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मदरसों की आमदनी और खर्चों का मांगा हिसाब
बदायूं।
Updated Fri, 19 Feb 2016 08:28 PM IST
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ज्ञापन में कहा गया कि देश के संविधान के अनुच्छेद 19 के अंतर्गत अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार दिया गया है, जिसमें कुछ युक्ति युक्त पाबंदी लगाने का भी संसद को अधिकार है, किंतु देश में अभिव्यक्ति की आजादी का खुलकर दुरुपयोग किया जा रहा है। जेएनयू में घटी घटना इसका ताजा उदाहरण है। वोट की राजनीति के लिए कुछ लोग देश को दांव पर लगा रहे हैं। हमें पाकिस्तान जैसे देश से सीख लेनी चाहिए। पाकिस्तान के पेशावर के सैन्य स्कूल पर आतंकी हमले के बाद 182 मदरसे सील कर दिए गए। पंजाब, सिंध और खैबर पख्तून खां प्रांत में आतंकवाद को बढ़ावा देने के कारण मदरसों पर कार्रवाई की गई, जबकि भारत में ऐसा नहीं हो रहा। ज्ञापन में कहा गया कि आतंकवादियों का कोई धर्म नाहीं होता है। आरोप लगाया कि आतंकवाद के लिए शिक्षा संस्थानों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में भारत में चल रहे मदरसों को सूचीबद्ध किया जाए। उनमें जारी गतिविधियों की निगरानी के लिए एक तंत्र विकसित किया जाना जरूरी है। भारत में विदेशों से जो पैसा मदरसों के लिए आता है, उसका हिसाब रखा जाए। जिन मदरसों को विदेशों से धन प्राप्त होता है और उसका दुरुपयोग हो रहा है तो ऐसे मदरसों को सील किया जाए। ज्ञापन देने वालों में ओम शंखधार, आशु राठौर, अरविंद परमार, अर्जुन कश्यप, आशीष कुमार, गोपाल, महेश चंद्र, बलवीर सिंह, श्याम ठाकुर आदि थे।
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