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...और रिया को मिल गया पढ़ाई का ठिकाना
बदायूं, ब्यूरो
Updated Mon, 21 Mar 2016 11:12 PM IST
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सहारा
- फोटो : अमर उजाला
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मां ने कर ली दूसरी शादी, नाना-नानी ने कर दिया था पढ़ाने से इंकार
गंगाराम पटेल स्कूल ने उठाया रिया को पढ़ाने का बीड़ा
बचपन में ही पिता की मृत्यु के बाद मां ने उससे मुंह फेर लिया। सबके होते हुए भी अनाथ जैसा जीवन बिताने को मजबूर मासूम रिया को गंगाराम पटेल स्कूल की प्रधानाचार्या मंजू दीक्षित ने सहारा दिया है। मंजू रिया के जीवन में किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं।
लगभग तीन वर्ष पहले अचानक पिता की मौत के बाद रिया की मासूमियत को ग्रहण लग गया। उसका मां ने कुछ दिनों मेहनत मजदूरी की, लेकिन लंबे जीवन और सामाजिक कठिनाइयों के चलते गांव के ही एक व्यक्ति के साथ दूसरी शादी कर ली। शादी होने के बाद रिया की मां ने उसे अपने माता-पिता के घर मचलई भेज दिया। जहां पर रिया के नाना-नानी ने उसे अपने पास रख तो लिया, लेकिन आर्थिक तंगी से जूझ रहे अपने परिवार की दशा को बेटी के सामने नहीं रखा। नाना-नानी के पास रह रही रिया शिक्षा से अछूती रह गई। प्रधानाचार्या मंजू मिश्रा को विद्यालय के ही कुछ बच्चों ने रिया के बारे में बताया, तो वे उससे मिलने जा पहुंची। अगले दिन वे रिया को स्कूल लेकर पहुंची और प्रबंधक सुरजीत सिंह से रिया का विद्यालय में दाखिला देने की बात कही। प्रबंधक ने भी उसकी पढ़ाई कराने की हामी भर दी। अब रिया की पढ़ाई का खर्चा स्कूल प्रबंधन और मंजू सिंह के जिम्मे है। उनके इस प्रयास की स्कूल स्टाफ ने प्रशंसा की है।
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गंगाराम पटेल स्कूल ने उठाया रिया को पढ़ाने का बीड़ा
बचपन में ही पिता की मृत्यु के बाद मां ने उससे मुंह फेर लिया। सबके होते हुए भी अनाथ जैसा जीवन बिताने को मजबूर मासूम रिया को गंगाराम पटेल स्कूल की प्रधानाचार्या मंजू दीक्षित ने सहारा दिया है। मंजू रिया के जीवन में किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं।
लगभग तीन वर्ष पहले अचानक पिता की मौत के बाद रिया की मासूमियत को ग्रहण लग गया। उसका मां ने कुछ दिनों मेहनत मजदूरी की, लेकिन लंबे जीवन और सामाजिक कठिनाइयों के चलते गांव के ही एक व्यक्ति के साथ दूसरी शादी कर ली। शादी होने के बाद रिया की मां ने उसे अपने माता-पिता के घर मचलई भेज दिया। जहां पर रिया के नाना-नानी ने उसे अपने पास रख तो लिया, लेकिन आर्थिक तंगी से जूझ रहे अपने परिवार की दशा को बेटी के सामने नहीं रखा। नाना-नानी के पास रह रही रिया शिक्षा से अछूती रह गई। प्रधानाचार्या मंजू मिश्रा को विद्यालय के ही कुछ बच्चों ने रिया के बारे में बताया, तो वे उससे मिलने जा पहुंची। अगले दिन वे रिया को स्कूल लेकर पहुंची और प्रबंधक सुरजीत सिंह से रिया का विद्यालय में दाखिला देने की बात कही। प्रबंधक ने भी उसकी पढ़ाई कराने की हामी भर दी। अब रिया की पढ़ाई का खर्चा स्कूल प्रबंधन और मंजू सिंह के जिम्मे है। उनके इस प्रयास की स्कूल स्टाफ ने प्रशंसा की है।
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