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सरसों पर आफत बनकर टूटी आंधी-बरसात, फसल को 20 फीसदी नुकसान
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उझानी (बदायूं)। सर्द मौसम में सरसों उत्पादकों का हलक सूख गया है। सूखे भी क्यों नहीं, सरसों की फसल पकने को जो तैयार है। सोमवार शाम को आंधी चली फिर देर रात तक बूंदाबांदी होती रही। सुबह तक खेतों में करीब 20 फीसदी सरसों जमीन पर गिर गई।
खेतों में पकने को तैयार सरसों की फसल के लिए नुकसानदेह साबित हुई आंधी और वर्षा ने सबसे ज्यादा प्रभाव कटरी क्षेत्र में डाला है। कटरी में सरसों की फसल इस बार बहुतायत हुई है। हालांकि जिले में ऐसा कोई इलाका नहीं जहां किसानों का सरसों की ओर रुझान नहीं रहा हो। शुरू में मौसम का भी फसल को साथ मिला था, लेकिन दो दिन से स्थिति विपरीत हो गई है। खेतों में 20 फीसदी तक सरसों की फसल जमीन पर गिर गई है। किसानों की मानें तो जो पौधे आंधी-वर्षा में गिर गए, उनके फलियों में दाना सड़ जाएगा। ऐसे में उत्पादन भी गिरेगा।
आलू के खेतों में कुछ स्थानों पर बारिश का पानी जरूर भर गया है लेकिन फिलहाल किसी खास नुकसान की आशंका नहीं है। आलू उत्पादकों का कहना है कि जलभराव ज्यादा हुआ तो नुकसान से नहीं बचा जा सकता।
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इधर, गेहूं के लिए यह बारिश संजीवनी साबित हुई है। तापमान में गिरावट के साथ गेहूं के पौधों को बढ़वार भी मिलेगी।
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बारिश की बूंदों से पौधों की पत्तियों का कार्बन गायब
उझानी। गेहूं और सब्जी फसलों के लिए फायदे का सौदा बनी वर्षा ने सबसे अच्छा लाभ पौधों की पत्तियों को पहुंचाया है। हवा के झोंको के साथ पत्तेदार सब्जियों पर धूल-मिट्टी कार्बन की तरह जम जाती है। वर्षा के दिनों में पत्तियों से कार्बन धुल जाता है। बरसात के बाद खेतों में भी हरियाली लौट आई है।
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आंधी और वर्षा की वजह से नुकसान सरसों की फसल को ज्यादा हुआ है। अब सरसों को पकने में एक सप्ताह ज्यादा समय लगेगा। किसानों को आलू के खेतों में बरसाती पानी के निकास का भी अभी से बंदोबस्त कर लेना चाहिए।
- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक
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खेतों में पकने को तैयार सरसों की फसल के लिए नुकसानदेह साबित हुई आंधी और वर्षा ने सबसे ज्यादा प्रभाव कटरी क्षेत्र में डाला है। कटरी में सरसों की फसल इस बार बहुतायत हुई है। हालांकि जिले में ऐसा कोई इलाका नहीं जहां किसानों का सरसों की ओर रुझान नहीं रहा हो। शुरू में मौसम का भी फसल को साथ मिला था, लेकिन दो दिन से स्थिति विपरीत हो गई है। खेतों में 20 फीसदी तक सरसों की फसल जमीन पर गिर गई है। किसानों की मानें तो जो पौधे आंधी-वर्षा में गिर गए, उनके फलियों में दाना सड़ जाएगा। ऐसे में उत्पादन भी गिरेगा।
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आलू के खेतों में कुछ स्थानों पर बारिश का पानी जरूर भर गया है लेकिन फिलहाल किसी खास नुकसान की आशंका नहीं है। आलू उत्पादकों का कहना है कि जलभराव ज्यादा हुआ तो नुकसान से नहीं बचा जा सकता।
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इधर, गेहूं के लिए यह बारिश संजीवनी साबित हुई है। तापमान में गिरावट के साथ गेहूं के पौधों को बढ़वार भी मिलेगी।
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बारिश की बूंदों से पौधों की पत्तियों का कार्बन गायब
उझानी। गेहूं और सब्जी फसलों के लिए फायदे का सौदा बनी वर्षा ने सबसे अच्छा लाभ पौधों की पत्तियों को पहुंचाया है। हवा के झोंको के साथ पत्तेदार सब्जियों पर धूल-मिट्टी कार्बन की तरह जम जाती है। वर्षा के दिनों में पत्तियों से कार्बन धुल जाता है। बरसात के बाद खेतों में भी हरियाली लौट आई है।
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आंधी और वर्षा की वजह से नुकसान सरसों की फसल को ज्यादा हुआ है। अब सरसों को पकने में एक सप्ताह ज्यादा समय लगेगा। किसानों को आलू के खेतों में बरसाती पानी के निकास का भी अभी से बंदोबस्त कर लेना चाहिए।
- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक