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राफिया कॉलेज के प्रबंधक को बताया शिक्षा माफिया
Updated Sat, 10 Feb 2018 10:00 AM IST
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राफिया कॉलेज के प्रबंधक को बताया शिक्षा माफिया
डायट प्राचार्य ने जांच में सही पाए आरोप, डीएम को भेजी रिपोर्ट
सहसवान के राफिया कॉलेज में एडमिशन में हुआ था फर्जीवाड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान होने के बावजूद रुपये लेकर सामान्य अभ्यर्थियों का एडमिशन करने के मामले में सहसवान स्थित राफिया एजूकेशनल कॉलेज प्रबंधन फंस गया है। डायट प्राचार्य ने अपनी जांच में प्रबंधक को शिक्षा माफिया बताते हुए रिपोर्ट डीएम को भेज दी है। अब कॉलेज की मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई हो सकती है।
बदायूं यूथ संगठन ने राफिया कॉलेज द्वारा वर्तमान शिक्षण सत्र में नियम विरुद्ध लिए गए बीटीसी प्रवेश की जांच कराने की मांग करते हुए डीएम को ज्ञापन भेजा था। इस संबंध में संगठन ने कॉलेज प्रबंध तंत्र पर मनमानी करने का आरोप लगाया था। कहा था कि अल्पसंख्यक संस्थान का लाभ ले रहे राफिया कॉलेज को बीटीसी की 50 प्रतिशत सीटें अल्पसंख्यक छात्रों से भरने का निर्देश दिया गया था। कई अल्पसंख्यको ने कॉलेज की वेबसाइट पर आवेदन किया पर प्रबंध तंत्र ने गैर अल्पसंख्यक वर्ग से ही सीटें भर दीं। इसके बदले मोटा डोनेशन लिया गया। इससे उन कई अल्पसंख्यक छात्रों के अधिकारों का हनन किया गया है जो बीटीसी करना चाहते थे।
डीएम ने इस प्रकरण की जांच डीआईओएस मुन्ने अली को सौंप दी। मुन्ने अली ने इसे उच्चस्तर का विषय बताते हुए प्रकरण डायट प्राचार्य राजीव कुमार दिवाकर को हस्तगत कर दिया। अब डायट प्राचार्य ने अपनी जांच रिपोर्ट डीएम को भेज दी है। उन्होंने लिखा है कि जांच में आरोप सही पाए गए हैं। साबित हुआ है कॉलेज का प्रबंधक शिक्षा माफिया है। इसकी शिकायत शासन में प्रमुख सचिव और राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद लखनऊ से की है पर अब तक इस शिक्षा माफिया के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। मान्यता प्रत्याहरण का कार्य शासन स्तर से ही किया जा सकता है।
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प्रवेश निरस्त और मान्यता खत्म कराएंगे
बदायूं यूथ के जिला उपाध्यक्ष सितारुददीन ने कहा कि निष्पक्ष जांच करके अधिकारियों ने प्रवेश से वंचित छात्र छात्राओं को न्याय दिलाने का रास्ता खोला है। अब वह जिला प्रशासन से मांग करेंगे कि गलत तरीके से किए प्रवेश निरस्त किए जाएं। कॉलेज प्रबंधक पर रिपोर्ट कराई जाए और मान्यता निरस्त की जाए।
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प्राचार्य और प्रबंधक भी छोड़ भागे
कॉलेज के संस्थापक की नीतियों से आहत होकर प्राचार्य और वैतनिक प्रबंधक ने भी कॉलेज से नाता तोड़ लिया है। प्राचार्य मोहम्मद कामिल ने बताया कि उन पर नियम विरुद्ध काम करने का दवाब बनाया जा रहा था। उन्होंने मना किया तो उनका दो माह का वेतन रोक लिया गया। उन्होंने भी कॉलेज मालिक के खिलाफ डीएम से शिकायत की थी जिसकी जांच डायट प्राचार्य कर रहे हैं। वहीं, प्रबंधक रहे आदिल का कहना था कि उनकी भी कुछ नीतिगत बातों पर कॉलेज स्वामी से अनबन थी। वह दो माह पहले पद छोड़ चुके हैं।
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छात्रा ने कराई है एफआईआर
बदायूं के आदर्शनगर निवासी महिपाल सिंह की पुत्री स्नेहा सिंह ने हाल ही में डीएम को पत्र देकर राफिया कॉलेज के प्रबंध तंत्र के खिलाफ एडमिशन के नाम पर 3.40 लाख रुपये हड़पने का आरोप लगाया था। कहा था कि वह उसके मूल प्रमाणपत्र लौटाने के नाम पर एक लाख रुपये और मांग रहे हैं। डीएम के निर्देश पर सहसवान कोतवाली में तीन जनवरी को प्रबंध तंत्र के खिलाफ रिपोर्ट कराई गई थी। पुलिस छात्रा के आरोपों की जांच कर रही है।
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जांच रिपोर्ट मिलेगी तो देंगे जवाब
कुछ लोग बेवजह कॉलेज के खिलाफ शिकायतें कर रहे हैं। सारे प्रवेश नियमानुसार हुए हैं, कुछ भी गलत नहीं है। डायट प्राचार्य की जांच रिपोर्ट अभी हमें नहीं मिली है। उसमें हमारे ऊपर क्या आरोप साबित किए हैं, यह भी नहीं पता है।
- हबीबुरर्हमान, कॉलेज संस्थापक व निदेशक
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डायट प्राचार्य ने जांच में सही पाए आरोप, डीएम को भेजी रिपोर्ट
सहसवान के राफिया कॉलेज में एडमिशन में हुआ था फर्जीवाड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान होने के बावजूद रुपये लेकर सामान्य अभ्यर्थियों का एडमिशन करने के मामले में सहसवान स्थित राफिया एजूकेशनल कॉलेज प्रबंधन फंस गया है। डायट प्राचार्य ने अपनी जांच में प्रबंधक को शिक्षा माफिया बताते हुए रिपोर्ट डीएम को भेज दी है। अब कॉलेज की मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई हो सकती है।
बदायूं यूथ संगठन ने राफिया कॉलेज द्वारा वर्तमान शिक्षण सत्र में नियम विरुद्ध लिए गए बीटीसी प्रवेश की जांच कराने की मांग करते हुए डीएम को ज्ञापन भेजा था। इस संबंध में संगठन ने कॉलेज प्रबंध तंत्र पर मनमानी करने का आरोप लगाया था। कहा था कि अल्पसंख्यक संस्थान का लाभ ले रहे राफिया कॉलेज को बीटीसी की 50 प्रतिशत सीटें अल्पसंख्यक छात्रों से भरने का निर्देश दिया गया था। कई अल्पसंख्यको ने कॉलेज की वेबसाइट पर आवेदन किया पर प्रबंध तंत्र ने गैर अल्पसंख्यक वर्ग से ही सीटें भर दीं। इसके बदले मोटा डोनेशन लिया गया। इससे उन कई अल्पसंख्यक छात्रों के अधिकारों का हनन किया गया है जो बीटीसी करना चाहते थे।
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डीएम ने इस प्रकरण की जांच डीआईओएस मुन्ने अली को सौंप दी। मुन्ने अली ने इसे उच्चस्तर का विषय बताते हुए प्रकरण डायट प्राचार्य राजीव कुमार दिवाकर को हस्तगत कर दिया। अब डायट प्राचार्य ने अपनी जांच रिपोर्ट डीएम को भेज दी है। उन्होंने लिखा है कि जांच में आरोप सही पाए गए हैं। साबित हुआ है कॉलेज का प्रबंधक शिक्षा माफिया है। इसकी शिकायत शासन में प्रमुख सचिव और राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद लखनऊ से की है पर अब तक इस शिक्षा माफिया के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। मान्यता प्रत्याहरण का कार्य शासन स्तर से ही किया जा सकता है।
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प्रवेश निरस्त और मान्यता खत्म कराएंगे
बदायूं यूथ के जिला उपाध्यक्ष सितारुददीन ने कहा कि निष्पक्ष जांच करके अधिकारियों ने प्रवेश से वंचित छात्र छात्राओं को न्याय दिलाने का रास्ता खोला है। अब वह जिला प्रशासन से मांग करेंगे कि गलत तरीके से किए प्रवेश निरस्त किए जाएं। कॉलेज प्रबंधक पर रिपोर्ट कराई जाए और मान्यता निरस्त की जाए।
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प्राचार्य और प्रबंधक भी छोड़ भागे
कॉलेज के संस्थापक की नीतियों से आहत होकर प्राचार्य और वैतनिक प्रबंधक ने भी कॉलेज से नाता तोड़ लिया है। प्राचार्य मोहम्मद कामिल ने बताया कि उन पर नियम विरुद्ध काम करने का दवाब बनाया जा रहा था। उन्होंने मना किया तो उनका दो माह का वेतन रोक लिया गया। उन्होंने भी कॉलेज मालिक के खिलाफ डीएम से शिकायत की थी जिसकी जांच डायट प्राचार्य कर रहे हैं। वहीं, प्रबंधक रहे आदिल का कहना था कि उनकी भी कुछ नीतिगत बातों पर कॉलेज स्वामी से अनबन थी। वह दो माह पहले पद छोड़ चुके हैं।
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छात्रा ने कराई है एफआईआर
बदायूं के आदर्शनगर निवासी महिपाल सिंह की पुत्री स्नेहा सिंह ने हाल ही में डीएम को पत्र देकर राफिया कॉलेज के प्रबंध तंत्र के खिलाफ एडमिशन के नाम पर 3.40 लाख रुपये हड़पने का आरोप लगाया था। कहा था कि वह उसके मूल प्रमाणपत्र लौटाने के नाम पर एक लाख रुपये और मांग रहे हैं। डीएम के निर्देश पर सहसवान कोतवाली में तीन जनवरी को प्रबंध तंत्र के खिलाफ रिपोर्ट कराई गई थी। पुलिस छात्रा के आरोपों की जांच कर रही है।
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जांच रिपोर्ट मिलेगी तो देंगे जवाब
कुछ लोग बेवजह कॉलेज के खिलाफ शिकायतें कर रहे हैं। सारे प्रवेश नियमानुसार हुए हैं, कुछ भी गलत नहीं है। डायट प्राचार्य की जांच रिपोर्ट अभी हमें नहीं मिली है। उसमें हमारे ऊपर क्या आरोप साबित किए हैं, यह भी नहीं पता है।
- हबीबुरर्हमान, कॉलेज संस्थापक व निदेशक