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धान खरीद का 60 फीसदी लक्ष्य घटा
बदायूं, ब्यूरो
Updated Fri, 25 Nov 2016 11:37 PM IST
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55 दिन में खरीद पाए महज 5592 मीट्रिक टन धान
धान खरीद का लक्ष्य घटाकर 40720 मीट्रिक टन किया
हजार, पांच सौ रुपये की नोटबंदी से अधिकांश लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही तमाम विभागों को इससे नुकसान हो रहा है। इससे धान खरीद का लक्ष्य भी पिछड़ता जा रहा है, लेकिन इस ओर प्रशासन का फोकस नहीं हो पा रहा है। इससे खरीद केंद्रों पर न के बराबर किसान पहुंच रहे हैं। ऐसे में आढ़तियों के माध्यम से खरीद की जा रही है। लक्ष्य पूरा न होता देखकर शासन ने लक्ष्य को करीब 60 फीसदी घटा दिया गया है। इसके पीछे मुख्य वजह खुले बाजार में समर्थन मूल्य के बराबर ही बिकना बताया जा रहा है।
वित्त वर्ष 2015-16 की तुलना में चालू वित्त वर्ष 2016-17 में धान खरीद का लक्ष्य दोगुना कर दिया गया था। इस वर्ष लक्ष्य एक लाख मीट्रिक टन का दिया था। इसके लिए मार्केटिंग, पीसीएफ, यूपीएसएस, यूपी एग्रो, एसएफसी, नेफा, एफसीआई के 29 क्रय केंद्र बनाए गए थे। इन क्रय केंद्रों पर एक अक्तबूर को शुरू हुई धान खरीद में पूरा माह बीत जाने के बावजूद जब खरीद न के बराबर हुई तो नवंबर के दूसरे सप्ताह में धान खरीद लक्ष्य में से 12 हजार मीट्रिक टन घटाकर 88 हजार मीट्रिक टन कर दिया गया था। बावजूद इसके जब धान खरीद की कछुआ गति में कोई तेजी नहीं आई तो फिर से लक्ष्य घटाकर आधे से कम कर दिया गया। शासन से आए निर्देशों के अनुसार जिले में धान खरीद का लक्ष्य अब केवल 40720 मीट्रिक टन शेष बचा है।
अगर जिले के 29 धान क्रय केंद्रों पर 55 दिनों में महज 5592 मीट्रिक टन धान की खरीद 24 नवंबर तक हो पाई है, जबकि शेष 35128 मीट्रिक टन धान अब अब दो माह और एक सप्ताह में खरीदना होगा, जो क्रय एजेंसियों की लापरवाही के चलते पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। धान क्रय केंद्रों पर किसानों के धान न बेचने की वजह यह भी है कि शासन से तय धान समर्थन मूल्य सामान्य 1470 रुपये और ‘ए’ श्रेणी 1510 रुपये हैं। वहीं, बाजार में धान की कीमत इसके बराबर ही है। इससे किसान क्रय केंद्रों पर धान बेचने से बच रहा है।
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शासन से मिले निर्देशों के अनुक्रम में धान क्रय केंद्र का लक्ष्य घटाकर 40720 मीट्रिक टन कर दिया गया है। पहले यह लक्ष्य एक लाख मीट्रिक टन था। घटाने की वजह के बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बताया गया।
-हवलदार यादव, एडीएम वित्त एवं राजस्व
धान खरीद का लक्ष्य घटाकर 40720 मीट्रिक टन किया
हजार, पांच सौ रुपये की नोटबंदी से अधिकांश लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही तमाम विभागों को इससे नुकसान हो रहा है। इससे धान खरीद का लक्ष्य भी पिछड़ता जा रहा है, लेकिन इस ओर प्रशासन का फोकस नहीं हो पा रहा है। इससे खरीद केंद्रों पर न के बराबर किसान पहुंच रहे हैं। ऐसे में आढ़तियों के माध्यम से खरीद की जा रही है। लक्ष्य पूरा न होता देखकर शासन ने लक्ष्य को करीब 60 फीसदी घटा दिया गया है। इसके पीछे मुख्य वजह खुले बाजार में समर्थन मूल्य के बराबर ही बिकना बताया जा रहा है।
वित्त वर्ष 2015-16 की तुलना में चालू वित्त वर्ष 2016-17 में धान खरीद का लक्ष्य दोगुना कर दिया गया था। इस वर्ष लक्ष्य एक लाख मीट्रिक टन का दिया था। इसके लिए मार्केटिंग, पीसीएफ, यूपीएसएस, यूपी एग्रो, एसएफसी, नेफा, एफसीआई के 29 क्रय केंद्र बनाए गए थे। इन क्रय केंद्रों पर एक अक्तबूर को शुरू हुई धान खरीद में पूरा माह बीत जाने के बावजूद जब खरीद न के बराबर हुई तो नवंबर के दूसरे सप्ताह में धान खरीद लक्ष्य में से 12 हजार मीट्रिक टन घटाकर 88 हजार मीट्रिक टन कर दिया गया था। बावजूद इसके जब धान खरीद की कछुआ गति में कोई तेजी नहीं आई तो फिर से लक्ष्य घटाकर आधे से कम कर दिया गया। शासन से आए निर्देशों के अनुसार जिले में धान खरीद का लक्ष्य अब केवल 40720 मीट्रिक टन शेष बचा है।
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अगर जिले के 29 धान क्रय केंद्रों पर 55 दिनों में महज 5592 मीट्रिक टन धान की खरीद 24 नवंबर तक हो पाई है, जबकि शेष 35128 मीट्रिक टन धान अब अब दो माह और एक सप्ताह में खरीदना होगा, जो क्रय एजेंसियों की लापरवाही के चलते पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। धान क्रय केंद्रों पर किसानों के धान न बेचने की वजह यह भी है कि शासन से तय धान समर्थन मूल्य सामान्य 1470 रुपये और ‘ए’ श्रेणी 1510 रुपये हैं। वहीं, बाजार में धान की कीमत इसके बराबर ही है। इससे किसान क्रय केंद्रों पर धान बेचने से बच रहा है।
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शासन से मिले निर्देशों के अनुक्रम में धान क्रय केंद्र का लक्ष्य घटाकर 40720 मीट्रिक टन कर दिया गया है। पहले यह लक्ष्य एक लाख मीट्रिक टन था। घटाने की वजह के बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बताया गया।
-हवलदार यादव, एडीएम वित्त एवं राजस्व