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गंगा की कटरी में बसी आस्था की नगरी
Updated Wed, 01 Nov 2017 11:21 PM IST
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ककोड़ा मेले में ट्राली से आया एक परिवार।
- फोटो : अमर उजाला
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बदायूं। रूहेलखंड का मिनी कुंभ कहे जाने वाला मेला ककोड़ा आस्था के सैलाब से अनूठी नगरी के रूप में सज गया है। शहर, कस्बे और गांवों से पहुंचे लोगों ने तंबुओं से अस्थायी घर बनाकर कल्पवास शुरू कर दिया है। भोर होते ही श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगा कर पूजा अर्चना में लग जाते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं ने बताया कि वे आस्था के अलावा पिकनिक मनाने और पुरानी परंपरा को निभाने भी आते हैं। बुधवार को मेला ककोड़ा में आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों की लाइन लगी रहीं।
देवोत्थानी एकादशी के बाद बुधवार को श्रद्धालुओं ने भोर होते ही गंगा में डुबकी लगाई और पूजा अर्चना की। इसके बाद खिचड़ी भोज का आयोजन किया। गंगा स्नान करने पहुंची अंजली ने बताया कि एकादशी के अगले दिन खिचड़ी का विशेष महत्व होता है।
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सजने लगा मीना बाजार
मेला ककोड़ा में मीना बाजार लगना शुरू हो गया है। दुकानें सजने लगी हैं। मीना बाजार में अधिकतर महिलाओं की जरूरतों का सामान मिलता है। इस बार दुकानों को पिछले साल के मुकाबले में ज्यादा आकर्षक ढंग से सजाया गया है।
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मेले में लगा झूला, सरकस और मौत का कुआं
मेला ककोड़ा में बच्चों के झूले, सरकस और मौत का कुआं आदि मनोरंजन के साधन लग चुके हैं। इनके अलावा मिठाइयों की दुकानें और प्रदर्शनी भी लगने लगी है।
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आस्था में पिकनिक का आनंद
बदायूं। मेला ककोड़ा में कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर मुख्य स्नान शनिवार को होगा। लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच कर गंगा में डुबकी लगाते हैं। मेला लगभग अपने पूरे जोर पर पहुंच चुका है। इस बार श्रद्धालुओं में सबसे ज्यादा तादाद युवा वर्ग की ही नजर आ रही है। जो कुछ पिकनिक तो कुछ पूर्वजों की परंपरा का निर्वाह करने के लिए गंगा के रेत में डेरा जमाए हुए हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां आने से गंगा स्नान भी हो जाता है और टूर भी। बता दें कि मेला ककोड़ा में दूर-दूर से लोग यहां आकर घर बना कर रहते हैं। ये मेला करीब सात दिन तक चलता है। यहां बरेली, शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद, कासगंज से लोग आते हैं। इसके अलावा नैनीताल से भी लोगों ने आकर यहां तंबुओं में रह कर पिकनिक का आनंद ले रहे हैं।
नैनीताल से आई निशि गुप्ता ने बताया कि उनके बदायूं के रिश्तेदार मेला ककोड़ा में कैंप लगाते हैं। ऐसे में ये लोग भी आकर छह सात दिन तक रुकते हैं। उन्होंने बताया कि यहां बच्चों को झूले, खुले में घूमने और महिलाओं की कोई चिंता नहीं रहती है। गंगा स्नान के साथ पिकनिक अच्छे ढंग से हो जाती है।
औरामाई निवासी प्रेमलता ने बताया कि मेला ककोड़ा में आने की कई वजह हैं। एक तो गंगा मइया के प्रति उनकी आस्था। इसके अलावा उन्हें पिकनिक मनाने के लिए कहीं बाहर नहीं जाना पड़ता है। इस मेले में कहीं भी और कभी भी घूमने निकल जाओ, जब मर्जी आए तब स्नान करो, साथ ही पूजा गंगा का किनारा होने की वजह से वातावरण शुद्ध होता है।
भरकुईयां निवासी राजकुमार ने बताया कि उन्होंने जब से होश संभाला है, तब से उनके दादा और पिता मेला ककोड़ा में कल्पवास करते हैं। वो बैल गाड़ी से आते और छह-सात दिन रुक कर वहां कल्पवास करते थे। उनका कहना है कि उनकी परंपरा का निर्वाह कर रहे हैं। साथ में उनकी गंगा के प्रति सबसे ज्यादा आस्था है।
सनाय निवासी यतेंद्र मेला ककोड़ा में परिवार सहित डेरा जमाने के लिए पहुंचे हैं। घर पर उनकी परचूनी की दुकान है। ऐसे में पूरा परिवार मेला ककोड़ा में जा रहा है तो दुकान बंद रहेगी। यतेंद्र ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है, इसलिए उन्होंने ट्रॉली में दुकान लगा कर और ट्रॉली के नीचे तंबु बना कर रहना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि ऐसे में थोड़ा बहुत धंध चलता रहेगा। गंगा स्नान के लिए वो हर साल आते हैं।
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वारदात हुई तो नपेंगे एसओ और कोतवाल
बदायूं। बुधवार को मेला ककोड़ा का हाल लेने पहुंचे आईजी ने एसपी सिटी कमल किशोर, एसओ कादरचौक एसपी सिंह और मेला कोतवाल को अश्वनी कुमार को मेले में सुरक्षा के लिए सख्त हिदायत दी है। उन्होंने बताया कि मेले में जुआ, शराब, चोरी या अन्य कोई घटना होती है तो जिम्मेदार पुलिस कर्मियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। इस दौरान उन्होंने एसपी सिटी और एसओ कादरचौक को मेला के पड़ोसी गांवों में जुआ, शराब को लेकर दबिश देने का आदेश दिया।
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स्काउट्स ने खोया बच्चा मां से मिलाया
कादरचौक। स्काउट का शिविर लग गया है। जो मेले में खोए हुए बच्चों को उनके परिवार वालों से मिलाने की अहम भूमिका निभाता है। फिलहाल स्काउट शिविर परिसर की साफ-सफाई चल रही है। स्काडट शिविर में चंद्रपाल मेमोरियल स्कूल सरफुद्दी नगला, उच्च प्राथमिक स्कूल गंगपुर पुख्ता, दाताराम इंटर कॉलेज असरासी, श्रीकृष्ण इंटर कॉलेज बदायूं सहित नौ स्कूलों से सौ बच्चे और 12 स्काउट टीचर भी रहेंगे। भदरौल के बबलू का बेटा अमन (9) मेले में खो गया, जिसके लिए परिवार के लेाग काफी परेशान होने लगे। एक घंटे बाद अमन की मां रिंकी कैप में पहुंची जहां बच्चे को मां के सुुपुर्द कर दिया गया।
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देवोत्थानी एकादशी के बाद बुधवार को श्रद्धालुओं ने भोर होते ही गंगा में डुबकी लगाई और पूजा अर्चना की। इसके बाद खिचड़ी भोज का आयोजन किया। गंगा स्नान करने पहुंची अंजली ने बताया कि एकादशी के अगले दिन खिचड़ी का विशेष महत्व होता है।
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सजने लगा मीना बाजार
मेला ककोड़ा में मीना बाजार लगना शुरू हो गया है। दुकानें सजने लगी हैं। मीना बाजार में अधिकतर महिलाओं की जरूरतों का सामान मिलता है। इस बार दुकानों को पिछले साल के मुकाबले में ज्यादा आकर्षक ढंग से सजाया गया है।
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मेले में लगा झूला, सरकस और मौत का कुआं
मेला ककोड़ा में बच्चों के झूले, सरकस और मौत का कुआं आदि मनोरंजन के साधन लग चुके हैं। इनके अलावा मिठाइयों की दुकानें और प्रदर्शनी भी लगने लगी है।
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आस्था में पिकनिक का आनंद
बदायूं। मेला ककोड़ा में कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर मुख्य स्नान शनिवार को होगा। लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच कर गंगा में डुबकी लगाते हैं। मेला लगभग अपने पूरे जोर पर पहुंच चुका है। इस बार श्रद्धालुओं में सबसे ज्यादा तादाद युवा वर्ग की ही नजर आ रही है। जो कुछ पिकनिक तो कुछ पूर्वजों की परंपरा का निर्वाह करने के लिए गंगा के रेत में डेरा जमाए हुए हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां आने से गंगा स्नान भी हो जाता है और टूर भी। बता दें कि मेला ककोड़ा में दूर-दूर से लोग यहां आकर घर बना कर रहते हैं। ये मेला करीब सात दिन तक चलता है। यहां बरेली, शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद, कासगंज से लोग आते हैं। इसके अलावा नैनीताल से भी लोगों ने आकर यहां तंबुओं में रह कर पिकनिक का आनंद ले रहे हैं।
नैनीताल से आई निशि गुप्ता ने बताया कि उनके बदायूं के रिश्तेदार मेला ककोड़ा में कैंप लगाते हैं। ऐसे में ये लोग भी आकर छह सात दिन तक रुकते हैं। उन्होंने बताया कि यहां बच्चों को झूले, खुले में घूमने और महिलाओं की कोई चिंता नहीं रहती है। गंगा स्नान के साथ पिकनिक अच्छे ढंग से हो जाती है।
औरामाई निवासी प्रेमलता ने बताया कि मेला ककोड़ा में आने की कई वजह हैं। एक तो गंगा मइया के प्रति उनकी आस्था। इसके अलावा उन्हें पिकनिक मनाने के लिए कहीं बाहर नहीं जाना पड़ता है। इस मेले में कहीं भी और कभी भी घूमने निकल जाओ, जब मर्जी आए तब स्नान करो, साथ ही पूजा गंगा का किनारा होने की वजह से वातावरण शुद्ध होता है।
भरकुईयां निवासी राजकुमार ने बताया कि उन्होंने जब से होश संभाला है, तब से उनके दादा और पिता मेला ककोड़ा में कल्पवास करते हैं। वो बैल गाड़ी से आते और छह-सात दिन रुक कर वहां कल्पवास करते थे। उनका कहना है कि उनकी परंपरा का निर्वाह कर रहे हैं। साथ में उनकी गंगा के प्रति सबसे ज्यादा आस्था है।
सनाय निवासी यतेंद्र मेला ककोड़ा में परिवार सहित डेरा जमाने के लिए पहुंचे हैं। घर पर उनकी परचूनी की दुकान है। ऐसे में पूरा परिवार मेला ककोड़ा में जा रहा है तो दुकान बंद रहेगी। यतेंद्र ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है, इसलिए उन्होंने ट्रॉली में दुकान लगा कर और ट्रॉली के नीचे तंबु बना कर रहना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि ऐसे में थोड़ा बहुत धंध चलता रहेगा। गंगा स्नान के लिए वो हर साल आते हैं।
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वारदात हुई तो नपेंगे एसओ और कोतवाल
बदायूं। बुधवार को मेला ककोड़ा का हाल लेने पहुंचे आईजी ने एसपी सिटी कमल किशोर, एसओ कादरचौक एसपी सिंह और मेला कोतवाल को अश्वनी कुमार को मेले में सुरक्षा के लिए सख्त हिदायत दी है। उन्होंने बताया कि मेले में जुआ, शराब, चोरी या अन्य कोई घटना होती है तो जिम्मेदार पुलिस कर्मियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। इस दौरान उन्होंने एसपी सिटी और एसओ कादरचौक को मेला के पड़ोसी गांवों में जुआ, शराब को लेकर दबिश देने का आदेश दिया।
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स्काउट्स ने खोया बच्चा मां से मिलाया
कादरचौक। स्काउट का शिविर लग गया है। जो मेले में खोए हुए बच्चों को उनके परिवार वालों से मिलाने की अहम भूमिका निभाता है। फिलहाल स्काउट शिविर परिसर की साफ-सफाई चल रही है। स्काडट शिविर में चंद्रपाल मेमोरियल स्कूल सरफुद्दी नगला, उच्च प्राथमिक स्कूल गंगपुर पुख्ता, दाताराम इंटर कॉलेज असरासी, श्रीकृष्ण इंटर कॉलेज बदायूं सहित नौ स्कूलों से सौ बच्चे और 12 स्काउट टीचर भी रहेंगे। भदरौल के बबलू का बेटा अमन (9) मेले में खो गया, जिसके लिए परिवार के लेाग काफी परेशान होने लगे। एक घंटे बाद अमन की मां रिंकी कैप में पहुंची जहां बच्चे को मां के सुुपुर्द कर दिया गया।