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‘सृष्टि के निर्माण में निर्णायक रही है नारी, खुद को न समझें कमजोर’
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बिल्सी के श्री महेश बाल विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में अपराजिता के तहत हुए कार्यक्रम को संबोधित करत?
- फोटो : BADAUN
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बिल्सी। एनएमएसएन दास कॉलेज के वाणिज्य विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. एमएस अग्रवाल ने कहा कि आज समाज में पुरुषों से किसी भी क्षेत्र में महिलाएं कम नहीं हैं। अपने फैसले लेने के लिए महिलाओं को स्वतंत्र होना चाहिए, यही नारी सशक्तीकरण है। हमारी संस्कृति में नारी हमेशा से सृष्टि के निर्माण में निर्णायक की भूमिका में रही है, वह कहीं से कमजोर नहीं है।
बृहस्पतिवार को अमर उजाला फाउंडेशन के ‘अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स’ अभियान के तहत कछला रोड स्थित श्री महेश बाल विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि डॉ. अग्रवाल ने कहा कि आधुनिक काल में महिलाओं की दशा में काफी सुधार हुआ है, लेकिन अफसोस की बात है कि कुछ जगह अब भी महिलाओं और पुरुषों में अंतर समझा जाता है। बेटों के जन्म पर जहां खुशियां मनाई जाती हैं, वहीं बेटी का जन्म होने पर मातम जैसा माहौल हो जाता है।
उन्होंने कहा कि वैदिक काल में नारियों को पूजनीय समझा जाता था, वही स्थिति फिर से लाने की जरूरत है। उन्होंने छात्राओं को परिस्थितियों से डरकर नहीं बल्कि डटकर उनका सामना करने और जीवन में कुछ ऐसा करने की सलाह दी कि लोग उसका उदाहरण दें।
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प्रधानाचार्य डॉ.रोहिताश कुमार ने कहा कि आज समाज की सोच बदलनी जरूरी है। बेटियों पर बचपन से ही पाबंदियां लगाई जाती हैं, जबकि बेटों को खुली छूट दे दी जाती है। समाज की इस दोहरी मानसिकता में बदलाव आए तो नारी को अपराजिता बनने से कोई नही रोक सकता। इस मौके पर आलोक कुमार सक्सेना, कुटुमा देवी, नरेश चंद्र, निर्दोष कुमार, ध्रुवराज सिंह, सुमित सक्सेना आदि मौजूद रहे।
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सामाजिक कार्यों में भी भागीदारी आवश्यक
मुख्य अतिथि डॉ. अग्रवाल ने जहां छात्राओं को खुद के भीतर आत्मविश्वास जगाने के लिए प्रेरित किया वहीं अमर उजाला के अपराजिता अभियान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि आज सामाजिक कार्यों में भी भागीदारी आवश्यक है और अमर उजाला निष्पक्ष पत्रकारिता के साथ यह दायित्व भी बखूबी निभा रहा है।
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बृहस्पतिवार को अमर उजाला फाउंडेशन के ‘अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स’ अभियान के तहत कछला रोड स्थित श्री महेश बाल विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि डॉ. अग्रवाल ने कहा कि आधुनिक काल में महिलाओं की दशा में काफी सुधार हुआ है, लेकिन अफसोस की बात है कि कुछ जगह अब भी महिलाओं और पुरुषों में अंतर समझा जाता है। बेटों के जन्म पर जहां खुशियां मनाई जाती हैं, वहीं बेटी का जन्म होने पर मातम जैसा माहौल हो जाता है।
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उन्होंने कहा कि वैदिक काल में नारियों को पूजनीय समझा जाता था, वही स्थिति फिर से लाने की जरूरत है। उन्होंने छात्राओं को परिस्थितियों से डरकर नहीं बल्कि डटकर उनका सामना करने और जीवन में कुछ ऐसा करने की सलाह दी कि लोग उसका उदाहरण दें।
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प्रधानाचार्य डॉ.रोहिताश कुमार ने कहा कि आज समाज की सोच बदलनी जरूरी है। बेटियों पर बचपन से ही पाबंदियां लगाई जाती हैं, जबकि बेटों को खुली छूट दे दी जाती है। समाज की इस दोहरी मानसिकता में बदलाव आए तो नारी को अपराजिता बनने से कोई नही रोक सकता। इस मौके पर आलोक कुमार सक्सेना, कुटुमा देवी, नरेश चंद्र, निर्दोष कुमार, ध्रुवराज सिंह, सुमित सक्सेना आदि मौजूद रहे।
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सामाजिक कार्यों में भी भागीदारी आवश्यक
मुख्य अतिथि डॉ. अग्रवाल ने जहां छात्राओं को खुद के भीतर आत्मविश्वास जगाने के लिए प्रेरित किया वहीं अमर उजाला के अपराजिता अभियान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि आज सामाजिक कार्यों में भी भागीदारी आवश्यक है और अमर उजाला निष्पक्ष पत्रकारिता के साथ यह दायित्व भी बखूबी निभा रहा है।