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प्रत्याशियों के नामों पर राजनीतिक दलों में मंथन शुरू
Updated Sat, 28 Oct 2017 11:19 PM IST
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नगर निकाय चुनाव
- फोटो : self
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बदायूं। आचार संहिता लागू होने के साथ ही सभी राजनीतिक दल अपने जिताऊ प्रत्याशियों के नाम तय करने में जुट गए हैं। सबसे ज्यादा दावेदार सूबे की सत्तारूढ़ बीजेपी में हैं। जिसकी वजह से बीजेपी के बड़े नेताओं के सामने विषम परिस्थिति खड़ी हो गई है। सो पार्टी प्रत्याशियों का चयन नहीं कर पा रही है। जबकि बाकी दल भी ऐसे प्रत्याशियों को मैदान में उतारना चाह रहे हैं जिनकी छवि अच्छी हो और जिताऊ हों। हालांकि सपा के ज्यादातर प्रत्याशी पहले से ही तय हो चुके हैं उनके नामों की औपचारिक घोषणा होना बाकी है।
छह नवंबर तक नामांकन होने हैं। लिहाजा, यह तय माना जा रहा है कि अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों के नामों की जल्द ही घोषणा हो जाएगी। शहर सीट सामान्य महिला को आरक्षित की गई है। सो बीजेपी से टिकट चाहने वाले दावेदारों की फेहरिस्त लंबी है। बीजेपी के आला नेता इस बात को कह चुके हैं कि टिकट वितरण में कर्मठ, ईमानदार कार्यकर्ता को प्राथमिकता दी जाएगी। कई दावेदारों ने पिछले दिनों ही निकाय चुनाव प्रभारी के सामने अपने आवेदन पत्र दिए।
बीजेपी के सूत्र बता रहे हैं कि अब हर आवेदन पर मंथन किया जा रहा है। देखा जा रहा है कि कौन प्रत्याशी जीत हासिल कर सकता है। बीजेपी का यह भी प्रयास है कि जिस तरह उसने विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक सफलता हासिल की थी उसी तरह निकाय चुनाव में उसका परचम लहाराए। सो वह प्रत्याशी चयन में फूंक-फूंककर कदम रख रही है। सपा पहले से ही इन चुनावों को लेकर अपनी रणनीति साफ कर चुकी है। उस रणनीति के तहत सपा अकेले ही निकाय चुनाव लड़ेगी।
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शायद यही वजह है कि कांग्रेस के दावेदार भी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। बसपा अभी चुनाव को लेकर उतनी गंभीर नजर नहीं आ रही है जितना बाकी दल। यह दीगर है कि बसपा अपने गणित के हिसाब से प्रत्याशियों की तलाश कर रही हो।
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विधायकों पर हैं बड़ी जिम्मेदारी
बदायूं। पिछले दिनों सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ विधायकों की बैठक ली थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि हर विधायक को अपने क्षेत्र के प्रत्याशी को विजयी बनाने की जिम्मेदारी समझनी होगी। सो विधायकों की भी प्रत्याशी के चयन में अहम् भूमिका मानी जा रही है।
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छह नवंबर तक नामांकन होने हैं। लिहाजा, यह तय माना जा रहा है कि अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों के नामों की जल्द ही घोषणा हो जाएगी। शहर सीट सामान्य महिला को आरक्षित की गई है। सो बीजेपी से टिकट चाहने वाले दावेदारों की फेहरिस्त लंबी है। बीजेपी के आला नेता इस बात को कह चुके हैं कि टिकट वितरण में कर्मठ, ईमानदार कार्यकर्ता को प्राथमिकता दी जाएगी। कई दावेदारों ने पिछले दिनों ही निकाय चुनाव प्रभारी के सामने अपने आवेदन पत्र दिए।
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बीजेपी के सूत्र बता रहे हैं कि अब हर आवेदन पर मंथन किया जा रहा है। देखा जा रहा है कि कौन प्रत्याशी जीत हासिल कर सकता है। बीजेपी का यह भी प्रयास है कि जिस तरह उसने विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक सफलता हासिल की थी उसी तरह निकाय चुनाव में उसका परचम लहाराए। सो वह प्रत्याशी चयन में फूंक-फूंककर कदम रख रही है। सपा पहले से ही इन चुनावों को लेकर अपनी रणनीति साफ कर चुकी है। उस रणनीति के तहत सपा अकेले ही निकाय चुनाव लड़ेगी।
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शायद यही वजह है कि कांग्रेस के दावेदार भी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। बसपा अभी चुनाव को लेकर उतनी गंभीर नजर नहीं आ रही है जितना बाकी दल। यह दीगर है कि बसपा अपने गणित के हिसाब से प्रत्याशियों की तलाश कर रही हो।
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विधायकों पर हैं बड़ी जिम्मेदारी
बदायूं। पिछले दिनों सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ विधायकों की बैठक ली थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि हर विधायक को अपने क्षेत्र के प्रत्याशी को विजयी बनाने की जिम्मेदारी समझनी होगी। सो विधायकों की भी प्रत्याशी के चयन में अहम् भूमिका मानी जा रही है।