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बागपत हादसा: जात की खुशी लेकर बदायूं लौट रहे थे, मौत ने मारा झपट्टा, 13 श्रद्धालुओं की गई जान

Tue, 08 Sep 2026 02:00 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Published by: बरेली ब्यूरो Updated Tue, 08 Sep 2026 02:00 AM IST
सार

बागपत जिले में रविवार रात हुए भीषण हादसे में बदायूं जिले के 13 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। ये सभी लोग जात करके लौट रहे थे। हादसे की सूचना मिलते ही मृतकों के परिवारों में कोहराम मच गया। 

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Baghpat road accident Returning to Badaun after a pilgrimage 13 devotees lost their lives
बागपत हादसा: मूर्ति देवी, भगवती देवी और प्रेम सिंह के फाइल फोटो। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

राजस्थान के गोगामेड़ी बागड़ धाम से जात करके घर लौटते समय बागपत जिले में भीषण हादसे में जिन 13 श्रद्धालुओं की जान गई है, उनमें बदायूं के उझानी क्षेत्र निवासी प्रेम सिंह का परिवार भी शामिल था। यह हादसा उनके परिवार को ऐसा गहरा जख्म दे गया, जो परिवार में बचे सदस्यों और रिश्तेदारों को ताउम्र कचोटेगा। बड़े भाई, भाभी और मासूम धेवते और धेवती समेत उनकी भी जान चली गई है। सभी लोग रविवार रात पिकअप में सवार होकर बदायूं लौट रहे थे। बागपत में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर बड़ागांव के पास कैंटर की साइड लगने से अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराकर पलट गई थी। हादसे में एक बच्ची, किशोर समेत 13 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, जबकि 23 लोग घायल हुए हैं। 

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उझानी क्षेत्र के अल्लापुर चमारी गांव के प्रेम सिंह ही नहीं, बल्कि उनके परिजनों के साथ कई महिला-पुरुष और बच्चे भी आस्था से सराबोर भजन गाते हुए बीते शुक्रवार को घर से निकले थे। उन्होंने राजस्थान के गोगामेड़ी पहुंचकर रविवार सुबह जात की। बच्चों के मुंडन संस्कार भी कराए थे। घर लौटने की खुशी बीच सफर में बागपत जिले में बड़ागांव के पास उस वक्त काफूर हो गई, जब श्रद्धालुओं की पिकअप डिवाइडर से टकराकर पलट गई थी। श्रद्धालुओं में कुछ की चीखें पिकअप के अंदर ही दब गईं तो कुछ ने इलाज को ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। घायलों में शामिल श्रीकृष्ण ने अपने चाचा यादराम को रविवार देर रात करीब दो बजे जब हादसा के बारे में बताया तो उसके बाद ही गांव के लोगों को हादसे का पता चला। 
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प्रेम के परिवार को मिला गहरा जख्म 
हादसे में सबसे गहरा जख्म प्रेम सिंह के परिवार को मिला। 45 वर्षीय प्रेम सिंह के अलावा उनके चार साल के धेवते सौरभ और दो साल की धेवती दीक्षा, उनके बड़े भाई जय सिंह उर्फ साधुराम, साधुराम की पत्नी मुन्नी देवी की जान गई है। उनकी पत्नी उर्मिला की हालत नाजुक बताई गई है। इधर, मृतक साधुराम के बेटे प्रमोद ने बताया कि हादसे के बारे में सुनते ही उनकी रुह कांप उठी। गांव में उनके पड़ोसी संजीव कहते हैं कि जात करने के लिए जाने से पहले प्रेम सिंह ने मुजरिया क्षेत्र के गांव सराय मुड़िया खागी उर्फ सरैय्या से अपनी बेटी सोनी और दामाद विकास को दोनों बच्चों सौरभ और दीक्षा के साथ एक दिन पहले अपने घर बुला लिया था। उनकी इच्छा धेवते-धेवती को भी अपनी मौजूदगी में जात कराने की रही थी। 

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बेगमवती का फाइल फोटो।

अब कौन कराएगा जात... कहकर बिलख उठे परिजन
अल्लापुर चमारी ही नहीं, बल्कि इलाके का ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो 80 साल के रामेश्वर भगतजी को नहीं जानता हो। घर से गोगामेड़ी रवाना होने से लेकर लौटने तक जहां भी श्रद्धालु पूजन करते हैं, भगतजी ही मंत्रोच्चार करते थे। उनके बिना गोगामेड़ी कोई नहीं जाता। श्रद्धालुओं के साथ उनके बेटे यादराम और नाती-नातिन भी थे। हादसे में भगतजी की मौत की जानकारी परिजनों को मिली तो वह यह कहते हुए बिलख उठे कि अब आगे जात कौन कराएगा। 

बुजुर्ग बेगमवती की मौत से परिजन बदहवास
उझानी इलाके के गांव निजामपुर निवासी बुजुर्ग बेगमवती पत्नी मुन्नालाल भी अल्लापुर चमारी के श्रद्धालुओं के साथ उसी पिकअप में सवार थी, जो हादसे का शिकार हुई है। वह पिछले वर्षों में भी दो- तीन बार गोगामेड़ी जाकर जात कर चुकी थीं, लेकिन इस बार की जात उनकी अंतिम साबित हुई। उनकी मौत से परिवार के लोग बदहवास हैं। गांव के रौनक यादव ने बताया कि गोगामेड़ी जाने को उन्हें पूरे परिवार ने विदा किया था। उनकी मौत के बारे में पता लगा तो लोग सिहर उठे। उनके बेटे प्रदीप और कुंवरपाल भी ग्रामीणों के साथ बागपत चले गए। 

Baghpat road accident Returning to Badaun after a pilgrimage 13 devotees lost their lives
सुगड़पाल का फाइल फोटो

फोड़ा-फुंसी का देशी इलाज करते थे सुगड़पाल
बागपत हादसे में जान गंवाने वाले चेतूनगला गांव के सुगड़पाल के बारे में गांव के राजीव यादव ने बताया कि वह अपने भतीजे विपिन की पिकअप से जात करने गए थे। पिकअप को विपिन चला रहे थे। तीन संतान में सबसे छोटा बेटा निखिल उनके साथ था। बेटा और भतीजे घायल हैं। सुगड़पाल फोड़ा-फुंसी का देशी इलाज करने में माहिर थे। दूरदराज से लोग उन्हें इलाज करने के लिए बुलाकर ले जाते थे। गोगामेड़ी जाने से दो दिन पहले उन्होंने सहसवान क्षेत्र में महिलाओं का इलाज भी किया। इलाके के लोग उन्हें बिसरिया कहकर पुकारा करते थे।

छह भाई बहन में सबसे छोटा था जितेंद्र
जरीफनगर के मुरादपुर उस्मानपुर निवासी नैनपाल के पांच बेटे और एक बेटी में जितेंद्र सबसे छोटा था। नैनपाल के भाई मुनेश ने बताया कि उनके भाई खेती किसानी करते हैं। वह सबसे छोटे बेटे जितेंद्र और पत्नी सुल्तानश्री के साथ गोगामेड़ी दर्शन करने गए थे। इसी दौरान बागपत में ये हादसा हो गया। नैनपाल और सुल्तानश्री गंभीर रूप से घायल हो गए, जितेंद्र की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि हादसे में दंपति की आंत फट गई, जिसका ऑपरेशन किया गया है। 

Baghpat road accident Returning to Badaun after a pilgrimage 13 devotees lost their lives
प्रेम सिंह के घर बाहर खड़े लोग। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पिता की बुआ की गोद में खेले थे दोनों मासूम 
मुजरिया थाना क्षेत्र के गांव सराय मुडिया खागी सरैय्या गांव निवासी विकास कुमार के दोनों मासूम बच्चे दीक्षा व सौरभ गोगामेड़ी रवाना होने से पहले पिता की बुआ के गोद में खेलते हुए रवाना हुए थे। दोनों बच्चों को पीले कपड़े पहनाकर सबने गोद में खिलाकर रवाना किया था। तब किसी ने यह नहीं सोचा होगा कि इन दोनों बच्चों का वे आखिरी बार मुंह देख रहे हैं। हादसे ने विकास के घर की किलकारी एक झटके में छीन ली। 

मां को नहीं पता कि मुनीम की हो गई मौत
बागपत हादसे में गांव रसूलपुर निवासी आंनदवीर गंभीर रूप से घायल हो गए, उनका इलाज चल रहा है। उनके बेटे मुनीम की इस हादसे में जान चली गई। मुनीम के बहनोई विजय ने बताया कि मुनीम की मौत के बारे में उनकी मां को नहीं बताया गया है। उन्हें केवल पति और बेटे के घायल होने की सूचना दी गई है। विजय ने बताया कि मुनीम तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था। बड़ा भाई वीरेंद्र और छोटा मुनेंद्र हैं। 

अल्लापुर चमारी में गमगीन माहौल पड़ोसियों के घरों में नहीं जले चूल्हे
बागपत हादसे में मृतकों में सर्वाधिक संख्या अल्लापुर चमारी के श्रद्धालुओं की रही है। पूरे दिन गांव का माहौल गमगीन रहा। दोपहर तक गलियों में सन्नाटा पसरा रहा। अधिकारियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ तो लोग घरों से बाहर दिखे। मृतकों के पड़ोसियों के घरों में तो चूल्हे भी नहीं जले। उनके चेहरे पर भी हादसे का दर्द साफ दिखाई दे रहा है। प्रधान श्रीपाल ने बताया कि रविवार रात करीब दो बजे जब उन्हें हादसे के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने घर से बाहर निकलकर दो- तीन लोगों के घर जाकर जानकारी की। जिन्हें हादसे के बारे में नहीं पता था, उन्हें भी बताकर उन लोगों के बारे में जानकारी की गई जो गोगामेड़ी गए थे। 

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