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फातिहा के साथ दादा मियां के उर्स का समापन
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बिसौली। मील वाले दादा मियां के उर्स का कुलशरीफ की फातिहा के बाद समापन हो गया। इससे पहले सुबह तक चली कव्वालियों का श्रोताओं ने जमकर लुत्फ उठाया।
मील वाले दादा मियां की ज्यारत पर एक हफ्ते तक चले उर्स का गुरुवार दोपहर डेढ़ बजे कुलशरीफ की फातिहा के साथ समापन हो गया। इस मौके पर सैकड़ों मुरीदों ने शामिल होकर फातिहा में शिरकत की। बुधवार पूरी रात चली कव्वालियों में रिजयाजुल साबरी और जानम ताज ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। तड़के तीन बजे तक चले कव्वालियों के दौर में कव्वालों ने एक से बढ़कर एक कव्वालियां पेश कर समां बांध दिया। चेयरमैन अबरार अहमद व उनकी पत्नी ने दादा मियां की मजार पर चादरपोशी कर मुल्क व कौम की तरक्की की दुआ मांगी। इस मौके पर यासीन बेग, सैयद मेहशर अली, चुनमुन सैफी, राशिद मंसूरी, शाकिर, सैयद जाकिर अली, मोहम्मद शाकिर, ताजुद्दीन सैफी, युसुफ खां, आबिद उस्मानी, दिलशाद फारुखी, नदीम खां, राजा, जान मोहम्मद, बंटी, चांद फारुखी, अय्यूब आदि मौजूद रहे।
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मील वाले दादा मियां की ज्यारत पर एक हफ्ते तक चले उर्स का गुरुवार दोपहर डेढ़ बजे कुलशरीफ की फातिहा के साथ समापन हो गया। इस मौके पर सैकड़ों मुरीदों ने शामिल होकर फातिहा में शिरकत की। बुधवार पूरी रात चली कव्वालियों में रिजयाजुल साबरी और जानम ताज ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। तड़के तीन बजे तक चले कव्वालियों के दौर में कव्वालों ने एक से बढ़कर एक कव्वालियां पेश कर समां बांध दिया। चेयरमैन अबरार अहमद व उनकी पत्नी ने दादा मियां की मजार पर चादरपोशी कर मुल्क व कौम की तरक्की की दुआ मांगी। इस मौके पर यासीन बेग, सैयद मेहशर अली, चुनमुन सैफी, राशिद मंसूरी, शाकिर, सैयद जाकिर अली, मोहम्मद शाकिर, ताजुद्दीन सैफी, युसुफ खां, आबिद उस्मानी, दिलशाद फारुखी, नदीम खां, राजा, जान मोहम्मद, बंटी, चांद फारुखी, अय्यूब आदि मौजूद रहे।