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गन्ना किसानों ने पांच रुपये की बढ़ोत्तरी को बताया नाकाफी
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बदायूं। अबकी गन्ने का समर्थन केवल पांच रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है। सरकार के इस फैसले से गन्ना किसान खुश नहीं हैं। किसानों का कहना है कि यह तो ऊंट के मुंह में जीरे से भी कम है। उन्होंने गन्ने के दाम कम से कम 20 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने की मांग की है।
सरकार ने कई साल बाद गन्ने के समर्थन मूल्य में पांच रुपये की बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। उधर, गन्ना किसानों का कहना है कि प्रदेश सरकार की ओर से आने वाले चुनाव को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया जा रहा है। इस बात पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया जा रहा है कि पिछले चार साल में महंगाई कहां पहुंच गई। किसानों का कहना है कि सरकार ने गन्ने का जो समर्थन मूल्य बढ़ाया है वो किसी मतलब का नहीं है। प्रदेश सरकार को कम से कम 20 रुपये बढ़ाया जाना चाहिए।
प्रदेश सरकार किसानों का सही ध्यान नहीं रख रही है। उन्हें गन्ना मूल्यों में कम से कम 20 रुपये की बढ़ोतरी करनी चाहिए, लेकिन ऐसा न करके किसानों को मायूस किया है। इससे किसानों के हालात बिगड़ेंगे। - ओमकार सिंह, गुलड़िया
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गन्ने के दाम केवल पांच रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी महंगाई को देखते हुए नाकाफी है। महंगाई ने किसानों से लेकर आम आदमी तक की कमर तोड़ दी है। ऐसे में गन्ने की लागत निकलना मुश्किल है। - अभिषेक पटेल, गुलड़िया
सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात कह रही है, लेकिन गन्ना किसानों को पिछले साल का भुगतान तक नहीं मिला है। सरकार ने गन्ने के नाम में पांच रुपये की बढ़ोतरी कर घाव पर नमक छिड़कने का काम किया है। -कुलदीप चौधरी, मोहम्मद नगर
सरकार केवल किसानों के हितों की बात करती है, लेकिन उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं देती। वर्तमान में किसानों की हालत ज्यादा अच्छी नहीं है। पेट्रोल, डीजल के दामों में बेहताशा बढ़ोतरी हुई। गन्ने पर मात्र पांच रुपये ही बढ़ाए गए। - सौरभ भारद्वाज, सुलरा
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सरकार ने कई साल बाद गन्ने के समर्थन मूल्य में पांच रुपये की बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। उधर, गन्ना किसानों का कहना है कि प्रदेश सरकार की ओर से आने वाले चुनाव को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया जा रहा है। इस बात पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया जा रहा है कि पिछले चार साल में महंगाई कहां पहुंच गई। किसानों का कहना है कि सरकार ने गन्ने का जो समर्थन मूल्य बढ़ाया है वो किसी मतलब का नहीं है। प्रदेश सरकार को कम से कम 20 रुपये बढ़ाया जाना चाहिए।
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प्रदेश सरकार किसानों का सही ध्यान नहीं रख रही है। उन्हें गन्ना मूल्यों में कम से कम 20 रुपये की बढ़ोतरी करनी चाहिए, लेकिन ऐसा न करके किसानों को मायूस किया है। इससे किसानों के हालात बिगड़ेंगे। - ओमकार सिंह, गुलड़िया
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गन्ने के दाम केवल पांच रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी महंगाई को देखते हुए नाकाफी है। महंगाई ने किसानों से लेकर आम आदमी तक की कमर तोड़ दी है। ऐसे में गन्ने की लागत निकलना मुश्किल है। - अभिषेक पटेल, गुलड़िया
सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात कह रही है, लेकिन गन्ना किसानों को पिछले साल का भुगतान तक नहीं मिला है। सरकार ने गन्ने के नाम में पांच रुपये की बढ़ोतरी कर घाव पर नमक छिड़कने का काम किया है। -कुलदीप चौधरी, मोहम्मद नगर
सरकार केवल किसानों के हितों की बात करती है, लेकिन उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं देती। वर्तमान में किसानों की हालत ज्यादा अच्छी नहीं है। पेट्रोल, डीजल के दामों में बेहताशा बढ़ोतरी हुई। गन्ने पर मात्र पांच रुपये ही बढ़ाए गए। - सौरभ भारद्वाज, सुलरा