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Budaun News: बिना पंजीकरण चल रही थी नकली गुटखा-पान मसाला निर्माण इकाई
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बदायूं के आवास विकास में स्थित आवास। संवाद
बदायूं। सपा के जिला कोषाध्यक्ष व कारोबारी रचित गुप्ता पर सेंट्रल जीएसटी ने बड़ी कार्रवाई की है। बदायूं और दातागंज स्थित रचित के ठिकानों पर हुई छापेमारी की जांच में 218.40 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी का खुलासा हुआ है। रचित बेखौफ नकली गुटखा-पान मसाला बनाने का कारोबार कर रहा था। स्थानीय जीएसटी और जिला प्रशासन के अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं थी।
सपा नेता रचित बिना वैध पंजीकरण के पान मसाला और गुटखा निर्माण का कारोबार बेखौफ कर रहा था। फरवरी से जून 2026 के बीच सरकार को सूचना दिए बिना 12 एफएफएस मशीनें लगाईं और बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू कर दिया। सेंट्रल जीएसटी की प्रारंभिक जांच में विभाग ने करीब 218.40 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का आकलन किया है।
छापेमारी के दौरान टीम ने परिसर से लगभग 410 किलोग्राम कटी हुई सुपारी के अलावा गगन, शिखर, गोल्ड मोहर और दिलबाग ब्रांड के भारी मात्रा में तैयार पाउच और पैकिंग सामग्री बरामद की थी। अधिकारियों ने मशीनों, स्टॉक और दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह भी पता लगा रहे हैं कि निर्माण में प्रयुक्त कच्चा माल कहां से आता था और तैयार माल किन-किन जिलों तथा कारोबारियों तक पहुंचाया जाता था। सेंट्रल जीएसटी की मेरठ कमिश्नरेट की विशेष टीम ने बीते मंगलवार की देर शाम छापेमारी शुरू कर बुधवार सुबह तक जांच की थी।
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चाय पत्ती के कारोबार की आड़ में चल रहा था नकली गुटखा-पान मसाले का धंधा
सूत्रों के अनुसार, जांच अब केवल फैक्टरी तक सीमित नहीं रहेगी। जीएसटी अधिकारियों को कुछ संदिग्ध बैंक खातों की भी जानकारी मिली है, जिनके माध्यम से बड़े पैमाने पर लेन-देन होने की आशंका है। इन खातों की विस्तृत जांच की जाएगी ताकि पूरे वित्तीय नेटवर्क और कथित कर चोरी की शृंखला का पता लगाया जा सके। जीएसटी अधिकारियों को आशंका है कि इस नेटवर्क के तार प्रदेश के कई जिलों तक फैले हो सकते हैं। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि रचित गुप्ता के पास चाय पत्ती के कारोबार का लाइसेंस था। विभाग यह जांच कर रहा कि कहीं इसी लाइसेंस की आड़ में पान मसाला और गुटखा निर्माण का अवैध कारोबार तो नहीं संचालित किया जा रहा था। जांच पूरी होने के बाद कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
कहां-कहां होती थी सप्लाई, अब बनेगी पूरी चेन की कुंडली
सेंट्रल जीएसटी की जांच सप्लाई नेटवर्क पर केंद्रित है। अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि फैक्टरी में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल किन कारोबारियों से खरीदा जाता था और तैयार गुटखा व पान मसाला किन डीलरों, थोक विक्रेताओं और बाजारों तक पहुंचाया जाता था, यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
बेनामी बैंक खातों की होगी फॉरेंसिक जांच
छापेमारी के दौरान मिले कुछ बैंक खातों और वित्तीय दस्तावेजों को जांच एजेंसियां अपने साथ ले गईं। अधिकारियों को संदेह है कि इन खातों के जरिए कारोबार से जुड़े वित्तीय लेन-देन किए गए। अब इन खातों की बैंकिंग हिस्ट्री, लेन-देन और लाभार्थियों की विस्तृत जांच होगी। इससे पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है।
14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए तीनों आरोपी
जीएसटी अधिकारियों ने कार्रवाई पूरी होने के बाद रचित गुप्ता, मनोज साहू और उमेश को मेरठ ले जाकर न्यायालय में पेश किया। गौतमबुद्धनगर में दर्ज मुकदमे के आधार पर अदालत ने तीनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
राजनीतिक सफर भी चर्चा में
रचित गुप्ता के बाबा धर्मपाल वैश्य दशकों तक कांग्रेस से जुड़े रहे। दातागंज नगर पालिका के चेयरमैन भी रहे। इसके बाद परिवार का कोई सदस्य सक्रिय राजनीति में नहीं रहा। वर्ष 2022 में रचित गुप्ता ने बसपा के टिकट पर दातागंज विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुए और हाल ही में उन्हें जिला संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली थी। अब जीएसटी की इस बड़ी कार्रवाई के बाद उनका नाम एक बार फिर सुर्खियों में है।
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सपा नेता रचित बिना वैध पंजीकरण के पान मसाला और गुटखा निर्माण का कारोबार बेखौफ कर रहा था। फरवरी से जून 2026 के बीच सरकार को सूचना दिए बिना 12 एफएफएस मशीनें लगाईं और बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू कर दिया। सेंट्रल जीएसटी की प्रारंभिक जांच में विभाग ने करीब 218.40 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का आकलन किया है।
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छापेमारी के दौरान टीम ने परिसर से लगभग 410 किलोग्राम कटी हुई सुपारी के अलावा गगन, शिखर, गोल्ड मोहर और दिलबाग ब्रांड के भारी मात्रा में तैयार पाउच और पैकिंग सामग्री बरामद की थी। अधिकारियों ने मशीनों, स्टॉक और दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह भी पता लगा रहे हैं कि निर्माण में प्रयुक्त कच्चा माल कहां से आता था और तैयार माल किन-किन जिलों तथा कारोबारियों तक पहुंचाया जाता था। सेंट्रल जीएसटी की मेरठ कमिश्नरेट की विशेष टीम ने बीते मंगलवार की देर शाम छापेमारी शुरू कर बुधवार सुबह तक जांच की थी।
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चाय पत्ती के कारोबार की आड़ में चल रहा था नकली गुटखा-पान मसाले का धंधा
सूत्रों के अनुसार, जांच अब केवल फैक्टरी तक सीमित नहीं रहेगी। जीएसटी अधिकारियों को कुछ संदिग्ध बैंक खातों की भी जानकारी मिली है, जिनके माध्यम से बड़े पैमाने पर लेन-देन होने की आशंका है। इन खातों की विस्तृत जांच की जाएगी ताकि पूरे वित्तीय नेटवर्क और कथित कर चोरी की शृंखला का पता लगाया जा सके। जीएसटी अधिकारियों को आशंका है कि इस नेटवर्क के तार प्रदेश के कई जिलों तक फैले हो सकते हैं। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि रचित गुप्ता के पास चाय पत्ती के कारोबार का लाइसेंस था। विभाग यह जांच कर रहा कि कहीं इसी लाइसेंस की आड़ में पान मसाला और गुटखा निर्माण का अवैध कारोबार तो नहीं संचालित किया जा रहा था। जांच पूरी होने के बाद कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
कहां-कहां होती थी सप्लाई, अब बनेगी पूरी चेन की कुंडली
सेंट्रल जीएसटी की जांच सप्लाई नेटवर्क पर केंद्रित है। अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि फैक्टरी में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल किन कारोबारियों से खरीदा जाता था और तैयार गुटखा व पान मसाला किन डीलरों, थोक विक्रेताओं और बाजारों तक पहुंचाया जाता था, यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
बेनामी बैंक खातों की होगी फॉरेंसिक जांच
छापेमारी के दौरान मिले कुछ बैंक खातों और वित्तीय दस्तावेजों को जांच एजेंसियां अपने साथ ले गईं। अधिकारियों को संदेह है कि इन खातों के जरिए कारोबार से जुड़े वित्तीय लेन-देन किए गए। अब इन खातों की बैंकिंग हिस्ट्री, लेन-देन और लाभार्थियों की विस्तृत जांच होगी। इससे पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है।
14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए तीनों आरोपी
जीएसटी अधिकारियों ने कार्रवाई पूरी होने के बाद रचित गुप्ता, मनोज साहू और उमेश को मेरठ ले जाकर न्यायालय में पेश किया। गौतमबुद्धनगर में दर्ज मुकदमे के आधार पर अदालत ने तीनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
राजनीतिक सफर भी चर्चा में
रचित गुप्ता के बाबा धर्मपाल वैश्य दशकों तक कांग्रेस से जुड़े रहे। दातागंज नगर पालिका के चेयरमैन भी रहे। इसके बाद परिवार का कोई सदस्य सक्रिय राजनीति में नहीं रहा। वर्ष 2022 में रचित गुप्ता ने बसपा के टिकट पर दातागंज विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुए और हाल ही में उन्हें जिला संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली थी। अब जीएसटी की इस बड़ी कार्रवाई के बाद उनका नाम एक बार फिर सुर्खियों में है।

बदायूं के आवास विकास में स्थित आवास। संवाद