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चीनी मिल शुरू होते ही मुश्किलों से जूझने लगने गन्ना किसान
Updated Fri, 07 Dec 2018 01:12 AM IST
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चीनी मिलें शुरू होते ही गन्ना किसानों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। कहीं अब तक गन्ना क्रय केंद्र नहीं खुले हैं, तो कहीं क्रय गन्ने पर खरीद नहीं की जा रही है। इससे क्रय केंद्र पर ट्रॉलियों में लगा गन्ना सूख रहा है। कई क्रय केंद्रों पर रिजेक्टेड प्रजाति का गन्ना बनाकर लौटा दिया जा रहा है। गन्ने की तौल न होने से किसान बेहद परेशान हैं।
जिले के गन्ना किसानों को अब तक पूरा बकाया भुगतान नहीं हुआ है। नवंबर के आखिरी सप्ताह से जिले की दोनों चीनी मिलें शेखूपुर की सहकारी चीनी मिल और बिसौली की यदु शुगर मिल चालू हो चुकी हैं। पिछले वर्ष चीनी मिलों ने गन्ने की कुछ प्रजातियों को रिजेक्टेड घोषित किया था। इस पर शासन ने रिजेक्टेड प्रजाति का गन्ना न बोने के लिए आदेश जारी किया था। इस साल जिले में 13670 हेक्टेयर गन्ने की पेड़ी है। विभाग के मुताबिक इसमें करीब दो हजार हेक्टेयर में अस्वीकृत प्रजाति का गन्ना है। अब चीनी मिल वाले रिजेक्टेड गन्ने को खरीदने से मना कर रहे हैं। कुछ केंद्रों पर रिजेक्टेड प्रजाति का गन्ना न होने के बावजूद खरीदने से मना कर दिया जाता है। ऐसे में गन्ना किसान बेहद परेशान हैं। उन्हें मजबूरी में औने-पौने दामों पर गन्ना कोल्हू पर बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। आरोप है कि चीनी मिल वाले माफिया से साठगांठ के चलते गन्ना किसानों को परेशान कर रहे हैं।
लखनपुर में नहीं खुला केंद्र बदायूं। शहर से सटे ग्राम लखनपुर में हर साल ए और बी दो क्रय केंद्र बनाए जाते थे। इनमें एक सहकारी चीनी मिल शेखूपुर और दूसरा यदु शुगर मिल का होता था। मगर इस बार दोनों क्रय केंद्र यदु शुगर मिल को दे दिए गए। लखनपुर में एक क्रय केंद्र दो दिसंबर को खोल दिया गया था। किसानों के मुताबिक 26 नवंबर जारी की गई पर्चियों में दो दिसंबर को तौल होना लिखा गया था। किसान पर्ची पर लिखी तारीख के मुताबिक ट्रैक्टर-ट्रॉली से गन्ने लेकर लखपुर क्रय केंद्र पहुंच गए। मगर तौल गुरुवार देर शाम तक शुरू नहीं हुई। इससे ट्रॉलियों में भरा गन्ना सूख रहा है। परेशान किसान बुधवार को जिला गन्ना अधिकारी से भी मिले थे। किसानों के मुताबिक लखनपुर का दूसरा क्रय केंद्र अब तक खोला ही नहीं गया।
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गन्ने की अस्वीकृत प्रजातियां चीनी मिल प्रशासन की ओर से इस बार कई गन्ने की प्रजातियों को अस्वीकृत कर दिया है। इससे 92421, 91269, 96275, 98231, 96268 को अस्वीकृत घोषित कर दिया है।
क्या बोले किसान
पिछले वर्षों की भांति इस साल भी सेंटर तो लगा दिए। लेकिन अब तक गन्ने की खरीद शुरू नहीं हो सकी है। इससे गेहूं भी नहीं बोए जा रहे हैं।
-सतेंद्र सिंह, किसरुआ
हमारे पास तो स्वीकृत प्रजाति का गन्ना है, पर फिर भी पर्ची नहीं मिल रही है। जिससे गेहूं बोने के लिए मात्र 80 रुपये क्विंटल में कोल्हू पर बेचने को मजबूर हैं।
- ज्ञानदीप शर्मा, नरेली
एक तो गन्ना मिल ने पिछले साल का बकाया नहीं दिया है। दूसरा गन्ना खरीदने में हीलाहवाली कर रही हैं। ऐसे में कैसे होगी गेहूं की बुवाई। इस साल तो गन्ने के खेत भी खाली करना मुश्किल हो रहा है।
-सर्वेश, बेला
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जिले के गन्ना किसानों को अब तक पूरा बकाया भुगतान नहीं हुआ है। नवंबर के आखिरी सप्ताह से जिले की दोनों चीनी मिलें शेखूपुर की सहकारी चीनी मिल और बिसौली की यदु शुगर मिल चालू हो चुकी हैं। पिछले वर्ष चीनी मिलों ने गन्ने की कुछ प्रजातियों को रिजेक्टेड घोषित किया था। इस पर शासन ने रिजेक्टेड प्रजाति का गन्ना न बोने के लिए आदेश जारी किया था। इस साल जिले में 13670 हेक्टेयर गन्ने की पेड़ी है। विभाग के मुताबिक इसमें करीब दो हजार हेक्टेयर में अस्वीकृत प्रजाति का गन्ना है। अब चीनी मिल वाले रिजेक्टेड गन्ने को खरीदने से मना कर रहे हैं। कुछ केंद्रों पर रिजेक्टेड प्रजाति का गन्ना न होने के बावजूद खरीदने से मना कर दिया जाता है। ऐसे में गन्ना किसान बेहद परेशान हैं। उन्हें मजबूरी में औने-पौने दामों पर गन्ना कोल्हू पर बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। आरोप है कि चीनी मिल वाले माफिया से साठगांठ के चलते गन्ना किसानों को परेशान कर रहे हैं।
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लखनपुर में नहीं खुला केंद्र बदायूं। शहर से सटे ग्राम लखनपुर में हर साल ए और बी दो क्रय केंद्र बनाए जाते थे। इनमें एक सहकारी चीनी मिल शेखूपुर और दूसरा यदु शुगर मिल का होता था। मगर इस बार दोनों क्रय केंद्र यदु शुगर मिल को दे दिए गए। लखनपुर में एक क्रय केंद्र दो दिसंबर को खोल दिया गया था। किसानों के मुताबिक 26 नवंबर जारी की गई पर्चियों में दो दिसंबर को तौल होना लिखा गया था। किसान पर्ची पर लिखी तारीख के मुताबिक ट्रैक्टर-ट्रॉली से गन्ने लेकर लखपुर क्रय केंद्र पहुंच गए। मगर तौल गुरुवार देर शाम तक शुरू नहीं हुई। इससे ट्रॉलियों में भरा गन्ना सूख रहा है। परेशान किसान बुधवार को जिला गन्ना अधिकारी से भी मिले थे। किसानों के मुताबिक लखनपुर का दूसरा क्रय केंद्र अब तक खोला ही नहीं गया।
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गन्ने की अस्वीकृत प्रजातियां चीनी मिल प्रशासन की ओर से इस बार कई गन्ने की प्रजातियों को अस्वीकृत कर दिया है। इससे 92421, 91269, 96275, 98231, 96268 को अस्वीकृत घोषित कर दिया है।
क्या बोले किसान
पिछले वर्षों की भांति इस साल भी सेंटर तो लगा दिए। लेकिन अब तक गन्ने की खरीद शुरू नहीं हो सकी है। इससे गेहूं भी नहीं बोए जा रहे हैं।
-सतेंद्र सिंह, किसरुआ
हमारे पास तो स्वीकृत प्रजाति का गन्ना है, पर फिर भी पर्ची नहीं मिल रही है। जिससे गेहूं बोने के लिए मात्र 80 रुपये क्विंटल में कोल्हू पर बेचने को मजबूर हैं।
- ज्ञानदीप शर्मा, नरेली
एक तो गन्ना मिल ने पिछले साल का बकाया नहीं दिया है। दूसरा गन्ना खरीदने में हीलाहवाली कर रही हैं। ऐसे में कैसे होगी गेहूं की बुवाई। इस साल तो गन्ने के खेत भी खाली करना मुश्किल हो रहा है।
-सर्वेश, बेला