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गरीब को अभी भी नहीं मिल सका %आसरा%
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बदायूं। विभाग की लापरवाही कहें या कुछ और कि पांच साल बाद भी शहरी गरीब लोगों के लिए आसरा आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका है, जिसकी वजह से वे अभी भी खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो रहे हैं। हालांकि विभाग का दावा है कि जल्द ही मुड़िया व सैदपुर में लोगों को आवास मिल सकेंगे, क्योंकि वहां पर काम पूरा हो चुका है, नगर पंचायतों को आवासों के स्थानांतरण की प्रक्रिया चल रही है। बदायूं व वजीरगंज में आसरा आवास योजना के तहत आवास बनाने का काम तेजी से चल रहा है।
बसपा शासनकाल के बाद में जब प्रदेश में सपा की सरकार आई तो उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के ड्रीम प्रोजेक्ट कांशीराम शहरी आवास योजना को बंद कर दिया। साथ ही वर्ष 2015 में गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले शहरी गरीबों को निशुल्क आवास देने के लिए आसरा आवास बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद में नगर पालिका और पंचायतों में भूमि की तलाश की जाने लगी। उस समय बदायूं, वजीरगंज, मुड़िया और सैदपुर में जमीन उपलब्ध हो गई, जिसके बाद में इन जगहों पर योजना की शुरुआत कर दी गई। इसके लिए सी एंड डीएस संस्था को नामित किया गया। इसमें बदायूं नगर पालिका में 17 करोड़ 68 लाख रुपये की लागत से 384 आवासों का निर्माण करना था। वहीं वजीरगंज में 12 करोड़ 76 लाख रुपये से से 276, सैदपुर में नौ करोड़ 60 लाख से 204 और मुड़िया में पांच करोड़ 30 लाख रुपये से 108 आवासों का निर्माण शुरू किया गया, लेकिन आवासों के निर्माण में कार्यदायी संस्था और डूडा के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से योजना तेजी नहीं पकड़ सकी। हालात ये हैं कि पांच साल बाद भी आसरा आवास योजना का किसी भी शहरी गरीब व्यक्ति को लाभ नहीं मिल सका।
विभाग का दावा- बजट मिलने में देरी बनी वजह
- जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) के परियोजना अधिकारी देवेश कुमार सिंह के अनुसार समय से बजट नहीं मिल पाने की वजह से ये निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका था। जब-जब शासन से निर्माण के लिए धनराशि मिली, उसी के अनुसार काम होता रहा। जल्द ही पूरा होने की उम्मीद है।
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- आसरा आवास जिले में चार जगहों पर बनाए गए हैं, जिसमें बदायूं और वजीरगंज में अभी काम प्रगति पर है, जबकि मुड़िया और सैदपुर में काम पूरा हो चुका है। फिलहाल अभी हैंडओवर करने की तैयारी चल रही है। जैसे ही प्रक्रिया पूरी होगी, उसके बाद में आवेदन मांगे जाएंगे।
-देवेश कुमार सिंह, परियोजना अधिकारी डूडा
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बसपा शासनकाल के बाद में जब प्रदेश में सपा की सरकार आई तो उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के ड्रीम प्रोजेक्ट कांशीराम शहरी आवास योजना को बंद कर दिया। साथ ही वर्ष 2015 में गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले शहरी गरीबों को निशुल्क आवास देने के लिए आसरा आवास बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद में नगर पालिका और पंचायतों में भूमि की तलाश की जाने लगी। उस समय बदायूं, वजीरगंज, मुड़िया और सैदपुर में जमीन उपलब्ध हो गई, जिसके बाद में इन जगहों पर योजना की शुरुआत कर दी गई। इसके लिए सी एंड डीएस संस्था को नामित किया गया। इसमें बदायूं नगर पालिका में 17 करोड़ 68 लाख रुपये की लागत से 384 आवासों का निर्माण करना था। वहीं वजीरगंज में 12 करोड़ 76 लाख रुपये से से 276, सैदपुर में नौ करोड़ 60 लाख से 204 और मुड़िया में पांच करोड़ 30 लाख रुपये से 108 आवासों का निर्माण शुरू किया गया, लेकिन आवासों के निर्माण में कार्यदायी संस्था और डूडा के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से योजना तेजी नहीं पकड़ सकी। हालात ये हैं कि पांच साल बाद भी आसरा आवास योजना का किसी भी शहरी गरीब व्यक्ति को लाभ नहीं मिल सका।
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विभाग का दावा- बजट मिलने में देरी बनी वजह
- जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) के परियोजना अधिकारी देवेश कुमार सिंह के अनुसार समय से बजट नहीं मिल पाने की वजह से ये निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका था। जब-जब शासन से निर्माण के लिए धनराशि मिली, उसी के अनुसार काम होता रहा। जल्द ही पूरा होने की उम्मीद है।
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- आसरा आवास जिले में चार जगहों पर बनाए गए हैं, जिसमें बदायूं और वजीरगंज में अभी काम प्रगति पर है, जबकि मुड़िया और सैदपुर में काम पूरा हो चुका है। फिलहाल अभी हैंडओवर करने की तैयारी चल रही है। जैसे ही प्रक्रिया पूरी होगी, उसके बाद में आवेदन मांगे जाएंगे।
-देवेश कुमार सिंह, परियोजना अधिकारी डूडा