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भूगर्भ जल रीचार्ज के लिए 357 तालाब चिह्नित
बदायूं।
Updated Wed, 17 Jun 2015 11:31 PM IST
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बदायूं प्रदेश के उन खास जिलों में शामिल है, जहां भूगर्भ जल संकट है। बरेली का भूगर्भ जल विभाग बदायूं जिले में हालातों की निगरानी कर रहा है। हालातों को देखते हुए जिलाधिकारी ने कई विभागों का एक दल बनाकर वाटर रीचार्जिंग की संभावनाओं को तलाशने और इसे अंजाम देने की जिम्मेदारी सौंपी है। विभागों ने 357 तालाब चिह्नित किए हैं, जिन्हें वाटर रीचार्जिंग लायक बनाया जाएगा।
जिले में भूगर्भ संकट बरकरार है। इसकी वजह से इस्लामनगर, सहसवान, आसफपुर और अंबियापुर ब्लॉक डार्क जोन में चल रहे हैं। हाल ही डार्क ब्लॉक बिसौली को डार्क जोन से निकाल दिया गया है। हालांकि, इसे अभी क्रिटिकल श्रेणी में रखा गया है। जिलाधिकारी शंभूनाथ ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को बुलाकर उन्हें ऐसे क्षेत्र जहां भूगर्भ का संकट अधिक है। वहां रीचार्जिंक की योजना बनाने को कहा था।
डीएम की पहल पर लघु सिंचाई विभाग को नोडल विभाग बनाकर विभिन्न विभागों को उत्तरदायित्व सौंपा है। इसके तहत सभी विभागों ने मिलकर सर्वे के बाद तालाबों को चयन किया है। इसके माध्यम से वाटर रीचार्जिंग की जा सके और क्षेत्र डार्क श्रेणी से निकल सकें। जो तालाब चिह्नित किए गए हैं। वे अधिकतर भूगर्भ जल के लिए डार्क श्रेणी में शामिल हैं।
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तालाब को रीचार्जं लायक बनाने को होंगे ये काम
1. सिल्ट सफाई
2. तालाबों को गहरीकरण
3. उनके किनारे पौधरोपण
बाढ़ खंड विभाग को कार्ययोजना की जिम्मेदारी
रीचार्जिंग के लिए जिन तालाबों को चिह्नित किया गया है। उन तालाबों को रीचार्ज लायक बनाने के लिए कार्य योजना की जिम्मेदारी बाढ़ खंड को सौंपी गई है।
मनरेगा के साथ ये विभाग भी करेंगे योगदान
कृषि, उद्यान, यूपी पीसीएल, उप्र प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड, जलनिगम, लघु सिंचाई और भूमि संरक्षण विभाग
सभी विभागों के साथ सामंजस्य बन गया है और कार्ययोजना तैयार करने के बाद उनके हिस्से का काम उन्हें दे दिया जाएगा। डीएम ने दायित्व देने के बाद कई बार इस प्रकरण पर बात की है। जल्द ही बरसात के मौसम से पूर्व काम होना है।
- महेश चंद्र सक्सेना, एई, लघु सिंचाई
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जिले में भूगर्भ संकट बरकरार है। इसकी वजह से इस्लामनगर, सहसवान, आसफपुर और अंबियापुर ब्लॉक डार्क जोन में चल रहे हैं। हाल ही डार्क ब्लॉक बिसौली को डार्क जोन से निकाल दिया गया है। हालांकि, इसे अभी क्रिटिकल श्रेणी में रखा गया है। जिलाधिकारी शंभूनाथ ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को बुलाकर उन्हें ऐसे क्षेत्र जहां भूगर्भ का संकट अधिक है। वहां रीचार्जिंक की योजना बनाने को कहा था।
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डीएम की पहल पर लघु सिंचाई विभाग को नोडल विभाग बनाकर विभिन्न विभागों को उत्तरदायित्व सौंपा है। इसके तहत सभी विभागों ने मिलकर सर्वे के बाद तालाबों को चयन किया है। इसके माध्यम से वाटर रीचार्जिंग की जा सके और क्षेत्र डार्क श्रेणी से निकल सकें। जो तालाब चिह्नित किए गए हैं। वे अधिकतर भूगर्भ जल के लिए डार्क श्रेणी में शामिल हैं।
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तालाब को रीचार्जं लायक बनाने को होंगे ये काम
1. सिल्ट सफाई
2. तालाबों को गहरीकरण
3. उनके किनारे पौधरोपण
बाढ़ खंड विभाग को कार्ययोजना की जिम्मेदारी
रीचार्जिंग के लिए जिन तालाबों को चिह्नित किया गया है। उन तालाबों को रीचार्ज लायक बनाने के लिए कार्य योजना की जिम्मेदारी बाढ़ खंड को सौंपी गई है।
मनरेगा के साथ ये विभाग भी करेंगे योगदान
कृषि, उद्यान, यूपी पीसीएल, उप्र प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड, जलनिगम, लघु सिंचाई और भूमि संरक्षण विभाग
सभी विभागों के साथ सामंजस्य बन गया है और कार्ययोजना तैयार करने के बाद उनके हिस्से का काम उन्हें दे दिया जाएगा। डीएम ने दायित्व देने के बाद कई बार इस प्रकरण पर बात की है। जल्द ही बरसात के मौसम से पूर्व काम होना है।
- महेश चंद्र सक्सेना, एई, लघु सिंचाई