणों का कहना था कि लकड़ी पूरी तरह गल गई थी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे से कुछ देर पहले पेड़ पर बंदरों का झुंड उछलकूद कर रहा था। माना जा रहा है कि बंदरों की गतिविधियों और भीतर से कमजोर हो चुकी डाल पर पड़े अतिरिक्त दबाव के कारण डाल अचानक टूटकर नीचे आ गिरी। हादसे के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने बताया कि यदि एक वर्ष पहले सूखी डाल को सुरक्षित तरीके से हटवा दिया गया होता तो यह दुर्घटना न होती।
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अपने धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत निभा रही थीं अमीर बानो
- गुरु पूर्णिमा के हवन-कीर्तन में शामिल होने पहुंची थीं, पीपल की डाल गिरने से गई जान
सत्यम शर्मा
कुंवरगांव। अमीर बानो... अपने इसी नाम की तरह अपने मधुर व्यवहार से अमीर बानो ने गांव ललेई में पहचान बनाई थी। वह दोनों समुदाय के लोगों के सुख-दुख में शामिल होती थीं। जब भी ग्राम देवी मंदिर पर भजन-कीर्तन होते थे वे उसमें शामिल होने जरूर पहुंचती थीं। वह अपने धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत को निभाती थीं, मगर इस हादसे में अमीर बानो की भी जान चली गई।
गांव ललेई के ग्राम देवता मंदिर परिसर में बुधवार की दोपहर करीब तीन बजे हुए दर्दनाक हादसे ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में जान गंवाने वाली अमीर बानो की कहानी पूरे इलाके में इंसानियत और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बनी हुई थी। दूसरे धर्म से होने के बावजूद वह हर वर्ष गांव के धार्मिक आयोजनों में पूरे उत्साह के साथ शामिल होती थीं।
गुरु पूर्णिमा पर आयोजित हवन-पूजन और भजन-कीर्तन में भी वह अन्य महिलाओं के साथ श्रद्धाभाव से शामिल होने पहुंची थीं, लेकिन किसी को यह आभास नहीं था कि ऐसा हो जाएगा। जहां पर अमीर बानो बैठी थीं, वहीं पर डाल गिरी थी।
ग्राम प्रधान श्यामलाल ने बताया कि उनका निधन पूरे गांव के लिए अपूरणीय क्षति है। ग्रामीण सचिन ने कहा कि आज गांव में हिंदू-मुस्लिम का कोई भेद नहीं है, हर व्यक्ति उनके जाने का गम मना रहा है। संवाद
पीपल की डाल टूटकर गिरते ही आयोजन में मच गई चीख-पुकार
ग्राम देवी मंदिर परिसर में हुए दर्दनाक हादसे के प्रत्यक्षदर्शी पंडित मुनेंद्र पाठक उर्फ पप्पू ने बताया कि घटना बेहद अचानक हुई। हवन-पूजन के दौरान पीपल की सूखी शाखा पर बड़े बंदर आपस में लड़ते हुए लगातार उछलकूद कर रहे थे। इसी बीच तेज आवाज के साथ पेड़ की भारी शाखा टूटकर नीचे गिर गई। उस समय नीचे महिलाएं ढोलक के साथ भजन-कीर्तन में लीन थीं। पंडित मुनेंद्र ने बताया कि हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने या वहां से हटने का अवसर तक नहीं मिल सका।
खौफनाक पल याद कर सिहर उठीं महिलाएं
- हम लोग कुछ समझ ही नहीं पाए, चारों तरफ चीख-पुकार मच गई
संवाद न्यूज एजेंसी
कुंवरगांव। भजन-कीर्तन में शामिल महिलाएं हादसे के बाद गमगीन हैं। महिलाओं ने उस खौफनाक पल को याद करते हुए बताया कि सब कुछ अचानक हुआ और किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
डाल टूटकर गिरने के दौरान दबने से बचीं मीना ने बताया कि हम लोग मंदिर में हवन-कीर्तन कर रहे थे और ढोलक पर भजन गा रहे थे। तभी अचानक तेज आवाज आई और देखा कि पेड़ की बड़ी शाखा टूटकर नीचे गिर गई। हम लोग कुछ समझ ही नहीं पाए, चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। मोर श्री ने कहा कि पेड़ पर बंदर काफी देर से उछल-कूद कर रहे थे, लेकिन किसी ने सोचा नहीं था कि इतनी बड़ी शाखा टूट जाएगी। शाखा गिरते ही कई महिलाएं उसके नीचे दब गईं। हम लोग डर के मारे इधर-उधर भागने लगे।
रूपवती ने बताया कि हादसा इतना अचानक हुआ कि बचने का मौका ही नहीं मिला। हम लोगों ने मिलकर तुरंत शाखा हटाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। कुछ महिलाएं बेहोश हो गई थीं। कमलेश देवी ने कहा कि मंदिर में हर साल गुरु पूर्णिमा पर हवन होता है और गांव की महिलाएं बड़ी संख्या में जुटती हैं। इस बार ऐसा हादसा हो जाएगा, किसी ने सोचा भी नहीं था। घटना के बाद पूरा माहौल गमगीन हो गया।
इंस्पेक्टर व लेखपाल के समझाने पर पोस्टमॉर्टम के लिए राजी हुए परिजन
दोनों महिलाओं के परिजन पोस्टमॉर्टम कराना नहीं चाहते थे। इंस्पेक्टर राजेश कौशिक और लेखपाल प्राची यादव ने परिजनों को समझाया। काफी देर समझाने के बाद परिजन पोस्टमॉर्टम कराने के लिए तैयार हुए। लेखपाल ने बताया कि प्राकृतिक आपदा में मुआवजा दिलवाने के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी गई है।
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डाल टूटकर गिरने के दौरान हुए हादसे के बाद ग्रामीणों ने बताया कि पीपल के वृक्ष की यह डाल सालभर से गिरताऊ हालात में थी। इसी आशंका के मद्देनजर पिछले साल ट्रैक्टर से बांधकर इसे खींचा गया था ताकि टूटकर गिर जाए, लेकिन सभी प्रयास विफल रहे। डाल के नहीं टूटने पर ग्रामीणों ने उसे उसी तरह छोड़ दिया था। हादसे के बाद लोगों ने देखा कि टूटी हुई डाल के अंदर काफी मात्रा में पानी भरा हुआ था। ग्रामीणों का कहना था कि लकड़ी पूरी तरह गल गई थी।
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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे से कुछ देर पहले पेड़ पर बंदरों का झुंड उछलकूद कर रहा था। माना जा रहा है कि बंदरों की गतिविधियों और भीतर से कमजोर हो चुकी डाल पर पड़े अतिरिक्त दबाव के कारण डाल अचानक टूटकर नीचे आ गिरी। हादसे के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने बताया कि यदि एक वर्ष पहले सूखी डाल को सुरक्षित तरीके से हटवा दिया गया होता तो यह दुर्घटना न होती।
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अपने धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत निभा रही थीं अमीर बानो
- गुरु पूर्णिमा के हवन-कीर्तन में शामिल होने पहुंची थीं, पीपल की डाल गिरने से गई जान
सत्यम शर्मा
कुंवरगांव। अमीर बानो... अपने इसी नाम की तरह अपने मधुर व्यवहार से अमीर बानो ने गांव ललेई में पहचान बनाई थी। वह दोनों समुदाय के लोगों के सुख-दुख में शामिल होती थीं। जब भी ग्राम देवी मंदिर पर भजन-कीर्तन होते थे वे उसमें शामिल होने जरूर पहुंचती थीं। वह अपने धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत को निभाती थीं, मगर इस हादसे में अमीर बानो की भी जान चली गई।
गांव ललेई के ग्राम देवता मंदिर परिसर में बुधवार की दोपहर करीब तीन बजे हुए दर्दनाक हादसे ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में जान गंवाने वाली अमीर बानो की कहानी पूरे इलाके में इंसानियत और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बनी हुई थी। दूसरे धर्म से होने के बावजूद वह हर वर्ष गांव के धार्मिक आयोजनों में पूरे उत्साह के साथ शामिल होती थीं।
गुरु पूर्णिमा पर आयोजित हवन-पूजन और भजन-कीर्तन में भी वह अन्य महिलाओं के साथ श्रद्धाभाव से शामिल होने पहुंची थीं, लेकिन किसी को यह आभास नहीं था कि ऐसा हो जाएगा। जहां पर अमीर बानो बैठी थीं, वहीं पर डाल गिरी थी।
ग्राम प्रधान श्यामलाल ने बताया कि उनका निधन पूरे गांव के लिए अपूरणीय क्षति है। ग्रामीण सचिन ने कहा कि आज गांव में हिंदू-मुस्लिम का कोई भेद नहीं है, हर व्यक्ति उनके जाने का गम मना रहा है। संवाद
पीपल की डाल टूटकर गिरते ही आयोजन में मच गई चीख-पुकार
ग्राम देवी मंदिर परिसर में हुए दर्दनाक हादसे के प्रत्यक्षदर्शी पंडित मुनेंद्र पाठक उर्फ पप्पू ने बताया कि घटना बेहद अचानक हुई। हवन-पूजन के दौरान पीपल की सूखी शाखा पर बड़े बंदर आपस में लड़ते हुए लगातार उछलकूद कर रहे थे। इसी बीच तेज आवाज के साथ पेड़ की भारी शाखा टूटकर नीचे गिर गई। उस समय नीचे महिलाएं ढोलक के साथ भजन-कीर्तन में लीन थीं। पंडित मुनेंद्र ने बताया कि हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने या वहां से हटने का अवसर तक नहीं मिल सका।
खौफनाक पल याद कर सिहर उठीं महिलाएं
- हम लोग कुछ समझ ही नहीं पाए, चारों तरफ चीख-पुकार मच गई
संवाद न्यूज एजेंसी
कुंवरगांव। भजन-कीर्तन में शामिल महिलाएं हादसे के बाद गमगीन हैं। महिलाओं ने उस खौफनाक पल को याद करते हुए बताया कि सब कुछ अचानक हुआ और किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
डाल टूटकर गिरने के दौरान दबने से बचीं मीना ने बताया कि हम लोग मंदिर में हवन-कीर्तन कर रहे थे और ढोलक पर भजन गा रहे थे। तभी अचानक तेज आवाज आई और देखा कि पेड़ की बड़ी शाखा टूटकर नीचे गिर गई। हम लोग कुछ समझ ही नहीं पाए, चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। मोर श्री ने कहा कि पेड़ पर बंदर काफी देर से उछल-कूद कर रहे थे, लेकिन किसी ने सोचा नहीं था कि इतनी बड़ी शाखा टूट जाएगी। शाखा गिरते ही कई महिलाएं उसके नीचे दब गईं। हम लोग डर के मारे इधर-उधर भागने लगे।
रूपवती ने बताया कि हादसा इतना अचानक हुआ कि बचने का मौका ही नहीं मिला। हम लोगों ने मिलकर तुरंत शाखा हटाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। कुछ महिलाएं बेहोश हो गई थीं। कमलेश देवी ने कहा कि मंदिर में हर साल गुरु पूर्णिमा पर हवन होता है और गांव की महिलाएं बड़ी संख्या में जुटती हैं। इस बार ऐसा हादसा हो जाएगा, किसी ने सोचा भी नहीं था। घटना के बाद पूरा माहौल गमगीन हो गया।
इंस्पेक्टर व लेखपाल के समझाने पर पोस्टमॉर्टम के लिए राजी हुए परिजन
दोनों महिलाओं के परिजन पोस्टमॉर्टम कराना नहीं चाहते थे। इंस्पेक्टर राजेश कौशिक और लेखपाल प्राची यादव ने परिजनों को समझाया। काफी देर समझाने के बाद परिजन पोस्टमॉर्टम कराने के लिए तैयार हुए। लेखपाल ने बताया कि प्राकृतिक आपदा में मुआवजा दिलवाने के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी गई है।

मंदिर परिसर में हवन करा रहे थे। पंडित मुनेद्र पाठक- फोटो : सांकेतिक

मंदिर परिसर में हवन करा रहे थे। पंडित मुनेद्र पाठक- फोटो : सांकेतिक

मंदिर परिसर में हवन करा रहे थे। पंडित मुनेद्र पाठक- फोटो : सांकेतिक

मंदिर परिसर में हवन करा रहे थे। पंडित मुनेद्र पाठक- फोटो : सांकेतिक

मंदिर परिसर में हवन करा रहे थे। पंडित मुनेद्र पाठक- फोटो : सांकेतिक