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बरसात ने ‘दलहन’ को लपेटा, बाजरा गिरने के कगार पर
Updated Fri, 22 Sep 2017 11:39 PM IST
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बेमौसम बरसात ने दलहन उत्पादकों का हलक सुखा दिया है। खेतों में पकने को तैयार दलहन की फसलों में सबसे ज्यादा नुकसान उड़द और मूंग को हुआ है, लेकिन अगर एक-दो दिन तक मौसम का मिजाज ऐसा ही रहा तो पिछती मक्का के साथ बाजरा भी चपेट में आ जाएगा। किसानों को शिमला मिर्च और टमाटर के सड़ने का भी डर सताने लगा है।
बृहस्पतिवार दोपहर से शुरू हुई बरसात ने दूसरे दिन शुक्रवार को खासकर दलहन की फसलों पर आफत का सिलसिला बरकरार रखा। दलहन की फसलों में इस समय मूंग और उड़द पकने की स्थिति में है। ऐसे में बरसात उसे किसी भी स्तर पर मुफीद साबित नहीं हो सकती। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक उड़द और मूंग की फसल में फलियों को सामान्य तापमान चाहिए। बरसात की वजह से तापमान में गिरावट दोनों ही फसल के पौधों में बढ़वार को बढ़ावा देगी। पौधों की बढ़वार शुरू हो जाने से फलियों के अंदर दाने सड़ने लगेंगे। पिछते मक्का और बाजरा की हालत भी कमोवेश ऐसी ही बनी हुई है। माना जा रहा है कि एक-दो दिन और बारिश हुई तो बाजरा और मक्का के दाने भी सड़ सकते हैं। शिमला मिर्च और टमाटर की फसल को भी नुकसान होगा। इसके साथ ही बरसात ने सब्जी फसलों में तोरई, लौकी, पत्तीदार गोभी, फूल गोभी, करेला, कद्दू आदि को फायदा महसूस किया जाने लगा है। ये सब्जी ऐसी हैं जिन्हें सितंबर और अक्तूबर महीना में भी सिंचाई की जरूरत होती है। साथ ही गन्ना और मैंथा की फसल को ज्यादा फायदा होगा।
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किसानों को सताने लगा तेज हवा का डर
उझानी। दो दिन में बरसात के दौरान अभी तक तेज हवा नहीं चली है। बूंदाबांदी के दौरान तेज हवा मक्का और बाजरा की फसल काफ नुकसान पहुंचाएगी। बता दें कि बाजरा ही एक ऐसी फसल है जो किसानों को कार्तिक के महीना में सबसे ज्यादा आर्थिक फायदा पहुंचाती है।
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वर्जन
बरसात के दौरान किसानों में खासकर बाजरा, मक्का, शिमला मिर्च और टमाटर उत्पादकों के लिए विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। फसलों में पानी भरने नहीं दिया जाए। किसान ऐसी व्यवस्था करें जिससे खेतों से बरसाती पानी को निकास मिल जाए। इससे नुकसान को कम किया जा सकता है।
- डॉ. अर्जुन सिंह कृषि वैज्ञानिक
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किसानों की सुनिए
इलाके के गांव नरऊ निवासी किसान महावीर सिंह ने बताया कि बरसात से फिलहाल कोई खास नुकसान नहीं हुआ है लेकिन मौसम में सुधार नहीं हुआ तो नुकसान झेलना पड़ेगा।
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कटरी के गांव कुलुआढेर के ओमकार सिंह का कहना है कि किसानों पर मौसम की मार हमेशा से ही पड़ती रही है। आंधी-तूफान तो कभी सूखा पड़ जाता है। किसान को चैन तब मिलता है जब फसल आंगन में आ जाती है।
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बमनौसी निवासी किसान सत्यवीर सिंह का कहना है कि बरसात से किसानों को काफी नुकसान हुआ है। इसकी भरपाई एक साल तक नहीं की जा सकती। जिन फसलों को नुकसान होगा, उनका मुआवजा मिले।