फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   जिले में बेकाबू हुआ बुखार, स्वास्थ्य महकमा फेल, अब तक 32 मरे

जिले में बेकाबू हुआ बुखार, स्वास्थ्य महकमा फेल, अब तक 32 मरे

Sat, 01 Sep 2018 10:05 PM IST
Updated Sat, 01 Sep 2018 10:05 PM IST
विज्ञापन
जिले में बेकाबू हुआ बुखार, स्वास्थ्य महकमा फेल, अब तक 32 मरे
फोटो--9, 10
विज्ञापन


बेकाबू हुआ बुखार, स्वास्थ्य महकमा फेल
इलाज के नाम पर खानापूर्ति, जहां लग रहे कैंप वहीं मर रहे लोग, 11 और लोगों ने तोड़ा दम
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जिले में बुखार बेकाबू हो गया है। 11 और लोगों की मौत के साथ अब तक 32 लोगों की मौत हो चुकी है। घर-घर लोग चारपाई पर पड़े हैं। लोग दहशत में हैं मगर स्वास्थ्य विभाग कैंप लगाने और गांवों में टीमें भेजने के नाम पर खानापूर्ति करा रहा है। खास बात यह है कि जिन गांवों में स्वास्थ्य विभाग कैंप लगाने या टीम भेजने का दावा कर रहा है वहीं लोगों की मौत हो रही है।
गतवर्ष इसी तरह जिले के कई ब्लाक क्षेत्रों में बुखार फैला था। कई लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग वायरल की चपेट में आए थे। सबसे प्रभावित ककराला, जगत क्षेत्र रहे थे। इतना ही नहीं कई मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई थी। स्वास्थ्य विभाग को अच्छी तरह पता था कि गतवर्ष बुखार से देहात क्षेत्र के बद से बदतर हालात हो गए थे। एक बार को बुखार कंट्रोल करना मुश्किल हो गया था। ठीक उसी तरह एक सप्ताह में बुखार ने धीरे-धीरे समूचे जिले को चपेट में ले लिया है। 15 साल से नीचे के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं। वायरल ने सबसे पहले मनिकापुर कौंर में दस्तक दी थी। इस गांव में तीन लोगों की जान लेने के साथ आस-पास के कई गांवों में बुखार फैल गया। अब तो कुछ गांव में पूरे परिवार के परिवार बुखार से पीड़ित हैं। इनमें सिसैईया और फीरोजपुर में दो-दो सौ, वराही में ढाई सौ, अमरौली में तीन सौ, गुलड़िया में दो सौ, मनिकापुर कौंर में तीन सौ, सराय पिपरिया में डेढ़ सौ, मौजमपुर में दो सौ, तजपुरा में 50, लखनपुर में सौ, उतरना में करीब सौ लोग बुखार से पीड़ित हैं। इनके अलावा कई गांव ऐसे हैं जहां की गिनती नहीं लगाई है। इन हालात में स्वास्थ्य विभाग के दावे पूरी तरह से फेल हो चुके हैं। इलाज के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है।
विज्ञापन

बुखार कंट्रोल के दौरान एक बात और सामने आई है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम जिस गांव में कैंप लगाकर लोगों के इलाज का दावा कर रही है। वहीं स्थिति अधिक भयावह है।
विज्ञापन
विज्ञापन

------------------
फोटो--8, 11,
लापरवाही के रिकार्ड तोड़ रहा जिला अस्पताल
बदायूं। ज्वाइंट डायरेक्टर हरीश चंद्रा ने शुक्रवार को जिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान साफ तौर पर कहा था कि दो दिन के अंदर डेंगू और मलेरिया वार्ड तैयार कर लें। जो व्यवस्था करनी हों, उन्हें पूरा कर लें। परंतु अब तक जिला अस्पताल में डेंगू वार्ड में उसमें साफ-सफाई तक नहीं हुई है। वार्ड में गंदी चादरें, गंदा फर्श, बगैर चादरों के बेड पड़े हैं। उन पर मरीज लेटे हैं। इधर, मलेरिया वार्ड के भी कुछ ऐसे ही हालात हैं। जिला अस्पताल का रवैया देखे तो दोनों वार्ड ठीक कराने में एक सप्ताह लग जाएगा। यह सब जिला प्रशासन की अनदेखी से भी हो रहा है।
-------------------------
इंसेट---
दो बच्चों की मौत के बाद जागे डॉक्टर
उझानी। ब्लॉक क्षेत्र के गांव गठौना में भी बच्चों को बुखार ने चपेट में लेना शुरू कर दिया है। शुक्रवार रात दो बच्चों की मौत की जानकारी सीएचसी के चिकित्साधीक्षक को अपराह्न में लगी। तब कहीं शनिवार शाम पांच बजे डॉक्टर के साथ स्वास्थ्य कर्मियों की टीम को मौके पर भेजा गया। गठौना निवासी ओमप्रकाश के 15 वर्षीय पुत्र धारा सिंह को शुक्रवार शाम को बुखार आया था। घरवालों ने दवा भी खिला दी लेकिन देर रात उसकी हालत बिगड़ गई और बाद में मौत हो गई। इससे पहले शुक्रवार शाम को ही गांव के आशीष ठाकुर की 11 महीने की बेटी अनन्या ने दमतोड़ दिया था। आठ घंटे के दौरान दो बच्चों की मौत से गांव में हड़कंप मच गया। इसके अलावा पड़ोसी गांव बसोमा, बुटला और तौलकपुर में बुखार ने पैर पसार लिए हैं। प्रतिरक्षण टीम से चिकित्साधीक्षक डॉ. निरंजन सिंह ने जानकारी की तो स्वास्थ्य कर्मियों ने पता होने से इंकार कर दिया। चिकित्साधीक्षक ने बताया कि जो बच्चे बीमार हैं, उनका मौके पर ही इलाज किया जाएगा।
-------------------------
फोटो-25, 28
सिंगरौरा गांव में बुखार का प्रकोप, स्वास्थ्य विभाग अंजान कुंवरगांव। सालारपुर विकास खंड क्षेत्र के ग्राम सिंगरौरा गांव में बुखार ने तेजी से पांव पसार लिए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में करीब महीने भर से बुखार का प्रकोप बना है। ऐसा कोई घर नहीं है, जिसमें कोई पीड़ित न हो। इस बारे में कई बार वह स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सूचना दे चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। गांव में दयाराम (45), कमलेश (42), उदयवीर (35), रामवीर सिंह (52), मीना (20), शिवानी (16), रिषभ (19),संतोष (20), मोहित (3), रवेन्द्र पाल (28), रघुवीर (60), नन्हे सिंह (40), दीक्षा (16), गजेन्द्र (35) समेत नवजात प्रतीक्ष (02 माह) पुत्र विजयवीर आदि बुखार से पीड़ित है।
इधर, बुखार की चपेट में आने से बालक उदित की मौत स ेपरिवार में कोहराम मचा है।
---------------------- फोटो---26
इलाज करने घर-घर पहुंच रहे झोलाछाप
कुंवरगांव। जिले में वायरल बुखार फैलने से झोलाछाप की मौज आ गई है। जिस तरह बीमारों की संख्या बढ़ रही है। उसी तरह झोलाछाप भी क्लीनिक छोड़कर गांव में घर-घर पहुंच रहे हैं। इस समय भांसी गांव में झोलाछाप ने बीमार लोगों के घरों में ही इलाज शुरू कर दिया है। कई घरों में चारपाई के ऊपर बोतल लटक रही है।
-------------------------------------
इलाज में लापरवाही से दम तोड़ रहे लोग
दातागंज। दातागंज और समरेर ब्लाक क्षेत्र के एक दर्जन गांव बुखार की चपेट में आ चुके हैं। यह वे गांव हैं, जहां से जिला मुख्यालय 30-35 किलोमीटर दूर है। दातागंज कस्बा आठ से दस किलोमीटर दूर है। परिवार वाले जहां मौका मिल रहा है। वहीं से दवा ले लेते हैं। बुखार उतर जाता है, तो घर बैठ जाते हैं। अधिक हालत बिगड़ती है तो वह मरीज को लेकर बड़े अस्पताल दौड़ते हैं। तब तक उसकी मौत हो जाती है। इसकी वजह अस्पताल की दूरी और धन का अभाव माना जा रहा है। कुछ गांव में लोग दवा तक नहीं ले पा रहे हैं। अंधरऊ में बुखार से मरे बालक के इलाज के लिए गांव वालों ने चंदा किया था। तब कहीं उसे बल्लिया भेजा गया था। उसका एक भाई आज भी बुखार की वजह से जिंदगी और मौत से जूझ रहा है।
-----------------------------------------
बच्चों की मौत से परिवार में मातमी माहौल
वजीरगंज। विकास खंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत रोटा के मजरा नगरिया में बुखार की चपेट में आने से ओमशंकर के 12 वर्षीय बेटे केशव और शेरअंदाजपुर निवासी लईक खान की 15 वर्षीय बेटी साजिया की मौत हो गई। इन बच्चों की मौत के बाद उनके परिवार में मातमी माहौल है। केशव के परिजनों ने बताया कि बुखार आने पर वह केशव को प्राइवेट डॉक्टर के पास ले गए। सुधार न होने पर बरेली ले गए, जहां उसकी रास्ते में हो गई। इनके अलावा गांव में कई लोग बीमार हैं। वह भी प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं।
------------------------------------------------- फोटो-39
हर तरफ गंदगी ही गंदगी माने मनिकापुर कौंर गांव
मूसाझाग। ब्लाग जगत क्षेत्र में मनिकापुर कौंर वही गांव है, जहां सबसे पहले बुखार फैला था। एक के बाद एक करके कई लोग बीमार पड़ गए। गांव की हालत पर गौर करें तो सड़कें कीचड़ से लबालब भरी पड़ी हैं। जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। कहीं-कहीं तो लोगों को सड़क से पैदल निकलना तक दूभर है। गांव में न तो पानी निकलने का साधन है और न ही कहीं डलाव घर है। घूरे और कूड़े के ढेरों से दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। सफाई के नाम पर गांव में आज तक छिड़काव तक नहीं कराया गया। यही वजह है कि बदलते मौसम में बीमारों की संख्या बढ़ रही है।


फोटो-40
ग्राम सराय पिपरिया: घुसते ही गंदगी का अहसास
मूसाझाग। क्षेत्र के ग्राम सराय पिपरिया में घुसते ही गंदगी का अहसास हो जाएगा। गांव के बाहर गंदगी के ढेर लगे हैं। मुख्य मार्ग पर जलभराव है। जहां से लोगों का पैदल निकलना मुश्किल है। इससे बदतर हालात गांव के अंदर हैं। ग्रामीणों की माने तो आज तक गांव में मच्छरों को खत्म करने के लिए छिड़काव तक नहीं किया गया। आज इस गांव में करीब डेढ़ सौ लोग बीमारी से जूझ रहे हैं।


फोटो-41
जगुआसई की हालात बद से बदतर
मूसाझाग। ग्राम जगुआसई में बुखार ने पैर पसार लिए हैं। यहां हालात बद से बदतर हैं। गांव में जलभराव और गंदगी की भरमार है। यहां सड़कें टूटी हुई हैं। सड़कों पर जलभराव होने से पैदल निकलना मुश्किल है। ग्रामीणों की मानें तो गांव में काफी दिनों से सफाई नहीं हुई है। इसके परिणामस्वरूप गांव के लोग बुखार से जूझ रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed