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महिला अपराध के मामलों में त्वरित कार्रवाई, जल्द हो न्याय
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बदायूं। हाथरस में युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म और दरिंदगी के बाद महिला सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। समाज में महिलाओं की स्थिति और महिलाओं के प्रति मानसिकता को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं। हाथरस की दुष्कर्म पीड़िता की मौत और उसके बाद सामने आई पीड़ित की मेडिकल रिपोर्ट को लेकर हर कोई हैरान है। युवती के साथ दरिंदगी करने वालों को सख्त सजा की मांग की जा रही है। इसके साथ ही इस बात पर भी जोर दिया जा रहा है कि महिलाएं अपनी सुरक्षा के प्रति न केवल सजग रहें बल्कि खुद को आत्मनिर्भर बनाएं। गिंदो देवी महिला महाविद्यालय की एनएसएस इकाई की छात्राओं से हाथरस कांड को लेकर बात की गई तो उन्होंने कहा कि फिर एक निर्भया की मौत ने हमें झकझोर दिया है। लेकिन अगर महिलाओं के प्रति विकृत मानसिकता रखने वालों को ऐसा लगता है कि महिलाएं ऐसी घटनाओं से डर जाएंगी तो वे गलत हैं। हम लड़ते रहेंगे। बस ऐसे मामलों में न्याय में देरी नहीं होनी चाहिए।
शर्मनाक घटना, न्याय में देरी न हो
महिला सुरक्षा के तमाम दावे किए जाते हैं। इसके बावजूद इस तरह की दरिंदगी के मामले सामने आते हैं। हाथरस कांड कोई पहला मामला नहीं है। सरकार को चाहिए कि न्याय में देरी न हो। महिला अपराध से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई और शीघ्रता से न्याय मिले तो ऐसी घटनाओं पर अंकुश लग सकता है। महिलाओं को भी चाहिए कि वह हार न मानें, अपराध और अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करें।
- पल्लवी देवी, छात्रा बीए प्रथम वर्ष
झकझोर देने वाली घटना
हाथरस में युवती के साथ जो भी हुआ वह झकझोर देने वाला है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो कार्रवाई में तत्परता न हीं दिखाई गई। ऐसा नहीं होना चाहिए था। युवती से दरिंदगी के बाद उसको बेरहमी से पीटा गया। ऐसे मामलों में ठोस और जल्द कार्रवाई होनी चाहिए ताकि समाज को एक संदेश जाए। अक्सर कार्रवाई में देरी से ही दुष्कर्मियों के हौंसले बढ़ते हैं। ऐसे में इस तरह के अपराधों पर अंकुश नहीं लग पाता।
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- पलक वर्मा, छात्रा बीए प्रथम वर्ष
15 दिन तक मौत से लड़ती रही पीड़िता
हाथरस की पीड़िता 15 दिन तक मौत से लड़ती रही। उसके शरीर की कई हड्डी भी तोड़ दी गई थीं। मामले में तत्कालिक कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार किया जाना था। दरिंदगी के इस मामले में भी पुलिस ने पुराना रवैया ही अख्तियार किया। युवती केे मौत के बाद जब लोगों का गुस्सा सामने आया तो कार्रवाई की गई। महिलाओं को भी चाहिए कि वह बिना डरे अपराधियों का मुकाबला करें।
- चांदनी कश्यप, छात्रा बीए तृतीय वर्ष
विकृत मानसिकता दर्शाने वाली घटना
हाथरस में युवती के साथ जो हुआ वह विकृत मानसिकता का उदाहरण है। भारतीय संस्कृति में महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता है। इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं समाज को कलंकित करने का काम करती हैं। खासतौर पर ऐसे मामलों में किसी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। सभी का पूरा ध्यान आरोपियों को सख्त सजा दिलाने पर होना चाहिए। तभी ऐसी घटनाएं रुकेंगी।
- काजल, छात्रा बीए तृतीय वर्ष
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शर्मनाक घटना, न्याय में देरी न हो
महिला सुरक्षा के तमाम दावे किए जाते हैं। इसके बावजूद इस तरह की दरिंदगी के मामले सामने आते हैं। हाथरस कांड कोई पहला मामला नहीं है। सरकार को चाहिए कि न्याय में देरी न हो। महिला अपराध से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई और शीघ्रता से न्याय मिले तो ऐसी घटनाओं पर अंकुश लग सकता है। महिलाओं को भी चाहिए कि वह हार न मानें, अपराध और अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करें।
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- पल्लवी देवी, छात्रा बीए प्रथम वर्ष
झकझोर देने वाली घटना
हाथरस में युवती के साथ जो भी हुआ वह झकझोर देने वाला है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो कार्रवाई में तत्परता न हीं दिखाई गई। ऐसा नहीं होना चाहिए था। युवती से दरिंदगी के बाद उसको बेरहमी से पीटा गया। ऐसे मामलों में ठोस और जल्द कार्रवाई होनी चाहिए ताकि समाज को एक संदेश जाए। अक्सर कार्रवाई में देरी से ही दुष्कर्मियों के हौंसले बढ़ते हैं। ऐसे में इस तरह के अपराधों पर अंकुश नहीं लग पाता।
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- पलक वर्मा, छात्रा बीए प्रथम वर्ष
15 दिन तक मौत से लड़ती रही पीड़िता
हाथरस की पीड़िता 15 दिन तक मौत से लड़ती रही। उसके शरीर की कई हड्डी भी तोड़ दी गई थीं। मामले में तत्कालिक कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार किया जाना था। दरिंदगी के इस मामले में भी पुलिस ने पुराना रवैया ही अख्तियार किया। युवती केे मौत के बाद जब लोगों का गुस्सा सामने आया तो कार्रवाई की गई। महिलाओं को भी चाहिए कि वह बिना डरे अपराधियों का मुकाबला करें।
- चांदनी कश्यप, छात्रा बीए तृतीय वर्ष
विकृत मानसिकता दर्शाने वाली घटना
हाथरस में युवती के साथ जो हुआ वह विकृत मानसिकता का उदाहरण है। भारतीय संस्कृति में महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता है। इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं समाज को कलंकित करने का काम करती हैं। खासतौर पर ऐसे मामलों में किसी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। सभी का पूरा ध्यान आरोपियों को सख्त सजा दिलाने पर होना चाहिए। तभी ऐसी घटनाएं रुकेंगी।
- काजल, छात्रा बीए तृतीय वर्ष