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Budaun News: मानदेय मांगना महंगा पड़ा... सफाईकर्मी का अनुबंध निरस्त
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सफाईंं कर्मी नीतू की खबर की पीडीएफ।
उझानी। ब्लॉक क्षेत्र के गांव खजुरारा के सामुदायिक शौचालय में स्वयं सहायता समूह के जरिये सफाई कार्य के लिए नियुक्त नीतू वाल्मीकि को मानदेय को लेकर शिकायत करना महंगा पड़ गया। ग्राम पंचायत के सचिव हालांकि जुलाई में अनुबंध समाप्त कर दिए जाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन नीतू की माने तो उनसे पांच दिन पहले तक काम कराया गया है।
खजुरारा निवासी नीतू पत्नी वीरेंद्र वाल्मीकि ने कुछ महीने पहले डीएम समेत विभागीय अफसरों से 17 महीने का मानदेय अवमुक्त नहीं किए जाने की शिकायत की थी। शिकायत के बाद एडीओ और सचिव ने मौके पर जाकर जांच की थी। नीतू का कहना था कि शिकायत के बाद समूह ने करीब 11 महीने का मानदेय तो अवमुक्त कर दिया, लेकिन सामुदायिक शौचालय के रखरखाव पर खर्च धनराशि का भुगतान नहीं किया।
वह पांच फरवरी तक काम करती रहीं। तीन दिन पहले दूसरी महिला ने खुद को सफाई कर्मी बताते हुए उसे काम पर नहीं आने को कह दिया। इसकी भी शिकायत नीतू ने अफसरों से की।
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इसे संबंध में सचिव नवीन शर्मा पूरा मामला स्वयं सहायता समूह से जुड़ा बता रहे हैं। सचिव के मुताबिक नीतू को हटाने के लिए समूह ने जुलाई में प्रस्ताव पास किया था। उसके आधार पर ही नीतू का अनुबंध समाप्त हुआ है। समूह ने नए अनुबंध पत्र के आधार पर ममता वाल्मीकि को काम पर लगाया है। इधर, नीतू 18 महीनों के दौरान शौचालय के रखरखाव पर खर्च करीब दो लाख रुपये अवमुक्त कराने के लिए पत्र सौंप चुकी हैं। आरोप है कि अनुबंध समाप्त किए जाने के बारे में उन्हें नोटिस भी नहीं दिया गया।
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खजुरारा निवासी नीतू पत्नी वीरेंद्र वाल्मीकि ने कुछ महीने पहले डीएम समेत विभागीय अफसरों से 17 महीने का मानदेय अवमुक्त नहीं किए जाने की शिकायत की थी। शिकायत के बाद एडीओ और सचिव ने मौके पर जाकर जांच की थी। नीतू का कहना था कि शिकायत के बाद समूह ने करीब 11 महीने का मानदेय तो अवमुक्त कर दिया, लेकिन सामुदायिक शौचालय के रखरखाव पर खर्च धनराशि का भुगतान नहीं किया।
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वह पांच फरवरी तक काम करती रहीं। तीन दिन पहले दूसरी महिला ने खुद को सफाई कर्मी बताते हुए उसे काम पर नहीं आने को कह दिया। इसकी भी शिकायत नीतू ने अफसरों से की।
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इसे संबंध में सचिव नवीन शर्मा पूरा मामला स्वयं सहायता समूह से जुड़ा बता रहे हैं। सचिव के मुताबिक नीतू को हटाने के लिए समूह ने जुलाई में प्रस्ताव पास किया था। उसके आधार पर ही नीतू का अनुबंध समाप्त हुआ है। समूह ने नए अनुबंध पत्र के आधार पर ममता वाल्मीकि को काम पर लगाया है। इधर, नीतू 18 महीनों के दौरान शौचालय के रखरखाव पर खर्च करीब दो लाख रुपये अवमुक्त कराने के लिए पत्र सौंप चुकी हैं। आरोप है कि अनुबंध समाप्त किए जाने के बारे में उन्हें नोटिस भी नहीं दिया गया।