चार नोटिस पर भी 55 करोड़ का हिसाब नहीं दे रहे प्रधान
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ग्राम पंचायतों का चुनाव नजदीक है। चुनाव से पहले ही जिले के सभी ग्राम प्रधानों से डीपीआरओ कार्यालय हिसाब मांग रहा है। इसके लिए चार नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं, लेकिन ग्राम प्रधानों ने कोई जवाब नहीं दिया है। अब तक के कार्यकाल में जिले के 885 प्रधानों को वैसे तो डेढ़ अरब से ज्यादा धनराशि विकास कार्यों को मिली, लेकिन इसका हिसाब-किताब देने में प्रधान सकुचा रहे हैं। पंचायतीराज व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायतों को राज्यवित्त और 13वें वित्त से विकास कार्यों को राशि मिलती है। 13वें वित्त की राशि केंद्र सरकार देती है और ग्राम पंचायतों के सीधे खाते में जाती है। इस धनराशि के बारे में तो कोई जानकारी लेता ही नहीं है। राज्य वित्त से इस वर्ष प्रधानों को 55,40,15,000 रुपये मिले थे। मार्च में वित्तीय वर्ष पूरा होने के बाद भी प्रधानों ने इस धन से विकास कार्यों की कार्य पूर्ति और उपभोग प्रमाण पत्र डीपीआरओ कार्यालय नहीं भेजे। वैसे तो प्रधानों को जो विकास कराते जाएं, उसकी कार्य पूर्ति और उपभोग प्रमाण पत्र देते जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नही होता। वित्तीय वर्ष पूरा होने के बाद भी प्रधानों ने कार्यपूर्ति और उपभोग प्रमाण पत्र नहीं दिया है। यहां बता दें कि अपने कार्यकाल में प्रधानों ने करीब डेढ़ अरब रुपये का कार्य किया और इससे कुछ कम राशि राज्य वित्त से प्राप्त कर खर्च कर ली।
दोषी प्रधानों के सहयोगी हैं ग्राम पंचायत सचिव
विकास कार्य कराने और उनकी प्रगति रिपोर्ट देने में ग्राम सचिव की भूमिका अहम होती है, लेकिन राजनीतिक दबाव में कहीं प्रधान हावी हैं, तो कहीं सचिव। अधिकांश सचिव खुद खाओ और खिलाओ की नीति पर चलते हुए मौज ले रहें हैं और लग्जरी गाड़ियों में चल रहे हैं। विभाग प्रधानों को बार-बार नोटिस जारी कर रहा है। सचिवों की जिम्मेदारियां निर्धारित नहीं कर पा रहा है।
बदायूं में पटरी से उतर गया है पंचायतीराज
लोकतंत्र की सबसे निचली इकाई पंचायतीराज अब पटरी से उतरती दिखाई दे रही है। विकास कार्यों का धन पंचायतों में सबसे अधिक बर्बाद हो हो रहा है। ग्राम पंचायतों से पूछताछ तो हो जाती है, लेकिन क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत में धन के दुरुपयोग की पूछताछ भी नहीं हो पा रही है। करोड़ों रुपया घटिया निर्माण में खपाया जा रहा है।
ग्राम प्रधानों से विकास कार्यों की पूर्ति और उपभोग प्रमाम दिए जाने की व्यवस्था है। इसके बाद भी ग्राम पंचायतों से कार्यपूर्ति और उपभोग प्रमाण पत्र नहीं मिल रहे हैं। चार बार सभी प्रधानों को नोटिस भी जारी कर दिए गए हैं, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा है। नोटिस के बाद सख्त कार्रवाई को कदम उठाने होंगे।
- राजेश यादव, डीपीआरओ