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डग्गामारी से रोडवेज को रोजाना हो रहा 75 हजार का नुकसान
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दातागंज (बदायूं)। जिला मुख्यालय से दातागंज रोड पर करीब 50 डग्गामार गाड़ियां दौड़ रहीं हैं। इससे परिवहन निगम को रोजाना लगभग 75 हजार की क्षति हो रही है। बावजूद इसके डग्गामारी रोकने को परिवहन और पुलिस महकमा कतई गंभीर नहीं है।
समय-समय पर शासन डग्गामार वाहनों को रोकने के लिए परिवहन विभाग और प्रशासन को निर्देश देता है। कुछ दिन तो उसका असर नजर आता है, लेकिन बाद में वहीं स्थिति हो जाती है। दातागंज-बदायूं रोड पर इस वक्त लगभग 50 डग्गामार वाहन दौड़ रहे हैं। खास बात तो यह है कि यह डग्गामार वाहन दातागंज, मूसाझाग, सिविल लाइन और कोतवाली सदर की सीमा से गुजरते हैं। भेड़-बकरियों की तरह इनमें सवारियों को भरा जाता है, लेकिन फिर भी पुलिस सब कुछ देखते हुए भी इन पर अंकुश नहीं लगा पा रही है। एक गाड़ी दिन भर में पांच से छह चक्कर लगाती है। बदायूं और यहां पर रोडवेज स्टैंड से ही यात्रियों को उठाया जाता है। जहां पर हर वक्त पुलिस और रोडवेज कर्मचारी रहते हैं। इनमें यात्रियों से मनमाना किराया भी वसूला जाता है।
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दो दशक पहले तक अच्छी रही रोडवेज सेवा
इस रोड पर करीब दो दशक पहले तक रोडवेज की अच्छी सेवा रही थी। यात्रियों को दोनों ओर से हर 20 मिनट पर बस मिलती थी, लेकिन डग्गामारी बढ़ जाने के बाद से रोडवेज की बसें कम हो गईं। कई बार गंभीर हादसे हुए हैं जिनमें लोगों की जान गई है। इसके बाद भी पुलिस और परिवहन विभाग इन पर अंकुश नहीं लगा सका है।
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अनुबंधित बसों का बनना था डिपो
तीन-चार साल पहले यहां के दौरे पर आए परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) ने घोषणा की थी दातागंज को अनुबंधित बसों का डिपो बनाया जाएगा, लेकिन ऐसा अब तक नहीं हो सका है। केवल तीन अनुबंधित बसों का संचालन हो रहा है। इनमें दो आगरा और एक चंदौसी को है। यह बसें भी बदायूं से ही जाती हैं।
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डग्गामार वाहनों से डिपो को रोजाना लगभग 75 हजार राजस्व की हानि हो रही है। यदि इन पर अंकुश लग जाए तो यात्रियों को हर आधा घंटे में रोडवेज सेवा देने को तैयार हैं। डग्गामारी रोकने के लिए वह परिवहन और पुलिस महकमे को कई बार लिख चुके हैं।
-राजेश कुमार, एआरएम, बदायूं
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समय-समय पर शासन डग्गामार वाहनों को रोकने के लिए परिवहन विभाग और प्रशासन को निर्देश देता है। कुछ दिन तो उसका असर नजर आता है, लेकिन बाद में वहीं स्थिति हो जाती है। दातागंज-बदायूं रोड पर इस वक्त लगभग 50 डग्गामार वाहन दौड़ रहे हैं। खास बात तो यह है कि यह डग्गामार वाहन दातागंज, मूसाझाग, सिविल लाइन और कोतवाली सदर की सीमा से गुजरते हैं। भेड़-बकरियों की तरह इनमें सवारियों को भरा जाता है, लेकिन फिर भी पुलिस सब कुछ देखते हुए भी इन पर अंकुश नहीं लगा पा रही है। एक गाड़ी दिन भर में पांच से छह चक्कर लगाती है। बदायूं और यहां पर रोडवेज स्टैंड से ही यात्रियों को उठाया जाता है। जहां पर हर वक्त पुलिस और रोडवेज कर्मचारी रहते हैं। इनमें यात्रियों से मनमाना किराया भी वसूला जाता है।
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दो दशक पहले तक अच्छी रही रोडवेज सेवा
इस रोड पर करीब दो दशक पहले तक रोडवेज की अच्छी सेवा रही थी। यात्रियों को दोनों ओर से हर 20 मिनट पर बस मिलती थी, लेकिन डग्गामारी बढ़ जाने के बाद से रोडवेज की बसें कम हो गईं। कई बार गंभीर हादसे हुए हैं जिनमें लोगों की जान गई है। इसके बाद भी पुलिस और परिवहन विभाग इन पर अंकुश नहीं लगा सका है।
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अनुबंधित बसों का बनना था डिपो
तीन-चार साल पहले यहां के दौरे पर आए परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) ने घोषणा की थी दातागंज को अनुबंधित बसों का डिपो बनाया जाएगा, लेकिन ऐसा अब तक नहीं हो सका है। केवल तीन अनुबंधित बसों का संचालन हो रहा है। इनमें दो आगरा और एक चंदौसी को है। यह बसें भी बदायूं से ही जाती हैं।
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डग्गामार वाहनों से डिपो को रोजाना लगभग 75 हजार राजस्व की हानि हो रही है। यदि इन पर अंकुश लग जाए तो यात्रियों को हर आधा घंटे में रोडवेज सेवा देने को तैयार हैं। डग्गामारी रोकने के लिए वह परिवहन और पुलिस महकमे को कई बार लिख चुके हैं।
-राजेश कुमार, एआरएम, बदायूं