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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Already wounded by his children's indifference, Vidyasagar's heart was further shattered by a gunshot.

Budaun News: औलाद की बेरुखी से पहले से छलनी सीने को विद्यासागर ने गोली से भी किया छलनी

Mon, 12 Jan 2026 01:41 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 12 Jan 2026 01:41 AM IST
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Already wounded by his children's indifference, Vidyasagar's heart was further shattered by a gunshot.
विद्यासागर रस्तोगी का फाइल फोटो।
बदायूं। सैदपुर के मोहल्ला महेश चौक के रहने वाले 92 साल के विद्यासागर रस्तोगी का सीना उनके दो बेटों की बेरुखी से पहले से ही छलनी था। उस सीने पर उन्होंने गोली मारकर जख्म को और गहरा करते हुए मोह-माया के बंधन से मुक्ति पा ली। रविवार को उनके शव के पोस्टमॉर्टम से पहले जिला अस्पताल में कराए गए एक्स-रे में 16 छर्रे मिले। इन छर्रों को बड़ी मुश्किल से निकाला जा सका। इसके बाद देर शाम कस्बे में उनके शव का अंतिम संस्कार किया गया।
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विद्यासागर की देखरेख करने वाले भतीजे अंबरीश ने बताया कि उनके ताऊ अपनी बीमारी और बेटों की बेरुखी से परेशान थे। विद्यासागर प्रोस्टेट का ऑपरेशन कराना चाहते थे, मगर यह संभव नहीं हो पा रहा था। विद्यासागर के चार में से दो बेटों और पत्नी का निधन हो चुका है। एक बेटा ब्रजकिशोर दिल्ली में रहता है, जबकि दूसरा नंदकिशोर बरेली में रहकर सराफा का कारोबार करता है। कई वर्ष से विद्यासागर घर में अकेले ही रह रहे थे।
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प्रोस्टेट की वजह से पांच-छह दिन से वह ज्यादा ही परेशान थे। एक डॉक्टर के यहां ले जाकर अंबरीश ने नली डलवा दी थी। इससे खुद को और परेशान मान बैठे विद्यासागर ने शुक्रवार को अंबरीश और पड़ोस के कुछ लोगों से यहां तक कहा था कि उन्हें जहर लाकर दे दो, वह जीना नहीं चाहते। उन्हें बेटे देखने भी नहीं आए, इससे वह ज्यादा परेशान थे। अंबरीश बताते हैं कि दोनों बेटों की सैदपुर में लोगों से ज्यादा बोलचाल भी नहीं थी, इसलिए किसी ने उन्हें बुलाने की हिम्मत भी नहीं की। बस लोगों ने उन्हें समझा दिया था।
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हालांकि लोगों का समझाना नाकाफी था। दिल में दर्द समेटे विद्यासागर ने घर की अलमारी में वर्षों से रखे तमंचे से शुक्रवार रात गोली मारकर खुदकुशी कर ली। रात में घटना का किसी को पता नहीं चल सका। शनिवार सुबह 10 बजे अंबरीश उनके यहां पहुंचे तो कमरा बंद पाया। खिड़की से देखा तो वह जमीन पर पड़े दिखाई दिए। इसके बाद उन्होंने आसपास के लोगों को मौके पर बुलाया। पुलिस ने दिल्ली और बरेली में रह रहे बेटों को फोन कर सूचना दी। वे दोनों कई घंटे बाद आए। इस कारण पोस्टमॉर्टम भी रविवार को हो सका। इससे पहले एक्स-रे में पता चला कि उनके सीने में 16 छर्रे लगे। यह फेफड़ों समेत विभिन्न अंगों में धंसे हुए थे।


पुलिस की नाराजगी के बाद दोनों बेटे पहुंचे
ब्रजकिशोर और नंदकिशोर अंबरीश और मोहल्ले के कई लोगों के बार-बार फोन करने पर जल्दी आते नहीं दिखे तो थाना प्रभारी सुरेंद्र सिंह ने फोन करके नंदकिशोर से बात की। तब भी नंदकिशोर ने ढाई घंटे बाद आने की बात कही तो उन्होंने उलहाना भी दिया। इस पर नंदकिशोर ने यहां तक कह दिया कि उन्हें तो इतना ही समय लगेगा, मोहल्ले वालों को ज्यादा जल्दी है तो वह पोस्टमॉर्टम करा लें।




बेटे ने कहा कि कैंसर की वजह से नहीं करा रहे थे ऑपरेशन

बरेली में रहने वाले बेटे नंदकिशोर ने बताया कि पिता उनके पास ही रहते थे। करीब एक महीने पहले वह सैदपुर में घर आ गए थे। वह लगातार प्रोस्टेट का ऑपरेशन कराने पर जोर दे रहे थे। बरेली के एक निजी अस्पताल में जब उनको भर्ती कराया गया तो पता लगा कि उन्हें कैंसर है, इसलिए ऑपरेशन नहीं हो सकता। कैंसर की बात उन्हें इसलिए नहीं बताई कि वह परेशान हो जाते। चार दिन पहले उन्होंने ऑपरेशन कराने को कहा तो कैंसर वाली बात बता दी थी। इसके बाद वह अवसाद में आ गए। नंदकिशोर बोले, उन्हें यह अहसास नहीं था कि पिताजी इस तरह का कदम भी उठा लेंगे।
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