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शहर में व्यापारियों ने बेच दिए फुटपाथ
Updated Tue, 19 Dec 2017 12:21 AM IST
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फुटपाथ पर सजी दुकानें।
- फोटो : अमर उजाला
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बदायूं। केंद्र और प्रदेश सरकार से लेकर जिला प्रशासन तक शहरों को सुंदर बनाने की कवायद में जुटे हैं। मगर बदायूं शहर को यहां के व्यापारी ही बदसूरत बना रहे हैं। ये कारोबारी अपनी दुकान का माल तो सड़क पर फैलाते ही हैं, साथ ही अपनी दुकान के सामने के फुटपाथ भी ठेला, फड़ लगाने वालों को बेच देते हैं। इस अतिक्रमण से मुख्य बाजारों की सड़कें गलियां बन गई हैं। अतिक्रमण की वजह से लगने वाले जाम से समूचे शहरवासी परेशान हैं। शहर वाले नए निजाम से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
शहर के प्रमुख बाजारों में सड़कें अवैध कमाई का जरिया बनती जा रहीं हैं। हजारों लाखों की कमाई करने वाले व्यापारी अपनी दुकानों के आगे लगी दुकानों से प्रतिमाह तीन से पांच हजार रुपये तक की वसूली कर रहे हैं। व्यापारियों ने अपनी दुुकानों के आगे घड़ी के काउंटर, फेरी वाले, चाट पकौड़ी वाले, रेडीमेड कपड़े और प्लास्टिक के अलावा तमाम तरह के सामानों की दुकानें लगवा रखी हैं। फेरी दुकानदारों के यह अवैध ठिए पुलिस-प्रशासन के लिए चुनौती बने हैं। एक व्यापारी नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि निजी आमदनी के लिए दुकानों के आगे पड़ी जगहों को किराए पर देने की परंपरा बहुत पुरानी है, हालांकि यह पूरी तरह गलत है। पुलिस-प्रशासन को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसी दुकानों की वजह से सड़कों में जाम लगता है, जिससे आम लोगों के लिए परेशानी हो रही है। कुछ व्यापारी नेताओं ने अपना नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर बताया कि बाजार में ऐसी हर अवैध दुकान से सौ रुपये से लेकर तीन सौ रुपये तक की वसूली की जा रही है। यानि शहर के सभी बाजारों का आंकलन किया जाए तो यह वसूली लाखों में होगी।
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हम देते हैं सौ रुपये रोज
बड़ा बाजार में लगभग सौ दुकानदारों ने अपनी दुकानों के आगे ठेले या फड़ लगवा रखे हैं। इनमें लगाए फल विक्रेता, चाय वाले और रेडिमेड कपड़े बेचने वाले शामिल हैं। एक फल विक्रेता ने बताया कि दुुकान मालिक ने यह जगह सौ रुपये प्रतिदिन किराए पर दी है।
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फुटपाथ के सभी दुकानदार देते हैं किराया
गोविंदनगर में प्लास्टिक की दुकान लगाने वाले दुकानदार सरजू ने बताया कि हम मंहगी दुकान किराए पर नहीं ले सकते। इसलिए बाजार की एक दुकान के आगे अपनी दुकान लगाए हुए हैं। यहां के पचास से अधिक दुकानदार जगह के हिसाब से रोज अपना किराया दुकान मालिक को दे देते हैं।
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वर्जन
अतिक्रमण शहर के लिए एक बड़ी समस्या है। इसे हटवाने के लिए नई चेयरमैन से विमर्श के बाद कार्ययोजना की तैयार की जाएगी। पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों को साथ लेकर अभियान चलाया जाएगा। - निशा मिश्रा, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका
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वर्जन
अतिक्रमण हटाने के लिए पहल प्रशासन और पालिका को ही करनी होगी। पुलिस जबरन किसी का सामान नहीं हटवा सकती। हां, अभियान चले और उच्चाधिकारियों का निर्देश हो तो अतिक्रमण हटाने में देर नहीं लगेगी। वैसे पहला प्रयास व्यापारियों से बातचीत का होना चाहिए। - वीरेंद्र सिंह यादव, सीओ सिटी
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शहर के प्रमुख बाजारों में सड़कें अवैध कमाई का जरिया बनती जा रहीं हैं। हजारों लाखों की कमाई करने वाले व्यापारी अपनी दुकानों के आगे लगी दुकानों से प्रतिमाह तीन से पांच हजार रुपये तक की वसूली कर रहे हैं। व्यापारियों ने अपनी दुुकानों के आगे घड़ी के काउंटर, फेरी वाले, चाट पकौड़ी वाले, रेडीमेड कपड़े और प्लास्टिक के अलावा तमाम तरह के सामानों की दुकानें लगवा रखी हैं। फेरी दुकानदारों के यह अवैध ठिए पुलिस-प्रशासन के लिए चुनौती बने हैं। एक व्यापारी नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि निजी आमदनी के लिए दुकानों के आगे पड़ी जगहों को किराए पर देने की परंपरा बहुत पुरानी है, हालांकि यह पूरी तरह गलत है। पुलिस-प्रशासन को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसी दुकानों की वजह से सड़कों में जाम लगता है, जिससे आम लोगों के लिए परेशानी हो रही है। कुछ व्यापारी नेताओं ने अपना नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर बताया कि बाजार में ऐसी हर अवैध दुकान से सौ रुपये से लेकर तीन सौ रुपये तक की वसूली की जा रही है। यानि शहर के सभी बाजारों का आंकलन किया जाए तो यह वसूली लाखों में होगी।
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हम देते हैं सौ रुपये रोज
बड़ा बाजार में लगभग सौ दुकानदारों ने अपनी दुकानों के आगे ठेले या फड़ लगवा रखे हैं। इनमें लगाए फल विक्रेता, चाय वाले और रेडिमेड कपड़े बेचने वाले शामिल हैं। एक फल विक्रेता ने बताया कि दुुकान मालिक ने यह जगह सौ रुपये प्रतिदिन किराए पर दी है।
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फुटपाथ के सभी दुकानदार देते हैं किराया
गोविंदनगर में प्लास्टिक की दुकान लगाने वाले दुकानदार सरजू ने बताया कि हम मंहगी दुकान किराए पर नहीं ले सकते। इसलिए बाजार की एक दुकान के आगे अपनी दुकान लगाए हुए हैं। यहां के पचास से अधिक दुकानदार जगह के हिसाब से रोज अपना किराया दुकान मालिक को दे देते हैं।
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वर्जन
अतिक्रमण शहर के लिए एक बड़ी समस्या है। इसे हटवाने के लिए नई चेयरमैन से विमर्श के बाद कार्ययोजना की तैयार की जाएगी। पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों को साथ लेकर अभियान चलाया जाएगा। - निशा मिश्रा, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका
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वर्जन
अतिक्रमण हटाने के लिए पहल प्रशासन और पालिका को ही करनी होगी। पुलिस जबरन किसी का सामान नहीं हटवा सकती। हां, अभियान चले और उच्चाधिकारियों का निर्देश हो तो अतिक्रमण हटाने में देर नहीं लगेगी। वैसे पहला प्रयास व्यापारियों से बातचीत का होना चाहिए। - वीरेंद्र सिंह यादव, सीओ सिटी