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‘कृष्ण-सुदामा की मित्रता ने मिटाया गरीब-अमीर का भेद’
Updated Wed, 23 Aug 2017 11:51 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)।
महाराजा अग्रसेन श्रवण कुमार अग्रवाल धर्मशाला परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का बुधवार को कृष्ण-सुदामा के दोस्ती के किस्सों के साथ समापन हो गया। बाल कथा व्यास दीपक कृष्ण ने मित्रता में गरीब और अमीर के बीच भेद पर भी पक्ष रखा। कहा कि सुदामा की गरीबी के बाद भी कृष्ण ने दोस्ती का फर्ज निभाकर मिसाल पेश की।
महज 13 वर्षीय कथा व्यास दीपक कृष्ण ने भगवान कृष्ण को अंतर्यामी बताया। बोले कि एक बार रुकमणी ने जब कृष्ण से सुदामा की दीन दशा को लेकर पूछा तो उन्हें यही जवाब मिला कि सुदामा का कल्याण होगा, लेकिन उसे भी दोस्ती का फर्ज निभाना होगा। फर्ज यह कि जिस दिन सुदामा द्वारिका पहुंचेंगे, उसी दिन से उनके अच्छे दिन शुरू हो जाएंगे। सुदामा और कृष्ण के बचपन की कथा में उन्होंने कहा कि जीवन में सुख और दु:ख एक सिक्के के दो पहलू की तरह हैं। सुदामा का उद्धार भी कृष्ण ने किया। कृष्ण-सुदामा की तरह इंसान भी दोस्ती का फर्ज समझने लगे तो गरीब और अमीर के बीच की खाई पट जाएगी।
कथा व्यास ने भजन भी सुनाए। काली कमली बाला मेरा यार है और देख सुदामा की दीन दशा करुणा करके करुणानिधि रोये को सुन श्रोता भाव विभोर हो गए। कृष्ण-सुदामा की झांकी ने श्रोताओं का मनमोह लिया। समापन पर दोपहर में भंडारे का प्रसाद वितरण किया गया। भंडारे में सैकड़ों महिला पुरुष जुटे। व्यवस्थाओं में संजय अग्रवाल, रामगोपाल, गिरधारी लाल, राजेंद्र अग्रवाल, धर्मेंद्र वार्ष्णेय, विजय गोपाल, मुकेश आदि का सहयोग रहा।
उझानी (बदायूं)।
महाराजा अग्रसेन श्रवण कुमार अग्रवाल धर्मशाला परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का बुधवार को कृष्ण-सुदामा के दोस्ती के किस्सों के साथ समापन हो गया। बाल कथा व्यास दीपक कृष्ण ने मित्रता में गरीब और अमीर के बीच भेद पर भी पक्ष रखा। कहा कि सुदामा की गरीबी के बाद भी कृष्ण ने दोस्ती का फर्ज निभाकर मिसाल पेश की।
महज 13 वर्षीय कथा व्यास दीपक कृष्ण ने भगवान कृष्ण को अंतर्यामी बताया। बोले कि एक बार रुकमणी ने जब कृष्ण से सुदामा की दीन दशा को लेकर पूछा तो उन्हें यही जवाब मिला कि सुदामा का कल्याण होगा, लेकिन उसे भी दोस्ती का फर्ज निभाना होगा। फर्ज यह कि जिस दिन सुदामा द्वारिका पहुंचेंगे, उसी दिन से उनके अच्छे दिन शुरू हो जाएंगे। सुदामा और कृष्ण के बचपन की कथा में उन्होंने कहा कि जीवन में सुख और दु:ख एक सिक्के के दो पहलू की तरह हैं। सुदामा का उद्धार भी कृष्ण ने किया। कृष्ण-सुदामा की तरह इंसान भी दोस्ती का फर्ज समझने लगे तो गरीब और अमीर के बीच की खाई पट जाएगी।
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कथा व्यास ने भजन भी सुनाए। काली कमली बाला मेरा यार है और देख सुदामा की दीन दशा करुणा करके करुणानिधि रोये को सुन श्रोता भाव विभोर हो गए। कृष्ण-सुदामा की झांकी ने श्रोताओं का मनमोह लिया। समापन पर दोपहर में भंडारे का प्रसाद वितरण किया गया। भंडारे में सैकड़ों महिला पुरुष जुटे। व्यवस्थाओं में संजय अग्रवाल, रामगोपाल, गिरधारी लाल, राजेंद्र अग्रवाल, धर्मेंद्र वार्ष्णेय, विजय गोपाल, मुकेश आदि का सहयोग रहा।
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