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शहरी निकले, अब गांव वालों का रह गया मेला
Updated Wed, 08 Nov 2017 12:19 AM IST
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चूड़ियां पहनतीं महिलाएं और लड़कियां।
- फोटो : अमर उजाला
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मेला ककोड़ा। मेले में कल्पवास कर सुकून तलाशने या परिवार के साथ मस्ती के मूड में आए शहर वाले तो न के बराबर बचे हैं। मेला अब ग्रामीण परिवेश के लोगों का ही रह गया है। दुकानों पर खरीदारी को उन्हीं की भीड़ उमड़ रही है।
मेले में ग्रामीण क्षेत्र की जनता खूब आ रही है। इनमें से कुछ लोग तो पहले से मेले में रुके हुए थे तो बाकी आसपास कटरी के गांवों के हैं। महिलाएं और बच्चे ट्रैक्टर और डनलपों से मेले में आ रहे हैं और स्नान के बाद जमकर खरीदारी कर रहे हैं। दुकानदार भी इससे खुश हैं। गंगा पर पुल बनने के बाद गंगा पार कासगंज जिले के गांवों के लेाग भी बड़ी संख्या में यहां खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं। चूंकि अब शादियों का भी आगाज होने जा रहा है, इसलिए लोग मेले से शादी में देने के लिए सामान भी खरीद रहे हैं। इसके अलावा साल भर की जरूरतों का घरेलू सामान भी लोग खरीद रहे हैं। कासगंज के कादरगंज निवासी असलम के अनुसार उनके जिले में इस तरह का बड़ा मेला नहीं लगता। यहां जरूरत की हर वस्तु को खरीद सकते हैं। परिवार के लोग बैलगाड़ी से ही आकर एक साथ चीजें पसंद भी कर लेते हैं। बिना कोई किराया खर्च किए बच्चों का मनोरंजन भी हो जाता है। पुल नहीं था तो मेले में आना मुश्किल हो जाता था।
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बक्सों की बढ़ी मांग
मेला ककोडा। गंजडुंडवारा कासगंज के बक्सा व्यापारी अबरार, नसररुदीन और शमशाद ने बताया कि इस बार किसान की खेती अच्छी हो रही है। इससे मेला अच्छा रहा है। लोग खरीदारी भी खूब कर रहे हैं। लोहे के सामान में शामिल बक्सों पर जीएसटी लगने से थोडी महंगाई तो जरूर बढ़ी है पर कुल मिलाकर मेला अच्छा रहा है। शादी में देने के लिए भी लोग बक्सों की खरीदारी कर रहे हैं।
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दो सौ रुपये तक की बांसुरी
मेला ककोड़ा। मेले में पीलीभीत और बदायूं की बांसुरी भी खूब बिक रही हैं। यहां की बांसुरी बनाने की कला प्रसिद्ध है। बदायूं और पीलीभीत में बांसुरी बनाई जाती हैं। बदायूं निवासी पप्पू ने बताया कि बांसुरी के शौकीन आज भी महंगी बांसुरी खरीदते हैं। पहले बच्चों का भी प्रथम वाद्य यंत्र बांसुरी ही होता था। बाद में आए तरह-तरह के इंस्टूमेंट के मुकाबले बांसुरी पिछड़ गई।
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जिला पंचायत अध्यक्ष ने किया दौरा
मेला ककोड़ा। मेले की सुरक्षा को लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चंद्रा ने मेला स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने दुकानों पर जाकर दुकानदारों से बात की। साथ ही जिला पंचायत कर्मियों को भी मेला की व्यवस्था में रहने को कहा।
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सिमटने लगे खेल तमाशे
मेला ककोड़ा। मेले में लगे खेल तमाशे भी अब सिमटने लगे हैं। सर्कस का सामान भी खुलने लगा। अन्य कई खेल तमाशे भी बंद हो चुके हैं।
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मीना बाजार गुलजार
मेला ककोड़ा। मेला में मीना बाजार, हलवाई बाजार, बक्सा, ढोलक, लाठी और पशुओं से संबंधित सामान का बाजार अभी भी गुलजार है। लोग चाट पकौड़ी के भी मजे ले रहे हैं।
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स्वच्छता अभियान की तो हवा निकल गई
मेला ककोड़ा। मेले में हजारों क्विंटल कचरा गंगा के तट और मेला परिसर में पड़ा है। इसकी जिम्मेदारी न तो स्नान को आए लोगों ने समझी और न ही जिपं के स्टाफ ने। लोग मेला परिसर और तट को गंदा करके निकल जा रहे हैं और कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। वहीं शासन की प्राथमिकता के मद्देनजर भी जिला पंचायत ने गंगा में राख, मूर्ति, गंदगी का विसर्जन रोकने को जागरूकता पैदा करने को कोई कोशिश नहीं की।
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मेले में ग्रामीण क्षेत्र की जनता खूब आ रही है। इनमें से कुछ लोग तो पहले से मेले में रुके हुए थे तो बाकी आसपास कटरी के गांवों के हैं। महिलाएं और बच्चे ट्रैक्टर और डनलपों से मेले में आ रहे हैं और स्नान के बाद जमकर खरीदारी कर रहे हैं। दुकानदार भी इससे खुश हैं। गंगा पर पुल बनने के बाद गंगा पार कासगंज जिले के गांवों के लेाग भी बड़ी संख्या में यहां खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं। चूंकि अब शादियों का भी आगाज होने जा रहा है, इसलिए लोग मेले से शादी में देने के लिए सामान भी खरीद रहे हैं। इसके अलावा साल भर की जरूरतों का घरेलू सामान भी लोग खरीद रहे हैं। कासगंज के कादरगंज निवासी असलम के अनुसार उनके जिले में इस तरह का बड़ा मेला नहीं लगता। यहां जरूरत की हर वस्तु को खरीद सकते हैं। परिवार के लोग बैलगाड़ी से ही आकर एक साथ चीजें पसंद भी कर लेते हैं। बिना कोई किराया खर्च किए बच्चों का मनोरंजन भी हो जाता है। पुल नहीं था तो मेले में आना मुश्किल हो जाता था।
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बक्सों की बढ़ी मांग
मेला ककोडा। गंजडुंडवारा कासगंज के बक्सा व्यापारी अबरार, नसररुदीन और शमशाद ने बताया कि इस बार किसान की खेती अच्छी हो रही है। इससे मेला अच्छा रहा है। लोग खरीदारी भी खूब कर रहे हैं। लोहे के सामान में शामिल बक्सों पर जीएसटी लगने से थोडी महंगाई तो जरूर बढ़ी है पर कुल मिलाकर मेला अच्छा रहा है। शादी में देने के लिए भी लोग बक्सों की खरीदारी कर रहे हैं।
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दो सौ रुपये तक की बांसुरी
मेला ककोड़ा। मेले में पीलीभीत और बदायूं की बांसुरी भी खूब बिक रही हैं। यहां की बांसुरी बनाने की कला प्रसिद्ध है। बदायूं और पीलीभीत में बांसुरी बनाई जाती हैं। बदायूं निवासी पप्पू ने बताया कि बांसुरी के शौकीन आज भी महंगी बांसुरी खरीदते हैं। पहले बच्चों का भी प्रथम वाद्य यंत्र बांसुरी ही होता था। बाद में आए तरह-तरह के इंस्टूमेंट के मुकाबले बांसुरी पिछड़ गई।
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जिला पंचायत अध्यक्ष ने किया दौरा
मेला ककोड़ा। मेले की सुरक्षा को लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चंद्रा ने मेला स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने दुकानों पर जाकर दुकानदारों से बात की। साथ ही जिला पंचायत कर्मियों को भी मेला की व्यवस्था में रहने को कहा।
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सिमटने लगे खेल तमाशे
मेला ककोड़ा। मेले में लगे खेल तमाशे भी अब सिमटने लगे हैं। सर्कस का सामान भी खुलने लगा। अन्य कई खेल तमाशे भी बंद हो चुके हैं।
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मीना बाजार गुलजार
मेला ककोड़ा। मेला में मीना बाजार, हलवाई बाजार, बक्सा, ढोलक, लाठी और पशुओं से संबंधित सामान का बाजार अभी भी गुलजार है। लोग चाट पकौड़ी के भी मजे ले रहे हैं।
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स्वच्छता अभियान की तो हवा निकल गई
मेला ककोड़ा। मेले में हजारों क्विंटल कचरा गंगा के तट और मेला परिसर में पड़ा है। इसकी जिम्मेदारी न तो स्नान को आए लोगों ने समझी और न ही जिपं के स्टाफ ने। लोग मेला परिसर और तट को गंदा करके निकल जा रहे हैं और कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। वहीं शासन की प्राथमिकता के मद्देनजर भी जिला पंचायत ने गंगा में राख, मूर्ति, गंदगी का विसर्जन रोकने को जागरूकता पैदा करने को कोई कोशिश नहीं की।