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बारिश बनी मुसीबत, जिला अस्पताल के वार्डों में टपक रहा पानी
Updated Wed, 01 Aug 2018 12:33 AM IST
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बारिश बनी मुसीबत, जिला अस्पताल के वार्डों में टपक रहा पानी
न डॉक्टरों के बैठने की जगह, न मरीजों के लेटने का ठिकाना
किसी हादसे की दहशत में हैं मरीज और तीमारदार
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। दो दिन से हो रही बारिश जिला अस्पताल के डॉक्टरों और मरीजों के लिए मुसीबत बन गई है। इमरजेंसी से लेकर जिला अस्पताल के कई वार्डों की छत टपक रही है। मरीजों के ऊपर पानी टपकने से बेड इधर-उधर खींचने पड़ रहे हैं। चिकित्सकों का बैठना मुश्किल हो गया है। छत टपकने से मरीजों और उनके तीमारदारों में किसी हादसे को लेकर दहशत है।
जिला अस्पताल में इमरजेंसी के हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। इमरजेंसी की छत से लगातार पानी टपक रहा है, जिससे न तो ठीक से चिकित्सक बैठ पा रहे हैं और न ही मरीजं। यहां दो बेंच पड़ी हैं, जिन पर मरीजों को लिटाकर प्राथमिक उपचार किया जाता है। पानी टपकने से यह भी भीग चुकी हैं। बाकी फर्श का तो बहुत बुरा हाल है। यहां मरीजों और तीमारदारों की घमाचौकड़ी से अंदर तक गंदगी जा रही है। सफाई कर्मी फर्श पर पोंछा लगाते-लगाते परेशान हैं। इधर, पेइंग वार्ड की बात करें तो यहां भी मरीज सुरक्षित नहीं हैं। दो कमरों की छत पूरी गीली हो चुकी है। मरीजों के ऊपर तक पानी टपक रहा है। मरीज अपना बेड तक इधर-उधर खिसका कर काम चला रहे हैं।
वहीं आर्थो वार्ड की बिल्डिंग लीकेज होने से पूरा फर्श गीला पड़ा है। कई जगह पानी टपकने से मरीजों ने अपने बेड तक खाली कर दिए हैं। यहां मरीज बेड के ऊपर पन्नी ओड़ने तक को मजबूर हैं। कुछ मरीज पानी से बचने के लिए चादर का सहारा ले गए हैं। यह हालात सिर्फ इमरजेंसी, पेइंग और आर्थो वार्ड के नहीं है। अस्पताल के मेडिकल, बर्न, सर्जिकल वार्ड और सबसे व्यस्त रहने वाले इमरजेंसी वार्ड के हालात भी खराब हैं।
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इमरजेंसी की नई बिल्डिंग तक दे गई धोखा
इस बरसात से जिला अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग की बात छोड़िए उस बिल्डिंग तक में पानी टपकना शुरू हो गया, जिसका अभी उद्घाटन तक नहीं हुआ है। अस्पताल में नई इमरजेंसी का निर्माण एक साल पहले पूरा हुआ था। तभी से उसमें ताले पड़े हुए हैं। यह बिल्डिंग पहली बरसात ही नहीं झेल पाई कि उसकी छत से पानी टपकना शुरू हो गया। लगातार हो रही बरसात ने निर्माण एजेंसी की पोल खोलकर रख दी है। वहीं इस पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
क्या कहते हैं मरीज
फोटो-7
मैंने कल रात अपनी पत्नी निशा को यहां भर्ती कराया था। यहां आकर देखा तो दंग रह गया। पूरी बिल्डिंग में पानी टपक रहा है। दो कमरों में कहीं भी मरीज सुरक्षित नहीं है। ऐसे में मरीज कैसे अपना इलाज कराए।
-अकील, नई सराय नई बस्ती
फोटो-9
हम कल रात यहां भर्ती हुए। पेट में दर्द हो रहा था। यहां पानी टपक रहा था। कई बार हमने रात में ही कर्मचारियों को तलाश किया, लेकिन कोई भी दिखाई नहीं दिया। सोचा कोई इंजेक्शन लगा जाए और बेड बदल जाए परंतु कोई राहत नहीं मिली।
-राजाराम, नरऊ उझानी
फोटो-10
हम तो आज ही अस्पताल में भर्ती हुए हैं। हमें तो ऐसा बेड मिला, जहां ऊपर से पानी टपक रहा है। दूसरी चादर तक नहीं बिछाई गई है। गीले बेड पर कैसे इलाज हो, कम से कम जिम्मेदार अधिकारियों को मरीजों की परेशानी समझनी चाहिए।
-ताहिर, कबूलपुरा
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बारिश बनी मुसीबत, जिला अस्पताल के वार्डों में टपक रहा पानी
न डॉक्टरों के बैठने की जगह, न मरीजों के लेटने का ठिकाना
किसी हादसे की दहशत में हैं मरीज और तीमारदार
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। दो दिन से हो रही बारिश जिला अस्पताल के डॉक्टरों और मरीजों के लिए मुसीबत बन गई है। इमरजेंसी से लेकर जिला अस्पताल के कई वार्डों की छत टपक रही है। मरीजों के ऊपर पानी टपकने से बेड इधर-उधर खींचने पड़ रहे हैं। चिकित्सकों का बैठना मुश्किल हो गया है। छत टपकने से मरीजों और उनके तीमारदारों में किसी हादसे को लेकर दहशत है।
जिला अस्पताल में इमरजेंसी के हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। इमरजेंसी की छत से लगातार पानी टपक रहा है, जिससे न तो ठीक से चिकित्सक बैठ पा रहे हैं और न ही मरीजं। यहां दो बेंच पड़ी हैं, जिन पर मरीजों को लिटाकर प्राथमिक उपचार किया जाता है। पानी टपकने से यह भी भीग चुकी हैं। बाकी फर्श का तो बहुत बुरा हाल है। यहां मरीजों और तीमारदारों की घमाचौकड़ी से अंदर तक गंदगी जा रही है। सफाई कर्मी फर्श पर पोंछा लगाते-लगाते परेशान हैं। इधर, पेइंग वार्ड की बात करें तो यहां भी मरीज सुरक्षित नहीं हैं। दो कमरों की छत पूरी गीली हो चुकी है। मरीजों के ऊपर तक पानी टपक रहा है। मरीज अपना बेड तक इधर-उधर खिसका कर काम चला रहे हैं।
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वहीं आर्थो वार्ड की बिल्डिंग लीकेज होने से पूरा फर्श गीला पड़ा है। कई जगह पानी टपकने से मरीजों ने अपने बेड तक खाली कर दिए हैं। यहां मरीज बेड के ऊपर पन्नी ओड़ने तक को मजबूर हैं। कुछ मरीज पानी से बचने के लिए चादर का सहारा ले गए हैं। यह हालात सिर्फ इमरजेंसी, पेइंग और आर्थो वार्ड के नहीं है। अस्पताल के मेडिकल, बर्न, सर्जिकल वार्ड और सबसे व्यस्त रहने वाले इमरजेंसी वार्ड के हालात भी खराब हैं।
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इमरजेंसी की नई बिल्डिंग तक दे गई धोखा
इस बरसात से जिला अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग की बात छोड़िए उस बिल्डिंग तक में पानी टपकना शुरू हो गया, जिसका अभी उद्घाटन तक नहीं हुआ है। अस्पताल में नई इमरजेंसी का निर्माण एक साल पहले पूरा हुआ था। तभी से उसमें ताले पड़े हुए हैं। यह बिल्डिंग पहली बरसात ही नहीं झेल पाई कि उसकी छत से पानी टपकना शुरू हो गया। लगातार हो रही बरसात ने निर्माण एजेंसी की पोल खोलकर रख दी है। वहीं इस पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
क्या कहते हैं मरीज
फोटो-7
मैंने कल रात अपनी पत्नी निशा को यहां भर्ती कराया था। यहां आकर देखा तो दंग रह गया। पूरी बिल्डिंग में पानी टपक रहा है। दो कमरों में कहीं भी मरीज सुरक्षित नहीं है। ऐसे में मरीज कैसे अपना इलाज कराए।
-अकील, नई सराय नई बस्ती
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हम कल रात यहां भर्ती हुए। पेट में दर्द हो रहा था। यहां पानी टपक रहा था। कई बार हमने रात में ही कर्मचारियों को तलाश किया, लेकिन कोई भी दिखाई नहीं दिया। सोचा कोई इंजेक्शन लगा जाए और बेड बदल जाए परंतु कोई राहत नहीं मिली।
-राजाराम, नरऊ उझानी
फोटो-10
हम तो आज ही अस्पताल में भर्ती हुए हैं। हमें तो ऐसा बेड मिला, जहां ऊपर से पानी टपक रहा है। दूसरी चादर तक नहीं बिछाई गई है। गीले बेड पर कैसे इलाज हो, कम से कम जिम्मेदार अधिकारियों को मरीजों की परेशानी समझनी चाहिए।
-ताहिर, कबूलपुरा