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जिले में पक्षियों की मिलीं 48 प्रजाति
अमर उजाला, बदायूं
Updated Mon, 07 Dec 2015 08:19 PM IST
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शासन के निर्देश पर पूरे प्रदेश में एक साथ सभी जिलों में चार दिसंबर को सुबह छह बजे से रात्रि आठ बजे तक एक विशेष अभियान चलाया गया। एक दिन में एक साथ और एक समय पर अभियान चलाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड बनाने की मंशा भी इसमें शामिल थी। इस अभियान के तहत जिले में पक्षियों की प्रजाति का पता लगाया गया। यहां डीएफओ समेत 225 कर्मचारियों ने जिले के जंगलीय क्षेत्र, जलाशयों और नदियों के किनारे अनवरत पक्षियों की प्रजातियों को खोजा। उनके प्रयास रंग लाए। वन विभाग को जिले में पक्षियों की 48 प्रजातियों का पता चला है।
प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां भी दिखीं
बदायूं। प्रवासी पक्षियों की प्रजाति मिली है, इनमें गज पांव, ब्लैक बिंग स्टेट, घोंझिल, पन कौवा, सींखपर आदि के अलावा साइबेरियान पक्षी भी शामिल हैं। सहसवान झील पर तीतर, बटेर और नीलकंठ भी देखे गए।
विलुप्त होती जा रही प्रजातियों के पक्षी भी मिले
बदायूं। जिले में विलुप्त होते गिद्ध को छोड़ दें, तो विलुप्त होने की श्रेणी में आने वाले नीलकंठ, उल्लू, गौरेया, फाख्ता भी देखी गईं।
कछला और सहसवान में मिलीं तमाम प्रजाति
बदायूं। वैसे तो पूरे जिले में पक्षियों की प्रजातियों को खोजा गया, लेकिन सबसे अधिक प्रजाति सहसवान और कछला क्षेत्र में प्राप्त हुईं। इन सभी प्रजातियों की रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी गई है।
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शासन स्तर से प्रदेश में एक अभियान चलाकर एक दिन और एक ही समय में पक्षियों की प्रजाति खोजी गईं थी कि शायद वर्ल्ड रिकार्ड के रूप में गिनीज बुक में प्रदेश का नाम शामिल हो जाए। चार दिसंबर को खोजी गई पक्षियों की प्रजाति की सूची शासन को भेज दी गई है। ऐसा जिले और प्रदेश में पहली बार हुआ है।
- समीर कुमार, डीएफओ, बदायूं
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प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां भी दिखीं
बदायूं। प्रवासी पक्षियों की प्रजाति मिली है, इनमें गज पांव, ब्लैक बिंग स्टेट, घोंझिल, पन कौवा, सींखपर आदि के अलावा साइबेरियान पक्षी भी शामिल हैं। सहसवान झील पर तीतर, बटेर और नीलकंठ भी देखे गए।
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विलुप्त होती जा रही प्रजातियों के पक्षी भी मिले
बदायूं। जिले में विलुप्त होते गिद्ध को छोड़ दें, तो विलुप्त होने की श्रेणी में आने वाले नीलकंठ, उल्लू, गौरेया, फाख्ता भी देखी गईं।
कछला और सहसवान में मिलीं तमाम प्रजाति
बदायूं। वैसे तो पूरे जिले में पक्षियों की प्रजातियों को खोजा गया, लेकिन सबसे अधिक प्रजाति सहसवान और कछला क्षेत्र में प्राप्त हुईं। इन सभी प्रजातियों की रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी गई है।
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शासन स्तर से प्रदेश में एक अभियान चलाकर एक दिन और एक ही समय में पक्षियों की प्रजाति खोजी गईं थी कि शायद वर्ल्ड रिकार्ड के रूप में गिनीज बुक में प्रदेश का नाम शामिल हो जाए। चार दिसंबर को खोजी गई पक्षियों की प्रजाति की सूची शासन को भेज दी गई है। ऐसा जिले और प्रदेश में पहली बार हुआ है।
- समीर कुमार, डीएफओ, बदायूं