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छठ पूजा: उगते सूर्य को दिया अर्घ्य
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बदायूं। छठ पूजा के अंतिम दिन सोमवार को व्रती महिलाओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य दिया और परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए कामना की। गंगाजल पीकर उन्होेंने उपवास खोला। महिलाओं ने 36 घंटे से व्रत रखा हुआ था।
छठ पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से हुई। दूसरे दिन खरना हुआ। इसके साथ ही महिलाओं को 36 घंटे का उपवास शुरू हो गया। तीसरे दिन रविवार की शाम व्रती महिलाओं ने कछला गंगाघाट पर पहुंचकर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया। सोमवार सुबह महिलाओं ने फिर से कछला गंगाघाट पर पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व को संपन्न किया।
गुड़िया देवी ने बताया कि पुराणों में कहा गया है कि षष्ठी देवी यानी छठी मइया ब्रह्माजी की मानस पुत्री हैं, जिनका नाम देवसेना है। देवसेना का विवाह भगवान शिव के बड़े पुत्र कार्तिकेय के साथ हुआ था। स्कंद कुमार कार्तिकेय का दूसरा नाम है। कार्तिकेय के साथ अंक छह का बहुत ही अद्भुत संयोग है। उनका जन्म षष्ठी तिथि को हुआ था। उनके मुख भी छह हैं। इनका पालन पोषण भी छह कृतिकाओं ने मिलकर किया है। इससे इनकी माता की संख्या भी मानी जाती है। यही वजह है कि छठ पूजा से कुमार कार्तिकेय प्रसन्न होते हैं। इसलिए यह पूजा की जाती है।
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छठ पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से हुई। दूसरे दिन खरना हुआ। इसके साथ ही महिलाओं को 36 घंटे का उपवास शुरू हो गया। तीसरे दिन रविवार की शाम व्रती महिलाओं ने कछला गंगाघाट पर पहुंचकर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया। सोमवार सुबह महिलाओं ने फिर से कछला गंगाघाट पर पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व को संपन्न किया।
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गुड़िया देवी ने बताया कि पुराणों में कहा गया है कि षष्ठी देवी यानी छठी मइया ब्रह्माजी की मानस पुत्री हैं, जिनका नाम देवसेना है। देवसेना का विवाह भगवान शिव के बड़े पुत्र कार्तिकेय के साथ हुआ था। स्कंद कुमार कार्तिकेय का दूसरा नाम है। कार्तिकेय के साथ अंक छह का बहुत ही अद्भुत संयोग है। उनका जन्म षष्ठी तिथि को हुआ था। उनके मुख भी छह हैं। इनका पालन पोषण भी छह कृतिकाओं ने मिलकर किया है। इससे इनकी माता की संख्या भी मानी जाती है। यही वजह है कि छठ पूजा से कुमार कार्तिकेय प्रसन्न होते हैं। इसलिए यह पूजा की जाती है।

कछला घाट पर छट पर शाम को गन्ने की पूजा करती महिलाऐं। संवाद- फोटो : BADAUN
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