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गंगास्नान कर रहा युवक बहा
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उझानी (बदायूं)। अपने दोस्तों के साथ कछला घाट आया आगरा निवासी पवन कुमार डुबकी लगाते समय बह गया। दोस्तों को इसकी भनक काफी देर बाद लगी तो उन्होंने शोर मचाया। आवाज सुनकर पहुंचे गोताखोरों ने लापता पवन की तलाश शुरू कर दी है। उसका अब तक सुराग नहीं लग पाया है।
आगरा में शमशाबाद थाना क्षेत्र के गांव गढ़ी निवासी संदीप शर्मा और पवन कुमार समेत पांच दोस्त गंगा स्नान के लिए रविवार को यहां आए थे। शाम को पांचों दोस्तों ने साथ-साथ स्नान किया। इसके बाद संदीप समेत चार दोस्त बाहर निकलकर घाट पर तरबूज खाने लगे लेकिन पवन बाहर नहीं निकला। कुछ देर बाद वह दोस्तों को नजर नहीं आया तो संदीप ने शोर मचाया। आवाज सुनकर तीन-चार गोताखोर आ गए। पवन के तलाश में गंगा में कूदे गोताखोरों ने उसी स्थान पर तलाश शुरू कर दी, जहां वह डुबकी लगा रहा था।
देर रात तक पवन का सुराग नहीं लगा तो सोमवार सुबह उसके ताऊ जगन्नाथ और भाई छोटू भी कछला आ गए। उन्होंने अपनी मौजूदगी में तलाशी अभियान शुरू कराया। संदीप ने बताया कि पांचों दोस्त साथ-साथ काम करते हैं। सभी लोग कार से आए थे। बता दें कि कछला गंगाघाट पर 20 दिन के दौरान गंगा स्नान करते समय बह जाने से युवकों समेत पांच लोगों की मौत हो चुकी है। कोतवाली क्षेत्र के जाटवनगला गांव की किशोरी का तो 10 दिन बाद भी पता नहीं लग पाया है। अधिकतर हादसे कछला पुल के पास ही हुए हैं।
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आगरा में शमशाबाद थाना क्षेत्र के गांव गढ़ी निवासी संदीप शर्मा और पवन कुमार समेत पांच दोस्त गंगा स्नान के लिए रविवार को यहां आए थे। शाम को पांचों दोस्तों ने साथ-साथ स्नान किया। इसके बाद संदीप समेत चार दोस्त बाहर निकलकर घाट पर तरबूज खाने लगे लेकिन पवन बाहर नहीं निकला। कुछ देर बाद वह दोस्तों को नजर नहीं आया तो संदीप ने शोर मचाया। आवाज सुनकर तीन-चार गोताखोर आ गए। पवन के तलाश में गंगा में कूदे गोताखोरों ने उसी स्थान पर तलाश शुरू कर दी, जहां वह डुबकी लगा रहा था।
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देर रात तक पवन का सुराग नहीं लगा तो सोमवार सुबह उसके ताऊ जगन्नाथ और भाई छोटू भी कछला आ गए। उन्होंने अपनी मौजूदगी में तलाशी अभियान शुरू कराया। संदीप ने बताया कि पांचों दोस्त साथ-साथ काम करते हैं। सभी लोग कार से आए थे। बता दें कि कछला गंगाघाट पर 20 दिन के दौरान गंगा स्नान करते समय बह जाने से युवकों समेत पांच लोगों की मौत हो चुकी है। कोतवाली क्षेत्र के जाटवनगला गांव की किशोरी का तो 10 दिन बाद भी पता नहीं लग पाया है। अधिकतर हादसे कछला पुल के पास ही हुए हैं।
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