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जिला अस्पताल में अटैचमेंट का खेल, देहात में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
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बदायूं। डॉक्टरों की कमी के जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग में बड़े स्तर पर अटैचमेंट का खेल चल रहा है। विभागीय अधिकारियों से सेटिंग कर सीएचसी, पीएचसी पर मूल तैनाती वाले डॉक्टरों ने खुद को महत्वपूर्ण स्थानों पर अटैच करा लिया है। ऐसे में गांव-देहात में स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है।
शासन का स्पष्ट आदेश है कि अटैचमेंट पूरी तरह से खत्म कर डॉक्टरों को मूल तैनाती पर भेजा जाए। कोरोना ड्यूटी से इतर कोई अटैचमेंट नहीं होना चाहिए। हाल ही में फिर से इस संबंध में शासनादेश जारी किया गया है पर जिले में इसे पूरी तरह से दरकिनार किया गया है। जगत पीएचसी पर तैनात डॉ. गजेंद्र वर्मा, डॉ. आकांक्षा यादव, वजीरगंज सीएचसी पर तैनात डॉ. पीयूष मोहन ने जुगाड़ से खुद को जिला अस्पताल में अटैच करा रखा है। जगत में ही तैनात डॉ. मोहम्मद असलम लेवल दो के डॉक्टर हैं, लेकिन वह जिला मुख्यालय पर अटैच हैं और एसीएमओ स्तर का काम देख रहे हैं। लेवल चार में एसीएमओ स्तर के सिर्फ डॉ. प्रमोद कुमार हैं। डॉ. प्रमोद कुमार को कोई अहम जिम्मेदारी ही नहीं दी गई है।
लेवल तीन के डॉ. तहसीन की मूल तैनाती समरेर, डॉ. पंकज शर्मा की आसफपुर, डॉ. सनोज मिश्रा की दातागंज, डॉ. अमित रस्तोगी की कादरचौक में है। इन सभी को सीएमओ ने अपने अधीन मुख्यालय पर अटैच कर रखा है। अटैच किए गए लेवल तीन के इन डॉक्टरों को एसीएमओ स्तर की जिम्मेदारियां दी गई हैं। बड़ी संख्या में डॉक्टरों के मुख्यालय पर अटैच होने के कारण गांव-देहात में चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
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ईएनटी की तैनाती बदायूं में और अटैचमेंट शाहजहांपुर
जिले में नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ (ईएनटी) को लेकर रोगियों को हमेशा समस्या रहती है। जिला अस्पताल में डॉ. प्रेमशंकर मौर्य और डॉ. एम सिद्दीकी ईएनटी हैं, लेकिन डॉ. प्रेमशंकर मौर्य ने खुद को शाहजहांपुर में अटैच करा रखा है। बदायूं जिला अस्पताल में सिर्फ डॉ. सिद्दीकी ही हैं। दिव्यांग बोर्ड से लेकर, न्यायिक और विभागीय कार्यों के कारण वह भी ज्यादा समय नहीं दे पाते। ऐसे में रोगियों को परेशानी होती है। गौर करने की बात यह है कि अटैच किए गए डॉक्टरों का वेतन बड़ी ही आसानी से निकल जाता है।
कागजों में दौड़ रहीं स्वास्थ्य सेवाएं
जिले में स्वास्थ्य सेवाएं इन दिनों धरातल से ज्यादा कागजों में दौड़ रही हैं। भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई नहीं हो रही। हालात यह हैं कि जिले में कई स्वास्थ्य केंद्रों के तो ताले तक नहीं खुलते। सीएचसी और पीएचसी पूरी तरह से रेफरल यूनिट के रूप में काम कर रही हैं। सरकारी अस्पतालों में दवाएं तो दूर रोगियों और प्रसूताओं को मिलने वाले भोजन भी डकारा जा रहा है। हाल ही में डीएम दीपा रंजन ने जब बिल्सी सीएचसी का निरीक्षण किया तो भोजन के नाम पर हो रहा भ्रष्टाचार सामने आया था, इस मामले में भी कार्रवाई नहीं हो रही।
डॉक्टरों को इस तरह से अटैच किया जाना शासनादेशों का खुला उल्लंघन है। जिला अस्पताल में डॉ. पीयूष मोहन, डॉ. गजेंद्र वर्मा, डॉ. आकांक्षा यादव के अटैच होने की मुझे जानकारी नहीं दी गई। सीएचसी और पीएचसी के डॉक्टरों को नियम विरुद्घ अटैच किए जाने का मामला जानकारी में आया है। तीन दिन के भीतर कार्रवाई करते हुए अटैचमेंट खत्म करने का आदेश दिया गया है। - डॉ. दीपक अहोरी, अपर निदेशक स्वास्थ्य
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शासन का स्पष्ट आदेश है कि अटैचमेंट पूरी तरह से खत्म कर डॉक्टरों को मूल तैनाती पर भेजा जाए। कोरोना ड्यूटी से इतर कोई अटैचमेंट नहीं होना चाहिए। हाल ही में फिर से इस संबंध में शासनादेश जारी किया गया है पर जिले में इसे पूरी तरह से दरकिनार किया गया है। जगत पीएचसी पर तैनात डॉ. गजेंद्र वर्मा, डॉ. आकांक्षा यादव, वजीरगंज सीएचसी पर तैनात डॉ. पीयूष मोहन ने जुगाड़ से खुद को जिला अस्पताल में अटैच करा रखा है। जगत में ही तैनात डॉ. मोहम्मद असलम लेवल दो के डॉक्टर हैं, लेकिन वह जिला मुख्यालय पर अटैच हैं और एसीएमओ स्तर का काम देख रहे हैं। लेवल चार में एसीएमओ स्तर के सिर्फ डॉ. प्रमोद कुमार हैं। डॉ. प्रमोद कुमार को कोई अहम जिम्मेदारी ही नहीं दी गई है।
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लेवल तीन के डॉ. तहसीन की मूल तैनाती समरेर, डॉ. पंकज शर्मा की आसफपुर, डॉ. सनोज मिश्रा की दातागंज, डॉ. अमित रस्तोगी की कादरचौक में है। इन सभी को सीएमओ ने अपने अधीन मुख्यालय पर अटैच कर रखा है। अटैच किए गए लेवल तीन के इन डॉक्टरों को एसीएमओ स्तर की जिम्मेदारियां दी गई हैं। बड़ी संख्या में डॉक्टरों के मुख्यालय पर अटैच होने के कारण गांव-देहात में चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
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ईएनटी की तैनाती बदायूं में और अटैचमेंट शाहजहांपुर
जिले में नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ (ईएनटी) को लेकर रोगियों को हमेशा समस्या रहती है। जिला अस्पताल में डॉ. प्रेमशंकर मौर्य और डॉ. एम सिद्दीकी ईएनटी हैं, लेकिन डॉ. प्रेमशंकर मौर्य ने खुद को शाहजहांपुर में अटैच करा रखा है। बदायूं जिला अस्पताल में सिर्फ डॉ. सिद्दीकी ही हैं। दिव्यांग बोर्ड से लेकर, न्यायिक और विभागीय कार्यों के कारण वह भी ज्यादा समय नहीं दे पाते। ऐसे में रोगियों को परेशानी होती है। गौर करने की बात यह है कि अटैच किए गए डॉक्टरों का वेतन बड़ी ही आसानी से निकल जाता है।
कागजों में दौड़ रहीं स्वास्थ्य सेवाएं
जिले में स्वास्थ्य सेवाएं इन दिनों धरातल से ज्यादा कागजों में दौड़ रही हैं। भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई नहीं हो रही। हालात यह हैं कि जिले में कई स्वास्थ्य केंद्रों के तो ताले तक नहीं खुलते। सीएचसी और पीएचसी पूरी तरह से रेफरल यूनिट के रूप में काम कर रही हैं। सरकारी अस्पतालों में दवाएं तो दूर रोगियों और प्रसूताओं को मिलने वाले भोजन भी डकारा जा रहा है। हाल ही में डीएम दीपा रंजन ने जब बिल्सी सीएचसी का निरीक्षण किया तो भोजन के नाम पर हो रहा भ्रष्टाचार सामने आया था, इस मामले में भी कार्रवाई नहीं हो रही।
डॉक्टरों को इस तरह से अटैच किया जाना शासनादेशों का खुला उल्लंघन है। जिला अस्पताल में डॉ. पीयूष मोहन, डॉ. गजेंद्र वर्मा, डॉ. आकांक्षा यादव के अटैच होने की मुझे जानकारी नहीं दी गई। सीएचसी और पीएचसी के डॉक्टरों को नियम विरुद्घ अटैच किए जाने का मामला जानकारी में आया है। तीन दिन के भीतर कार्रवाई करते हुए अटैचमेंट खत्म करने का आदेश दिया गया है। - डॉ. दीपक अहोरी, अपर निदेशक स्वास्थ्य