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Budaun News: ट्रैक पर वाहन दौड़ाने के बाद ही बनेगा डीएल
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लाइसेंस बनवाने को लाइन में लगे लोग। संवाद
बदायूं। अब बिना वाहन चलाए ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) नहीं बन सकेगा। ट्रैक पर ढंग से वाहन चलाने वाले को ही एआरटीओ लाइसेंस जारी करेंगे। जनवरी में करीब 50 ऐसे आवेदक सामने आए हैं जो वाहन चलाना ही नहीं जानते थे और आवेदन कर दिया था। ऐसे आवेदकों के आवेदन रद्द कर दिए गए हैं। बता दें कि इससे पहले एक महीने में 22 सौ से 25 तक लाइंसेस कार्यालय से जारी किए जाते थे।
एक महीना पहले तक वाहनों का स्टेरिंग पकड़े बिना ही लाइसेंस जारी कर दिए जा रहे थे। इससे जिले में हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही थी। सड़क हादसों के मामले में जिले का प्रदेश में 18वां स्थान है। सबसे अधिक हादसे और मौतें जिले में अनाड़ी चालकों की वजह से सामने आई हैं। इसको लेकर शासन ने सख्ती की, तो प्रशासन से लेकर परिवहन विभाग हरकत में आ गया।
एआरटीओ हरिओम ने बताया कि हादसोंं को रोकने में सबसे कारगर यही साबित होगा। जब वाहन चलाना जानते होंगे तो हादसे की आशंका कम रहेगी। इसको देखते हुए सख्ती की जा रही हैै। वाहन न चला पाने पर लाइसेंस किसी कीमत पर जारी नहीं किया जाएगा।
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आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया गया है ट्रैक
ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर चालक की दक्षता जांच के लिए आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। लाइसेंस बनवाने के लिए लोगों को ट्रैक पर गाड़ी चलाकर दिखाना पड़ेगा। इसके बाद ही उनका लाइसेंस जारी किया जाएगा। वाहन को दाएं बाएं करने के अलावा स्पीड एवं अन्य उपकरणों को आपरेट करने में अभ्यर्थी कितने दक्ष हैं, इसकी जांच ट्रैक पर हो जाएगी।
ट्रैक पर वाहन चलाकर दक्षता के लिए देनी होगी फीस
ट्रैक पर वाहन चलाकर दक्षता परखी जाएगी। वाहन चालक को नियमित रूप से टेस्ट देना होगा। इसके लिए ट्रैक संचालक को शासनादेश के हिसाब से शुल्क भी देना होगा। अब तक ट्रैक के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ रहा था। लाइसेंस बनवाने के लिए अब आवेदक को ठेका देकर बनवा लेना आसान नहीं होगा। इसके लिए एआरटीओ के सामने दुकानें खोले बैठे दलालों में भी बेचैनी देखने को मिल रही है।
डीएल बनवाने के लिए काफी संख्या में आवेदक आ रहे हैं। वाहन न चला पाने वाले आवेदकाें को वाहन सीखने के लिए ट्रेनिंग लेने को कहा जा रहा है। जब तक वाहन चलाना नहीं आता तब तक लाइसेंस जारी नहीं किया जा सकता। लाइसेंस कुशल चालकों के ही बनाए जा रहे हैं।-हरिओम कुमार, एआरटीओ बदायूं
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एक महीना पहले तक वाहनों का स्टेरिंग पकड़े बिना ही लाइसेंस जारी कर दिए जा रहे थे। इससे जिले में हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही थी। सड़क हादसों के मामले में जिले का प्रदेश में 18वां स्थान है। सबसे अधिक हादसे और मौतें जिले में अनाड़ी चालकों की वजह से सामने आई हैं। इसको लेकर शासन ने सख्ती की, तो प्रशासन से लेकर परिवहन विभाग हरकत में आ गया।
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एआरटीओ हरिओम ने बताया कि हादसोंं को रोकने में सबसे कारगर यही साबित होगा। जब वाहन चलाना जानते होंगे तो हादसे की आशंका कम रहेगी। इसको देखते हुए सख्ती की जा रही हैै। वाहन न चला पाने पर लाइसेंस किसी कीमत पर जारी नहीं किया जाएगा।
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आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया गया है ट्रैक
ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर चालक की दक्षता जांच के लिए आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। लाइसेंस बनवाने के लिए लोगों को ट्रैक पर गाड़ी चलाकर दिखाना पड़ेगा। इसके बाद ही उनका लाइसेंस जारी किया जाएगा। वाहन को दाएं बाएं करने के अलावा स्पीड एवं अन्य उपकरणों को आपरेट करने में अभ्यर्थी कितने दक्ष हैं, इसकी जांच ट्रैक पर हो जाएगी।
ट्रैक पर वाहन चलाकर दक्षता के लिए देनी होगी फीस
ट्रैक पर वाहन चलाकर दक्षता परखी जाएगी। वाहन चालक को नियमित रूप से टेस्ट देना होगा। इसके लिए ट्रैक संचालक को शासनादेश के हिसाब से शुल्क भी देना होगा। अब तक ट्रैक के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ रहा था। लाइसेंस बनवाने के लिए अब आवेदक को ठेका देकर बनवा लेना आसान नहीं होगा। इसके लिए एआरटीओ के सामने दुकानें खोले बैठे दलालों में भी बेचैनी देखने को मिल रही है।
डीएल बनवाने के लिए काफी संख्या में आवेदक आ रहे हैं। वाहन न चला पाने वाले आवेदकाें को वाहन सीखने के लिए ट्रेनिंग लेने को कहा जा रहा है। जब तक वाहन चलाना नहीं आता तब तक लाइसेंस जारी नहीं किया जा सकता। लाइसेंस कुशल चालकों के ही बनाए जा रहे हैं।-हरिओम कुमार, एआरटीओ बदायूं

लाइसेंस बनवाने को लाइन में लगे लोग। संवाद