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‘प्रेम से मनाएं त्योहार, तो दोगुना होगा आनंद’
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कादरचौक (बदायूं)। अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स के तहत गुरुवार को दाताराम मेमोरियल इंटर कॉलेज असरासी ललुआनगला में ‘घर ही नहीं, त्योहार पर मन भी रखें साफ’ विषय पर एक कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस दौरान छात्राओं को घर में साफ-सफाई से लेकर आपसी प्रेम और सौहार्द बनाए रखने को प्रेरित किया गया। उन्हें समझाया गया कि परिवार में त्याग और आदर की भावना हो तो त्योहार का आनंद दोगुना हो जाता है।
गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बीसीपीएम (ब्लॉक कम्यूनिटी प्रोसेस मैनेजर) संजीव भारद्वाज ने कहा कि मन को पवित्र बनाने के साधन लोगों के घर में हैं। सुबह सूर्य निकलने से पहले उठें। प्रात: नित्यक्रिया से निवृत्त होकर थोड़ी देर स्वच्छ वायु का सेवन करें। दिन में ऐसे कार्य करें, जिससे किसी को कष्ट न पहुंचे। उन्होंने कहा कि त्योहार पर आपसी प्रेम को बनाए रखना बहुत जरूरी है।
विशिष्ट अतिथि राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक डॉ. जुगलकिशोर ने कहा कि मन की शांति के लिए क्रोध पर नियंत्रण रखें। मन को एकाग्रचित्त रखने से सभी कार्य पूर्ण होते हैं। त्योहारों पर जिस तरह हम अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, वैसे ही हमें अपने मन के विचारों की गंदगी को बाहर फेंक देना चाहिए।
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इससे पूर्व मुख्य अतिथि और कॉलेज व्यवस्थापक माधव सिंह ने दीप प्रज्ज्वलन किया। इस मौके पर अशोक कुमार शाक्य, संगीता, निशा, अहिवरन सिंह, अमित कुमार भारती, हरविलास, जुगेंद्र पाल, अवनेश कुमार, भानु प्रताप सिंह, राजीव कुमार, वीर सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन प्रधानाचार्य अजब सिंह ने किया।
बड़ों का करें आदर, अपनों को रखें खुश
अपने मन को पवित्र बनाने के लिए हमें बड़ों का आदर और सम्मान करना चाहिए। उन्हें खुश रखना चाहिए। तभी हमें खुशी मिलती है। हम कोई ऐसा कार्य न करें, जिससे अपनों को दुख पहुंचे। भौतिक संसाधनों से दूर आत्मनिर्भर बनें।
-साक्षी पाराशरी
बेकार की आदतें छोड़ें
कुछ लोग मन की शांति के लिए नशे का सेवन करने लगते हैं। बीड़ी, तंबाकू, शराब का सेवन करते हैं। इससे लोग बीमार होने लगते हैं। उन्हें तमाम बीमारियां घेर लेती हैं। इससे उनका शरीर नष्ट होता है। पैसा बर्बाद होता है और मन की पवित्रता खत्म होती है। त्योहारों पर तो इसका खास ख्याल रखें।
-निकिता पाठक
-रोज करें योग, बने रहेंगे निरोग
मन की पवित्रता बनाए रखने और शरीर को बीमारियों से बचाने के लिए योग सबसे अच्छा और सुलभ साधन है। लोगों को रोजाना सुबह उठकर योग करना चाहिए। मन की गंदगी को दूर करें। खेलों को बढ़ावा दें। इससे चुस्ती फुर्ती भी आएगी।
लवली
अनचाहे विचारों को त्यागें
-व्यक्ति की सुंदरता और पवित्रता उसके विचारों पर निर्भर करती है। कभी अपने ऊपर गंदे विचारों को हावी न होने दें। हमेशा बड़ों का आदर करें और उनका सम्मान करें। किसी के प्रति गलत विचार न लाएं। त्योहारों को भी हंसी खुशी से मनाएं।
-पूजा
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गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बीसीपीएम (ब्लॉक कम्यूनिटी प्रोसेस मैनेजर) संजीव भारद्वाज ने कहा कि मन को पवित्र बनाने के साधन लोगों के घर में हैं। सुबह सूर्य निकलने से पहले उठें। प्रात: नित्यक्रिया से निवृत्त होकर थोड़ी देर स्वच्छ वायु का सेवन करें। दिन में ऐसे कार्य करें, जिससे किसी को कष्ट न पहुंचे। उन्होंने कहा कि त्योहार पर आपसी प्रेम को बनाए रखना बहुत जरूरी है।
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विशिष्ट अतिथि राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक डॉ. जुगलकिशोर ने कहा कि मन की शांति के लिए क्रोध पर नियंत्रण रखें। मन को एकाग्रचित्त रखने से सभी कार्य पूर्ण होते हैं। त्योहारों पर जिस तरह हम अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, वैसे ही हमें अपने मन के विचारों की गंदगी को बाहर फेंक देना चाहिए।
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इससे पूर्व मुख्य अतिथि और कॉलेज व्यवस्थापक माधव सिंह ने दीप प्रज्ज्वलन किया। इस मौके पर अशोक कुमार शाक्य, संगीता, निशा, अहिवरन सिंह, अमित कुमार भारती, हरविलास, जुगेंद्र पाल, अवनेश कुमार, भानु प्रताप सिंह, राजीव कुमार, वीर सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन प्रधानाचार्य अजब सिंह ने किया।
बड़ों का करें आदर, अपनों को रखें खुश
अपने मन को पवित्र बनाने के लिए हमें बड़ों का आदर और सम्मान करना चाहिए। उन्हें खुश रखना चाहिए। तभी हमें खुशी मिलती है। हम कोई ऐसा कार्य न करें, जिससे अपनों को दुख पहुंचे। भौतिक संसाधनों से दूर आत्मनिर्भर बनें।
-साक्षी पाराशरी
बेकार की आदतें छोड़ें
कुछ लोग मन की शांति के लिए नशे का सेवन करने लगते हैं। बीड़ी, तंबाकू, शराब का सेवन करते हैं। इससे लोग बीमार होने लगते हैं। उन्हें तमाम बीमारियां घेर लेती हैं। इससे उनका शरीर नष्ट होता है। पैसा बर्बाद होता है और मन की पवित्रता खत्म होती है। त्योहारों पर तो इसका खास ख्याल रखें।
-निकिता पाठक
-रोज करें योग, बने रहेंगे निरोग
मन की पवित्रता बनाए रखने और शरीर को बीमारियों से बचाने के लिए योग सबसे अच्छा और सुलभ साधन है। लोगों को रोजाना सुबह उठकर योग करना चाहिए। मन की गंदगी को दूर करें। खेलों को बढ़ावा दें। इससे चुस्ती फुर्ती भी आएगी।
लवली
अनचाहे विचारों को त्यागें
-व्यक्ति की सुंदरता और पवित्रता उसके विचारों पर निर्भर करती है। कभी अपने ऊपर गंदे विचारों को हावी न होने दें। हमेशा बड़ों का आदर करें और उनका सम्मान करें। किसी के प्रति गलत विचार न लाएं। त्योहारों को भी हंसी खुशी से मनाएं।
-पूजा